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विश्वविद्यालय के बजाय विभाग को आरक्षण की इकाई मानकर की जा रही नियुक्ति प्रक्रिया के विरोध में प्रदर्शन

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सांसद प्रवीण निषाद भी धरना-प्रदर्शन में शरीक हुए, कुलसचिव से नियुक्ति प्रक्रिया रोकने को कहा

गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय के पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद की अगुवाई में शिक्षकों, छात्रों, कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय में विभाग को आरक्षण की इकाई मानते हुए चल रही चयन प्रक्रिया का विरोध करते हुए आज विश्वविद्यालय गेट पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में गोरखपुर के सांसद प्रवीण निषाद ने भी भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय में चल रही नियुक्ति प्रक्रिया को रोकने तथा हो चुकी चयन समितियों के लिफाफों को खोलने से रोकने की मांग की गई।

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कुलसचिव शत्रोहन वैश्य ने धरना-प्रदर्शन स्थल पर आकर सांसद प्रवीण निषाद से ज्ञापन लिया। धरना-प्रदर्शन में परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो चन्द्रभूषण अंकुर, महामंत्री प्रो अनिल यादव, प्रो कमलेश गुप्ता, डा. दुर्गा प्रसाद यादव, डा. राजेश यादव, डा. आदित्य कुमार, पवन कुमार सिंह आदि शामिल थे।

सांसद प्रवीण निषाद ने कुलसचिव से कहा कि 29 अप्रैल को होने वाली कार्यपरिषद की बैठक मेें नियुक्तियों के लिफाफे नहीं खोले जाने चाहिए क्योंकि केन्द्र सरकार एवं मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने आरक्षण के मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय के विरूद्ध सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की है तथा यूजीसी ने देश के सभी विश्वविद्यालयों को 20 अप्रैल 2018 को पत्र जारी करके इस बात की हिदायत दी है कि उच्च शिक्षण संस्थाओं में विश्वविद्यालय को इकाई मानकार आरक्षण लागू किया जाय। ऐसे में गोरखपुर विश्वविद्यालय  में विभाग का इकाई मानकर आरक्षण लागू करने के उपरान्त की जा रही नियुक्तियां समाज के बहुजनों के हितों के विरूद्ध है। अतः कल लिफाफे नहीं खोले जाने चाहिए।

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उन्होंने कुलसचिव से कहाकि हम नियुक्तियों का विरोा नहीं करते बल्कि हम चाहते हैं कि विश्वविद्यालय संविधान की भावना के अनुरूप विश्वविद्यालय को इकाई मानकर आरक्षण को लागू करे और तत्पश्चात नियुक्तियां करे ताकि एससी एसटी ओबीसी और दिव्यांगों के साथ न्याय हो सके।

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उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालय समय रहते अपने द्वारा की जा रही इस भारी भूल को लिफाफे न खोलकर सुधार सकता है और समाज को अच्छा संदेश दे सकता है। उन्होंने इस सम्बन्ध में कुलाधिपति को भी फैक्स भेज कर लिफाफे न खोलने की मांग की।

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