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असली और नकली हिन्दू युवा वाहिनी की लड़ाई सड़क पर आई, सुनील सिंह सहित नौ गिरफ्तार, चार केस दर्ज

राजघाट थाने के लाकप में हिन्दू युवा वाहिनी भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह
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गोरखपुर। असली हिन्दू युवा वाहिनी कौन है, की लड़ाई 31 जुलाई को सड़क पर आ आई। हिन्दू युवा वाहिनी के महानगर मंत्री विवेक सूर्या को धमकी देने के आरोप में पुलिस ने पहले हिन्दू युवा वाहिनी भारत के महानगर संयोजक अध्यक्ष चंदन विश्वकर्मा को हिरासत में लिया और जब उनके समर्थन में हिन्दू युवा वाहिनी भारत के राष्टीय अध्यक्ष सुनील सिंह राजघाट थाने पर प्रदर्शन करने वाले पहुंचे तो उनके 9 समर्थकों पर लाठीचार्ज करते हुए गिरफ्तार कर लिया। इन सभी पर रात में ही दो थानों में चार मुकदमे दर्ज कर लिए गए।

हिन्दू युवा वाहिनी भारत के नेताओं द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष व अन्य की गिरफ्तारी  के विरोध में आज जगह-जगह प्रदर्शन की घोषणा सोशल मीडिया में की जा रही है।

राजघाट थाने पर प्रदर्शन करते हिन्दू युवा वाहिनी भारत के कार्यकर्ता

हिन्दू युवा वाहिनी और हिन्दू युवा वाहिनी भारत का ताजा विवाद एक फेस बुक पोस्ट से शुरू हुआ। हिन्दू युवा वाहिनी के महानगर इकाई के मंडल महामंत्री मंत्री विवेक सूर्या ने एक फेस बुक पोस्ट में हिन्दू युवा वाहिनी भारत को नकली हिन्दू युवा वाहिनी बताया था।

सूर्या के अनुसार इस फेसबुक पोस्ट से नाराज होकर हिन्दू युवा वाहिनी के महानगर संयोजक चंदन विश्वकर्मा ने 30 जुलाई को मोबाइल पर फोन कर गालियां दी। घर के नीचे आकर भी अपशब्द कहे। कुछ देर बाद हिन्दू युवा वाहिनी भारत के राष्टीय अध्यक्ष सुनील सिंह का भी मोबाइल पर फोन आया और उन्होंने कहा कि वह 31 जुलाई को दोपहर 12 बजे उनके घर आएंगें और इस बावत बात करेंगे.

सूर्या ने मोबाइल पर धमकी दिए जाने की घटना की जानकारी हिन्दू युवा वाहिनी के पदाधिकारियों के साथ-साथ राजघाट के इंस्पेक्टर को भी दी।

सुनील सिंह को गिरफ्तार कर ले जाती पुलिस

मोबाइल पर धमकी और गालीगलौच की शिकायत पर 31 जुलाई की दोपहर पुलिस ने चंदन विश्वकर्मा को हिरासत में ले लिया। इसकी जानकारी होने पर सुनील सिंह अपने साथियों के साथ राजघाट थाने पहुंच गए और चंदन विश्वकर्मा को छोड़ने के लिए प्रदर्शन करने लगे। राजघाट पुलिस का आरोप है कि सुनील सिंह और उनके साथियों ने चंदन विश्वकर्मा को लाकप से जबरन छुड़ाने की कोशिश की। इसके बाद राजघाट थाने पर एसपी सिटी विनय सिंह भी पहुंच गए। एसपी सिटी के पहुंचने के बाद पुलिस ने सुनील सिंह और उनके साथियों पर हल्का लाठीचार्ज किया और सुनील सिंह, चंदन विश्वकर्मा के पार्षद भाई सौरभ विश्वकर्मा समेत नौ लोगों को गिरफ्तार कर लिया.

मुकदमा दर्ज हो जाने के बाद हिन्दू युवा वाहिनी के महानगर अध्यक्ष एवं पार्षद रामभुआल निषाद, विवेक सूर्या को लेकर उसके घर जा रहे थे. रास्ते में उनकी गाड़ी पर पथराव हुआ। इसके बाद वह भागकर थाने आए.

विवेक सूर्या जिनके फेसबुक पोस्ट के बाद ताजा विवाद शुरू हुआ

इस घटना की जानकारी के बाद एसएसपी शलभ माथुर भी राजघाट थाने पहुंचे। देर रात सुनील सिंह सहित नौ लोगों के खिलाफ चार केस दर्ज कर लिए गए। इसमें तीन केस राजघाट थाने में जबकि एक केस कोतवाली में दर्ज किया गया। राजघाट में दर्ज एक केस में सुनील सिंह, चंदन विश्वकर्मा, सौरभ विश्वकर्मा आदि पर विवेक सूर्या के घर चढ़कर धमकी देने, गाली गलौच व मारपीट का आरोप लगाया गया है। दूसरे केस के वादी राजघाट के इंस्पेक्टर राम वेलास यादव खुद हैं। उन्होंने सुनील सिंह व सौरभ विश्वकर्मा के खिलाफ नामजद व 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ राजघाट थाने में सरकारी कामकाज में बाधा डालने, अभियुक्त को थाने से छुड़ाने की कोशिश का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है। करने का दर्ज किया गया है।

तीसरा केस हिन्दू युवा वाहिनी के महानगर संयोजक एवं पार्षद रामभुआल कुशवाहा की तहरीर पर राजघाट थाने में दर्ज हुआ है. इस केस में सुनील सिंह, चंदन विश्वकर्मा व सौरभ विश्वकर्मा पर हत्या के प्रयास का आरोप लगाया गया है. चौथा मुकदमा कोतवाली में दर्ज हुआ है. इसे नगर निगम के चैकीदार की तहरीर पर दर्ज किया गया है जिसमें नगर निगम परिसर में प्रदर्शन के दौरान हंगामा और तोड़फोड़ का आरोप लगाया गया है.

इस मामले में पुलिस द्वारा बड़ी तेजी से की गई कारवाई और एक साथ चार मुकदमा दर्ज करना चर्चा का विषय बन गया है. बड़े अधिकारियों का खुद राजघाट थाने पर जाना और कार्रवाई कराना इस बात का संकेत है कि शासन स्तर से हिन्दू युवा वाहिनी भारत के पदाधिकारियों के खिलाफ अब सख्ती की जाएगी. आने वाले दिनों में इस संगठन के दूसरे पदाधिकारियों पर भी ऐसी कार्रवाई हो सकती है. कुछ पुराने केस भी खुल सकते हैं.

हिन्दू युवा वाहिनी भारत के नेताओं ने पुलिस पर बर्बर लाठचार्ज करने और फर्जी केस दर्ज करने के आरोप लगाए हैं.  सुनील सिंह की ओर से फेस बुक पर आज सुबह की गई एक पोस्ट में कहा गया है कि -वक्त न्याय जरूर करेगा, यह संघर्ष व्यर्थ नहीं जाएगा, जय श्रीराम.

हिन्दू युवा वाहिनी भारत के गठन के बाद सुरु हुई असली और नकली की लड़ाई

असली हिन्दू युवा वाहिनी और नकली हिन्दू युवा वाहिनी की लड़ाई ढाई महीने पहले से शुरू हुई लेकिन इसकी पृष्ठिभूमि 16 महीने पहले विधानसभा चुनाव-2017 के समय की है। तब हिन्दू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह थे और वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सबसे करीबी लोगों में शुमार थे।

यहां बताना जरूरी है कि योगी आदित्यनाथ हिन्दू युवा वाहिनी के मुख्य संरक्षक हैं और मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने यह दायित्व छोड़ा नहीं है। विधानसभा चुनाव में सुनील सिंह सहित कई पदाधिकारी भाजपा से चुनाव लड़ने के इच्छुक थे लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। इस पर सुनील सिंह, प्रदेश महामंत्री राम्लाक्ष्मण ने बगावत कर दी। सुनील सिंह ने 13 सीटों पर शिवसेना के सहयोग से हिन्दू युवा वाहिनी के बागियों को चुनाव लड़वा दिया और पांच सीटों पर भाजपा के बागियों का समर्थन किया हालांकि इसमें से कोई जीतना तो दूर उल्लेखनीय मत भी प्राप्त नहीं कर सका।

विधानसभा चुनाव के बाद स्थितियां एकदम बदल गईं. प्रदेश में भाजपा की प्रचंड जीत हुई और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बन गए. हिन्दू युवा वाहिनी के बागियों ने नरम रूख अख्तियार करते हुए फिर से संगठन में वापसी की कोशिशें की लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. मुख्य संरक्षक योगी आदित्यनाथ का बागियों के खिलाफ कड़ा रूख बना रहा. पिछले वर्ष गुरू पूर्णिमा पर सुनील सिंह ने गोरखनाथ मंदिर जाकर योगी आदित्यनाथ का आशीर्वाद भी लिया लेकिन बात बनी नहीं. हिन्दू युवा वाहिनी में वापसी की सभी संभावनाएं समाप्त होते देख हियुवा के बागी नेता अन्य विकल्पों पर विचार करने लगे.

सुनील सिंह (फाइल फोटो)

उधर योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद हिन्दू युवा वाहिनी उनके निर्देश पर ’ रचनात्मक कार्यों ’ में लग गया लेकिन रचनात्मक कार्यों का कोई अनुभव नहीं होने और संस्थापक पदाधिकारियों के संगठन से बाहर चले जाने से इसकी गतिविधियां सिमटने लगीं. इसका सीधा असर इस वर्ष हुए गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में देखने को मिला जिसमें भाजपा प्रत्याशी उपेन्द्र दत्त शुक्ल को करारी हार का सामना करना पड़ा।. हार की समीक्षा में भी यह बातें सामने आयीं कि हिन्दू युवा वाहिनी जिस तरह योगी आदित्यनाथ के लिए चुनाव प्रचार में जुटता था, उपचुनाव में नहीं जुटा और उसने अपना प्रभाव भी खो दिया है.

इसी बीच सुनील सिंह ने 13 मई 2018 को लखनउ में हिन्दू युवा वाहिनी भारत नाम से नया संगठन बना लिया और उसकी कई राज्यों में प्रदेश इकाई से लेकर जनपद इकाई तक का संगठन बनाने लगे। इस संगठन का सम्मेलन लखनउ में वीवीआईपी गेस्ट हाउस में किया गया था. इसमें सुनील सिंह को हियुवा भारत का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया.  हियुवा भारत का सम्मेलन वीवीआईपी गेस्ट हाउस में कराने का खामियाजा गेस्ट हाउस प्रभारी को भुगतना पड़ा और उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।

हियुवा भारत के गठन के बाद हिन्दू युवा वाहिनी के तमाम नेता इसमें शामिल हो गए। सुनील सिंह पूर्वांचल के जिले के दौरे कर हियुवा भारत का संगठन बनाने लगे. ये लोग अब भी योगी आदित्यनाथ को अपना मार्गदर्शक बता रहे थे और हियुवा भारत को ही असली हियुवा होने का दावा कर रहे थे. इसको लेकर दोनों संगठनों के नेताओं के बीच फेसबुक, व्हाट्सएप पर बयानबाजी हो रही है जिसका परिणति 31 जुलाई को राजघाट थाने और मिर्जापुर मुहल्ले में दिखी.

वर्ष 2002 में बनी थी हिन्दू युवा वाहिनी

योगी आदित्यनाथ ने हिन्दू युवा वाहिनी का गठन 2002 में किया था. सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत इस संगठन के योगी मुख्य संरक्षक है. योगी आदित्यनाथ ने इसे ‘ सांस्कृतिक संगठन ’ बताते हुए कहते रहे हैं कि  कि यह ग्राम रक्षा दल के रूप में राष्ट्र विरोधी, हिन्दू विरोधी गतिविधियों को रोकने और माओवाद के बढ़ते प्रभाव को नियंत्रित करने का काम करता है. ’

लेकिन हिन्दू युवा वाहिनी को बनाने के पीछू दूसरे कारण थे। योगी आदित्यनाथ ने इसे तब बनाया जब वह 1998 में 26 हजार वोट से जीतने के बाद दूसरा चुनाव 1999 में सिर्फ 7322 मतों से जीते. हिन्दू युवा वाहिनी ने अपना काम शुरू किया और उसकी कार्यवाहियों से पूरा पूर्वांचल साम्प्रदायिक उन्माद की चपेट में आ गया.  गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संतकबीरनगर, मउ, आजमगढ़ में साम्प्रदायिक हिंसा की दर्जनों घटनाओं में हिन्दू युवा वाहिनी से जुड़े लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए. यह संगठन साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाओं मं किस तरह लिप्त था, इसका अनुमान इसी से लगा सकते हैं कि हिन्दू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह पर 70 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं.

योगी आदित्यनाथ के साथ सुनील सिंह (फाइल फोटो )

हिन्दू युवा वाहिनी के पदाधिकारियों पर दर्ज मुकदमों की संख्या के बारे में ठीक -ठीक किसी को नहीं पता लेकिन मुकदमों की संख्या 200 से अधिक बताई जाती है.

पंचरूखिया कांड, मोहन मुंडेरा कांड, मऊ दंगा इस संगठन की ‘ उपलब्धियों ’  के बतौर दर्ज है. योगी आदित्यनाथ पर भी तीन केस इस दौरान दर्ज हुए.

हिन्दू युवा वाहिनी के गठन के बाद से हर चुनाव में योगी का जीत का अंतर बढ़ता गया और वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव वह तीन लाख से अधिक वोटों से जीते.

योगी आदित्यनाथ ने हिन्दू युवा वाहिनी के संगठन को प्रदेश के 40 से अधिक जिलों में विस्तारित कर दिया.

वर्ष 2002 में जब भाजपा ने उनके कहने के बावजूद गोरखपुर शहर के विधायक शिवप्रताप शुक्ल (अब राज्य सभा सदस्य) का टिकट नहीं काटा तो उन्होंने बगावत कर दी और हिन्दू युवा वाहिनी की ओर से डा. राधा मोहन दास अग्रवाल को चुनाव मैदान में उतार दिया. उन्होंने तीन और स्थानों पर अपने उम्मीदवार उतारे. शिवप्रताप शुक्ल चुनाव हार गए और भाजपा में हाशिए पर चले गए. इसके बाद से हर चुनाव में भाजपा-हिन्दू युवा वाहिनी के बीच टकराव होता रहा.

2014 के लोकसभा चुनाव में भी हिन्दू युवा वाहिनी के कई नेताओं को टिकट नहीं मिला तो वे बागी बन चुनाव लड़ने की बात करने लगे लेकिन योगी ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया. वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में जब हिन्दू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह, महामंत्री रामलक्ष्मण सहित कई नेताओं को भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो वे नाराज हो गए.  वे अलग से चुनाव लड़ने की बात करने लगे लेकिन योगी ने उनका साथ देने से इन्कार कर दिया.

इसके बाद हिन्दू युवा वाहिनी के नेताओं ने अपने सरपरस्त योगी के खिलाफ ही बगावत कर दी। योगी आदित्यनाथ की चेतावनी के बावजूद हिन्दू युवा वाहिनी के नेताओं के बागी नेताओं ने 13 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए. योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह पर पैसे पर बिक जाने, राष्ट्रद्रोही तत्वों के षडयंत्र का शिकार होने के आरोप लगाते हुए उन्हें संगठन से निष्कासित कर दिया. सुनील सिंह के साथ संगठन की स्थापना काल से जुड़े कई नेताओं ने दिया. तब सुनील सिंह ने कहा था कि महाराज जी ( योगी आदित्यनाथ ) भाजपा के काले जादू के प्रभाव में हैं. इसलिए हिन्दू युवा वाहिनी की उपेक्षा कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के कहने पर योगी आदित्यनाथ हिन्दू युवा वाहिनी को विघटित कर देंगे क्योंकि अब उन्हें इसकी जरूरत नहीं है.

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