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मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक पैसे-पैसे के मोहताज , 34 माह से केंद्र सरकार ने नहीं दिया मेहनताना

फाइल फोटो

मानदेय रोके जाने के विरोध में शिक्षकों का लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरना जारी

गोरखपुर। केंद्र पुरोनिर्धारित मदरसा (एसपीक्यईएम) आधुनिकीकरण योजना के तहत जिले के करीब 163 मदरसों में तैनात करीब 489 शिक्षकों का 34 माह का मानदेय बकाया है। करीब साढ़े पांच माह से राज्यांश भी नहीं मिला है। शिक्षकों के हालात खराब हैं। पैसे-पैसे की मोहताजी है। मदरसों में आधुनिक शिक्षा व्यवस्था बेपटरी होने वाली है। वहीं मदरसों की जांच सरकार द्वारा कई बार करवायी जा चुकी है।

मदरसा व शिक्षकों का सारा विवरण मदरसा पोर्टल पर मौजूद है। केंद्र व राज्य सरकार के रवैये के विरोध में शिक्षक दिल्ली से लेकर लखनऊ तक गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। विगत 21 दिनों से लखनऊ के ईको गार्डन में शिक्षकों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। उप्र के करीब 6726 मदरसों में उक्त योजना संचालित है। जिसमें करीब 20000 शिक्षक मदरसों में आधुनिक विषयों की शिक्षा विगत सन् 1998 से देते चले आ रहे हैं। काफी समय से यह शिक्षक उपेक्षित हैं। जिस वजह से शिक्षक भुखमरी व कर्ज के कगार पहुंच गए हैं।

योजना के तहत केंद्र सरकार स्नातक शिक्षक को 6 हज़ार रुपये और स्नातकोत्तर शिक्षक को 12 हज़ार रुपये देती है। राज्य सरकार स्नातक शिक्षक को 2 हज़ार रुपये और स्नातकोत्तर शिक्षक को 3 हज़ार रुपये अलग से देती है। पिछले साल सितंबर माह में जब राष्ट्रीय अल्संख्यक आयोग के सदस्य सरदार मंजीत सिंह राय जिले में आए थे, तो उनके सामने शिक्षकों की समस्या उठी थी। उन्होंने आश्वस्त किया था कि समस्या का समाधान 15 दिन में कराएंगे, लेकिन हुआ कुछ भी नहीं।

 

घर चलाने के साथ इलाज कराना भी दुश्वार – मेहताब

खूनीपुर के रहने वाले मदरसा इस्लामियां जियाउल उलूम पीपीगंज में शिक्षक सैयद मेहताब अनवर ने बताया कि शिक्षकों का 34 माह मानदेय केंद्र सरकार ने जारी नहीं किया है। कई माह से राज्यांश भी नहीं मिला है। जिंदगी चलाना बहुत मुश्किल हो गया है। कई रोज से बीमार हूं इलाज में दुश्वारी हो रही है। मदरसों में आधुनिक शिक्षा की वकालत करने वाली केंद्र व प्रदेश सरकार के कथनी और करनी में काफी अंतर देखने को मिल रहा हैं। दोनों सरकारें मदरसों में आधुनिकीकरण शिक्षा को बढ़ावा देने की बात तो करती हैं लेकिन मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को मानदेय देने में हीलाहवाली कर रही हैं। अगर मदरसों के प्रति सौतेला व्यवहार करना है तो योजना बंद कर दें सरकार, ताकि शिक्षकों की मेहनत व भावनाएं तो आहत न हों।

रोजी-रोटी, इलाज व जीवन यापन का संकट : गौसिया

खोखर टोला की रहने वाली मदरसा दारुल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार में शिक्षिका गौसिया सुम्बुल ने कहा कि मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों पर मदरसों में हिन्दी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, अंग्रेजी पढ़ाने का दारोमदार हैं। शिक्षक दिल्ली से लेकर लखनऊ तक गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। रोजी-रोटी, चिकित्सा समेत तमाम दुश्वारियों से दो चार होना पड़ रहा है। 34 माह से मानदेय नहीं मिलने से मदरसा शिक्षकों के सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है। हमारी मांग है कि मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों का बकाया मानदेय जल्द दिया जाए। शिक्षकों को स्थायी करने के साथ ही केंद्र सरकार के बराबर उप्र सरकार द्वारा अंशदान दिया जाए। प्रतिमाह मानदेय दिए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

बेटे को थैलीसीमिया बीमारी, इलाज कराते-कराते कर्जदार हो गया – आसिफ

जमुनहिया बाग गोरखनाथ के रहने वाले आसिफ महमूद खान ‘एम फातिमा गल्स स्कूल नकहा नं.1’ में आधुनिकीकरण शिक्षक हैं। इनका चार साल का बच्चा थैलीसीमिया बीमारी से पीड़ित है। दो माह में तीन बार उसे खून चढ़ाया जाता है। इनके बेटे को को पैदाइश के पांचवें माह में मेजर थैलीसीमिया जैसी बीमारी ने चपेट में ले लिया। उन्होंने बताया कि 34 माह से केंद्र सरकार ने मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों का मानदेय नहीं भेजा है। ऐसे में बच्चे का इलाज कराने में काफी परेशानी हो रही है। बच्चे को दो माह में तीन बार खून चढ़ता है। हर बार ढ़ाई से तीन हजार रुपया खर्च होता है। प्रदेश सरकार द्वारा मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों को दिया जाने वाला राज्यांश भी कई माह से नहीं मिला है। ऐसे में इलाज व घर का खर्चा चलाना मुश्किल होता है। वहीं बेटे की बीमारी पर काफी खर्च होता है। काफी कर्जदार हो गया हूं।

हर बार मानदेय के लिए संघर्ष करना पड़ता है शिक्षकों को : नवेद

अखिल भारतीय मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ के मंडल अध्यक्ष नवेद आलम ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित मदरसा आधुनिकीकरण योजना जब से शुरू हुई है तब से सरकार माहवार मानदेय देने की व्यवस्था तक सुनिश्चित नहीं कर सकी है। जिले में करीब 163 के आस-पास मदरसे केंद्र सरकार द्वारा संचालित मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत आच्छादित हैं। इसमें करीब 489 शिक्षक कार्यरत हैं। विभिन्न मांगों को लेकर लखनऊ में धरना जारी है। समय से मानदेय नहीं मिलने से शिक्षकों की जिंदगी बेपटरी हो गई है। सरकार कई बार मदरसों की जांच करवा चुकी है। मदरसा शिक्षकों ने हर बार जांच में पूरा सहयोग किया इसके बाद भी मानदेय रोके जाने से शिक्षक आक्रोशित हैं।
अगर सरकार इन शिक्षकों की समस्याओं के प्रति कोई उचित कदम नहीं उठाती हैं तो आने वाले चुनाव में सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। शिक्षक रोजी-रोजी से खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। मदरसों में आधुनिक विषयों की शिक्षा प्रभावित भी हो सकती है।

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