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गोरखपुर विश्वविद्यालय में महायोगी गुरू गोरक्षनाथ शोध पीठ का शिलान्यास

गोरखपुर। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज गोरखपुर विश्वविद्यालय में महायोगी गुरू गोरक्षनाथ शोध पीठ का शिलान्यास किया। इस मौके पर उन्होंने गोरक्षनाथ शोध पीठ की वेबसाइट को लांच भी  किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहा कि भारत के अतीत पर नजर डाले तो यह देखने को मिलता है कि हमारे देश ने दुनिया को धार्मिक नेतृत्व दिया। पिछले चार वर्षों से यूएनओ के द्वारा योग को वैश्विक मान्यता दी। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है अब लगभग 192 देश के लोग योग करते हैं यह आध्यात्मिक चेतना की देन है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य के अंदर सारा ज्ञान छिपा है। बस उसे जाग्रत करने की जरूरत है। दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय ने 60 वर्षों के समय में देश को महान विभूतियों को दिया है। योग की सभी विधाओं में आसन का महत्व है. धैर्य पूर्वक बैठने से एवं एकाग्र चित्त रहने से आपको सफलता जरूर मिलेगी. उन्होंने कहा कि महा योगी गुरुगोरक्षनाथ शोध पीठ योग से लेकर अध्यात्म तक की महत्ता को स्थापित करेगा। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों जैसे असम, त्रिपुरा,  मणिपुर, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, महाराष्ट्र में भ्रमण के बाद उन्हें गुरु गोरक्षनाथ के अनुयायियों और मानने वालों की जब जानकारी मिली और ऐसे लोगों को देखा तो यह आवश्यक हो गया कि एक ऐसी पीठ की स्थापना हो जिससे लोग उससे जुड़ सकें और शोध को पूरा कर सकें।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान शोध पीठ के अधिशासी समिति के सदस्य डॉ प्रदीप राव की किताब नाथ पंथ का विमोचन किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जी ने 14 डॉक्टरों को भी सम्मानित किया, जो डायबिटीज को कंट्रोल करने की दिशा में कुछ अभिनव कार्य कर रहे हैं।

इस दौरान यूजीसी के चेयरमैन प्रो0 धीरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि आज के दौर में विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ धार्मिक विकास की भी जरूरत है। यह मानसिक शांति प्रदान करता है। भारत की मूल चेतना आध्यात्मिक है आध्यात्मिकता की वजह से हमारी सोच अच्छी विकसित होती है उन्होंने यह भी कहा जब जब हमें महापुरुषों एवं गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है नवाचार जन्म लेता है  विद्यार्थियों को आज के समय में केवल शारीरिक शिक्षा देना अनिवार्य नहीं है उनका आध्यात्मिक विकास भी बहुत आवश्यक है क्योंकि वही हमें एक नई ऊर्जा देता है। साथ ही साथ शिक्षकों को रोल मॉडल भी बनना चाहिए।

उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से यह भी अनुरोध किया कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के लिए नैक के द्वारा मूल्यांकन बहुत आवश्यक है. इसीलिए सभी नैक से मूल्यांकन जरूर कराएं. आज सोशल कनेक्ट का युग है. इसीलिए उन्होंने कहा कि यूजीसी ने उनके नेतृत्व में हर विश्वविद्यालय को निर्देशित किया है कि वह अपने परिक्षेत्र के 5 गांवों का सर्वांगीण विकास का कार्य करें।
कुलपति वी0के0 सिंह सभी का स्वागत किया.  इस मौके पर मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एस एन सिंह, इलाहाबाद राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद, जननायक राज्य विश्वविद्यालय बलिया के कुलपति प्रोफेसर योगेंद्र सिंह, पूर्णिया विश्वविद्यालय बिहार के कुलपति, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु के पूर्व कुलपति प्रो रजनीकांत पांडे, राष्ट्रीय सेवा योजना के प्रदेश के प्रभारी राज्य संपर्क अधिकारी डॉ अंशु शर्मा, प्रोफेसर विनोद कुमार सिंह, प्रो अजय कुमार शुक्ला, प्रोफेसर श्री प्रकाशमणि त्रिपाठी,  प्रोफेसर मानवेंद्र सिंह, शीतला प्रसाद सिंह, डॉक्टर सुधाकर लाल श्रीवास्तव सहित विश्व विद्यालय के शिक्षक कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.

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