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देवरिया के बालिका गृह कांड में एसपी और सीओ का ट्रांसफर, कोतवाल-चौकी इंचार्ज सस्‍पेंड

एस पी की प्रेसवार्ता के दौरान मौजूद गिरफ्तार गिरिजा त्रिपाठी व उनके पति मोहन त्रिपाठी साभार- देवरिया लाइव
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गोरखपुर/देवरिया. देवरिया के बालिका गृह कांड में आखिरकार पुलिस कप्तान रोहन पी कनय पर कार्रवाई हो गई. बुधवार को इस घटना में एडीजी की जांच में पुलिस की लापरवाही मिलने की पुष्टि होते ही डीजीपी ने एसपी रोहन पी कनय को मुख्यालय से संबद्ध कर दिया. इसके अलावा सीओ सदर दयाराम सिंह गौर को भी स्‍थानांतरित कर दिया गया है.

यहाँ तैनात रहे एसपी राकेश शंकर को भी मुख्यालय से सम्बद्ध किया गया है. राकेश शंकर इस समय डीआईजी बस्ती रेंज के पद पर तैनात थे. वह 24 सितंबर 2017 से 24 मार्च 2018 तक देवरिया के एसपी रहे थे,

तत्कालीन कोतवाल प्रभातेश श्रीवास्तव और स्टेशन रोड चौकी इंचार्ज जटाशंकर सिंह यादव निलंबित कर दिए गए हैं.

 एन कोलांची को देवरिया का नया एसपी बनाया गया है. नए एसपी 2008 बैच के आईपीएस हैं.

शासन ने उन सभी थानेदारों के खिलाफ कार्रवाई का भी निर्देश दिया है जिन्होंने मान्यता समाप्त होने के बावजूद गिरिजा त्रिपाठी की संस्था द्वारा संचालित बालिका गृह और स्वाधार को बालिकाओं और महिलाओं को सौंपा था.

5 अगस्त की देर रात पुलिस ने छापेमारी कर गिरिजा त्रिपाठी की संस्था मां विध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान से जुड़ी बालिका गृह और स्वाधार गृह से 23 बच्चियों और महिलाओं को मुक्त कराया था. पुलिस ने दावा किया था कि बालिका गृह और स्वाधार गृह में बालिकाओं और महिलाओं के साथ यौन शोषण होता है. पुलिस ने संस्था की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी, उनके पति मोहन त्रिपाठी और बेटी को गिरफ्तार किया था.

इस घटना के खुलासे के बाद पता चला कि रोक के बावजूद पुलिस एक वर्ष तक संस्था द्वारा संचालित बालिका गृह और स्वाधार गृह को लड़कियों व महिलओं की सुपुर्दगी देती रही. हाई कोर्ट ने भी यह सवाल उठाया और कहा कि इसके लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारीयों के खिलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए. इस मामले की जाँच एडीजी जोन गोरखपुर दावा शेरपा को सौंपी गई.

एडीजी जोन ने 11 अगस्त को देवरिया पहुंच कर जांच की तो पाया गया कि न सिर्फ संस्था की मान्यता समाप्त होने के बावजूद बालिका गृह को पुलिस ने बच्चियों और संवासिनियों को सौंपा, बल्कि तत्कालीन डीएम सुजीत कुमार के द्वारा 17 सितंबर 2017 को एसपी समेत सभी थानाध्यक्षों को भेजे गए पत्र की भी अनदेखी की गई. एडीजी जोन ने 13 अगस्त को अपनी जांच रिपोर्ट पुलिस महानिदेशक को सौंपी थी. एक दिन बाद 14 अगस्त को यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री को दी गई. मुख्यमंत्री ने सभी दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति दी. इसी के बाद यह कार्रवाई की गई.

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