स्वास्थ्य

देवरिया में ढाई सौ कुपोषित बच्चों को मिला नया जीवन

एनआरसी केन्द्र में अपने कुपोषित बच्चे को इलाज के लिेये लेकर भर्ती एक मां

पोषण पुनर्वास केन्द्र में  कुपोषित बच्चों को पोषक आहार व इलाज के जरिये बचाया गया  

देवरिया,  जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी)  कुपोषित बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लौटा रहा है . 15 बेड वाले वातानुकूलित  वार्ड में कुपोषित बच्चों को  भर्ती कराकर उन्हें पोषणयुक्त आहार देकर डाक्टरों की टीम उनका इलाज करती है. 2017 से अबतक तक यहां 250 से ज्यादा  बच्चों को नया जीवन मिल चुका है.

देसई देवरिया निवासी 14 माह  का संगम आज खुश है अपने नन्हें पैरों के सहारे खड़े होकर चलने-फिरने कोशिश करने लगा है. चेहरे पर बीच-बीच में दिखाई-देने वाली मुस्कुराहट यह बताने के लिए काफी है कि अब उसे कोई बीमारी नहीं है. न ही उसे कोई शारीरिक कमजोरी है. संगम की मुस्कान के साथ ही उसकी मां आरती की खुशी भी झलक रही है. आखिरकार उसकी मां खुश भी क्यूं न हो, पोषण पुनर्वास केंद्र में आकर कुपोषण के शिकार उसके लाड़ले की सेहत ठीक हो गयी। यहां कुछ दिन के इलाज,पोषक आहार के खान-पान,नियमित चिकित्सकीय जांच से संगम स्वस्थ है.  संगम को 13 जुलाई 2019  को एआरसी में भर्ती कराया गया। एक माह पहले संगम का कम वजन, मायूस चेहरा, बार-बार रोना, और शारीरिक कमजोरियां बच्चे के साथ माता-पिता को भी परेशान किए हुए थी. संगम की मां आरती  ने बताया कि उन्हें बहुत ही खुशी हो रही है कि उसका बेटा स्वस्थ हो गया है. पोषण पुनर्वास केंद्र में उचित देख रेख के साथ निः शुल्क में दूध, फल खिचड़ी, हलवा एवं कुपोषित बच्चों के लिए विशेष रूप से तैयार पोषक आहार दिए जाते हैं. चिकित्सकों द्वारा प्रतिदिन स्वास्थ्य जांच करने के साथ ही उपचार भी किया जाता है . आरती ने बताया कि उसके बेटे के स्वास्थ्य को लेकर काफी चिंता हो रही थी. निजी अस्पताल भी गए। लेकिन राहत नहीं मिली।  फिर गांव की आशा ने एनआरसी के बारे में बताया और फिर संगम को यहां लेकर आई. पोषण पुनर्वास केंद्र में 12 जुलाई 2019 से भर्ती रामपुर की सात महीने की तनूजा उ की मां नीलम ने बताया कि यहां की व्यवस्था ठीक है। समय पर भोजन के साथ ही फल, दूध और पोषण आहार दिये जाते है. 

बच्चों के लिए तैयार की जाती है स्पेशल डाइट

केंद्र प्रभारी डॉ. आरके श्रीवास्तव  ने बताया कि इस केंद्र में छह माह से पांच साल तक के कुपोषित बच्चे रखे जाते हैं. यहां शुरुआती दौर में 14 दिन रखकर बच्चों का इलाज व पोषक तत्वों से युक्त आहार दिया जाता है. इस दौरान भर्ती होने वाले बच्चों के लिए स्पेशल डाइट तैयार की जाती है. दूध, खिचड़ी, हलवा सहित  कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन एवं वसा जैसे जरूरी पोषक तत्व दिया जाता है. इसके अलावा बच्चे के साथ आने वाली बच्चे की मां या अन्य परिजन को भोजन के अलावा  पचास रुपये रोजाना भत्ता भी दिया जाता है. बच्चों के खेलने के लिए खिलोनो की पूरी व्यवस्था की गई है. उन्होंने बताया कि इलाज बाद डिस्चार्ज बच्चों को परिजनों  द्वारा फालोअप के लिए लाने पर उनके भत्ता दिया जाता है. यदि वह 15 दिन में इलाज का अपडेट कराने आते है तो उन्हें 140 रुपये मिलते है. यह भत्ता उन्हें दो महीने तक मिलता है। केंद्र पर 8 कर्मचारियों की तैनाती है. 4 स्टाफ नर्स ब्यूटी मिश्रा, शशि तिवारी, स्वेता चौहान, तृप्ति भारती व डाइटीशियन अनामिका मिश्रा, कुक बृजनारायण चौहान, केयर टेकर ओमप्रकाशसफाईकर्मी फूलमती   अपनी जिम्मेदारी निभातें है और बच्चों की देखभाल करते हैं. 

 

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