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दो हजार मदरसा शिक्षकों ने लखनऊ में दिया धरना

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मदरसा शिक्षकों पर जुल्म : 11 करोड़ 27 लाख रुपये का केंद्रांश एवं 2 करोड़ रुपये का राज्यांश बकाया

-बकाया चार माह का राज्यांश 15 दिन में जिले में भेजने का मिला आश्वासन

-केंद्रांश के लिए केंद्र को चिट्ठी लिखेगी राज्य सरकार

लखनऊ/गोरखपुर। मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों का कोई पुरसाहाल नहीं है। केंद्र सरकार ने दो व तीन साल से मानदेय जारी नहीं किया है तो राज्य सरकार भी चार माह से राज्यांश दबाये बैठी है। केंद्र पुरोनिर्धारित मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत जिले के करीब 160 मदरसों में तैनात करीब 480 शिक्षकों का 11 करोड़ 27 लाख रुपये का केंद्रांश (मानदेय) एवं 2 करोड़ रुपये का राज्यांश व कुछ का 10 माह का राज्यांश भी बकाया है।

27 माह से मानदेय का इंतजार कर रहे मदरसा शिक्षकों की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चली है, बावजूद इसके वह छात्रों को पढ़ा रहे हैं।

केंद्र एवं राज्य की सत्ता तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए लखनऊ में पूरे प्रदेश से करीब दो हजार मदरसा शिक्षकों ने 23 जुलाई को धरना दिया। इस धरने में गोरखपुर के करीब 100 शिक्षक शामिल हुए।

अखिल भारतीय मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ के प्रतिनिधि मंडल ने उप्र अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी से मुलाकात की और उनके सामने अपनी मांगें रखी। मंत्री ने राज्य सरकार द्वारा बकाया राज्यांश 15 दिनों के अंदर जिले में भेजने का आश्वासन दिया। वहीं केंद्रांश (मानदेय) के लिए केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर समस्या से अवगत कराने की बात कही एवं तमाम रुकावटों को दूर करने का दिलासा दिया। जरुरत पड़ने पर केंद्र सरकार के पास सचिव को भेजने की भी बात कही।

मिली जानकारी के मुताबिक गोरखपुर जनपद के 160 मदरसों में केद्र पुरोनिर्धारित मदरसा आधुनिकीकरण योजना के अंतर्गत 480 शिक्षक तैनात है। इन शिक्षकों को मानदेय केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा निर्धारित धनराशि से प्रदान किया जाता है। अखिल भारतीय मदरसा आधुनिकीकरण योजना शिक्षक संघ के प्रदेश संयोजक बदरे आलम अंसारी बताते हैं कि 27 माह से केंद्रांश बकाया है। इसके अलावा 10 माह से कुछ शिक्षकों को राज्यांश भी नहीं मिला है। इसके अलावा चार माह से राज्यांश भी बकाया है।

बदरे आलम कहते हैं कि केंद्र सरकार के निर्देश पर राज्य स्तर, निदेशालय स्तर एवं विभागीय स्तर पर चार बार जांच कर रिपोर्ट प्रेषित की जा चुकी है। इसके अलावा मदरसों का काम काज आनलाइन पोर्टल पर ला दिया गया। उसके बाद भी केंद्र सरकार केंद्रांश जारी नहीं कर रही है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के अधिकारियों को कहना है कि उन्हें राज्य सरकार ने बजट इस्तेमाल करने का प्रमाण पत्र नहीं दिया है, जबकि प्रदेश सरकार के अधिकारी कहते हैं कि बजट से इस्तेमाल का प्रमाण पत्र प्रेषित कर कई बार रिमाइंडर भी कराया गया है। इन सब के बीच मदरसा शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।

मदरसा शिक्षक अब्दुल रऊफ, अब्दुल सलाम, शादाबुल हक, असगर हुसैन अंसारी, फैयाज अहमद कहते हैं कि मदरसों में आधुनिक शिक्षा की वकालत करने वाली केंद्र और प्रदेश सरकार के कथनी और करनी में अंतर है। दोनों सरकारें मदरसों में आधुनिकीकरण शिक्षा को बढ़ावा देने का दावा करती है लेकिन मानदेय देने में आनाकानी कर रही हैं। शिक्षकों का कहना है कि अकेले उत्तर प्रदेश ही नहीं, 16 राज्यों के मदरसा शिक्षक परेशान हैं।

शिक्षकों को इस तरह मिलता है मानदेय

6000 रुपये प्रतिमाह केंद्र सरकार स्नातक स्तर पर

12000 रुपये प्रतिमाह परास्नातक एवं बीएड स्तर पर

2000 रुपये प्रतिमाह राज्य सरकार द्वारा स्नातक स्तर पर

3000 रुपये प्रतिमाह परास्नातक एवं बीएड स्तर पर

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