साहित्य - संस्कृति

वियतनामी कहानी संग्रह “ हँसने की चाह में ” युद्ध की त्रासदी की अनुगूँज है

  • 11
    Shares

गोरखपुर. हिन्दी के आलोचक कपिल देव द्वारा अनुदित वियतनामी कहानी संग्रह  “ हँसने की चाह में  ” पर प्रगतिशील लेखक संघ ने 30 सितम्बर को प्रेस क्लब में बातचीत का आयोजन किया.

इस कहानी संग्रह में वियतनाम के सात कहानीकारों की नौ कहानियां संग्रहित हैं. इन कहानियों का वियतनामी से अंग्रेजी में अनुवाद वहां की शिक्षिका वू वान ली द्वारा किया गया है. इन कहानियों का अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद कपिल देव ने अपनी इस पुस्तक में किया है जो उनकी श्रम साध्य सृजन शीलता का परिचय देती है.

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कथाकार प्रो. रामदेव शुक्ल ने कहा कि दुनिया की हर बढ़ी बात संयोग से होती है। वियतनामी कहांनियों में विनाश की कहानी के भीतर से जीवित रहने की इच्छा और उसी को रचने की चाहत दृष्टि गोचर होती है.

प्रो० कृष्ण चन्द्र लाल ने अपने वक्तव्य में अनुवादक की प्रशंसा करते हुए कहा कि कपिल देव ने अनोखा, दायित्वपूर्ण कार्य किया है और अपनी छिपी हुई नई प्रतिभा का परिचय दिया है. सभी कहानियों में युद्ध की विभीषिका की त्रासदी की पृष्ठभूमि की अनुगूँज है किन्तु रचनात्मक कौशल के साथ।

प्रो० अनंत मिश्र ने कहानियों में प्रेम की सघनता पर अपनी बात केन्द्रित किया. वरिष्ठ कवि महेश अश्क ने कहा कि ये कहानियाँ बहुत ही सघन हैं और इसमें कही भी नारे बाजी नहीं  है। वरिष्ठ पत्रकार राघवेन्द्र ने कहा कि अनुवाद आसान काम नहीं है. यह रचना की पुर्नरचना होती है. वरिष्ठ कथाकार मदन मोहन, पत्रकार डा० शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी, जेपी विश्वविद्यालय छपरा के डा०सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी  ने भी अपनी बात रखी. डा०आनन्द पाडेय ने इन कहानियों को युद्ध की विभीषिका से उपजी वहां के महिलावों की आत्म संघर्ष की कहानी बताया.

अपने लम्बे आलेख में वरिष्ठ रंगकर्मी राजाराम चौधरी ने वियतनाम के भगौलिक स्थिति का वार्णन करते हुए प्रत्येक कहानियों पर विस्तार से चर्चा की.विश्वभंर त्रिपाठी ने वू वान ली द्वारा पुस्तक पर लिखी भूमिका का पाठ किया.

अनुवादक कपिल देव ने अपने वक्तव्य में कहा कि इन्टरनेट के जरिये वू वान ली से उनका परिचय हुआ और फिर उनके जरिये वियतनाम के दूसरे लेखकों से उनका संवाद बना. वियतनामी कहानियों के अनुवाद का विचार अनायास बना और उन्होंने इस काम की शुरू हुआ. इसके पहले उन्होंने अनुवाद का कार्य नहीं किया था.

संचालन गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. आनिल राय ने तथा आभार प्रलेस सचिव भरत शर्मा ने किया.
कार्यक्रम के पूर्व ” कल्याणी ” संस्था की ओर से डा० वेद प्रकाश पाण्डेय ने कपिल देव को  सम्मानित भी किया गया.
कार्यक्रम में अमित मिश्रा, उन्मेश शुक्ला, डा. वेद प्रकाश पाण्डेय, धर्मेन्द्र श्रीवास्तव, धर्मेन्द्र त्रिपाठी, अजित सिंह, सैयद आसिम रउफ, कल्लीमुल हक्, आसिफ सईद, वादनी यादव, रंजना जैसवाल, अनिल गौतम, अशोक चौधरी आदि उपस्थित थे।