साहित्य - संस्कृति

वायरस : देखने के लिए एक जरूरी फिल्म

यह फिल्म निपाह वायरस पर आधारित है. इस  फिल्म को हमारे कॉलेज टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस में कुछ दिन पहले दिखाया  गया था. यह फिल्म लगभग दो घंटे तीस मिनट की है. फिल्म मलयालम में है. इस फिल्म का डायरेक्शन आशिक़ अबू ने किया है और फिल्म के बोल सुशि श्याम ने लिखा है. फिल्म को जितना हो सके उतना असली घटना से जोड़ने की कोशिश की गई है.

यह कहानी केरल के एक छोटे से अस्पताल से शुरू होती है. इस अस्पताल में एक मरीज़ आता है.  मरीज़  को सांस लेने में तकलीफ़ हो रही होती है. अस्पताल के चिकित्सक सांस की दिक्कत से जुड़े जो भी इलाज़ हैं, उसे कर रहे हैं लेकिन मरीज़ की दशा सुधर नहीं रही है और उसकी स्थिति दिन ब दिन खराब ही होती जाती है.  इस घटना के कुछ दिन बाद एकदम ऐसी ही बीमारी की ख़बरें  प्रदेश के और जिलों  से भी  आने  लगती है. लेकिन ऐसा हो क्यों रहा है , यह किसी की समझ में आ नहीं रहा था.

यह फिल्म मूलत : दो चीजों के इर्द-गिर्द घूमती है. पहली यह कि यह बीमारी कैसे फैल रही थी और दूसरी कि इसके चपेट में कितने लोग आ चुके हैं. हम सब अपने  देश  की ख़स्ता चिकित्सा प्रणाली से तो पहले ही रूबरू हैं.  क्या हमारे देश की यह  चिकित्सा व्यवस्था  ऐसी विकट स्थिति के लिए तैयार  है ?  इसमें  दूसरी चीज़ जो हमे ध्यान में रखनी चाहिए की केरल हमारे देश के प्रदेशों में सबसे ऊपर आता जब हम चिकित्सा की बात करते हैं. तो हमारे लिए यह फिल्म देखना और भी ज़रूरी हो जाता है की क्या केरल इतनी बड़ी विपदा से निकलने के काबिल है या नहीं. और  अंत में क्या सरकार इतने बड़े ख़तरे को प्रदेशवासियों तक पहुंचने से पहले  रोकने में कामयाब हो गई ? अगर आपको इन सवालों के जवाब चाहिए तो आपको  यह फिल्म देखनी ज़रूर देखनी चाहिए.

About the author

दिव्यल भूषण गुप्ता

लेखक टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, गुवाहाटी के छात्र हैं और कैम्पस पत्रिका ‘ Campus Zephyr ’ से जुड़े हैं

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