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तिल-तिल कर मरती आमी में सांस भरने की ये कैसी कवायद है ?

विश्वविजय सिंह, अध्यक्ष आमी बचाओ मंच

प्रधानमंत्री जी 28 जून को मगहर आने वाले हैं। महान संत कबीर दास के परिनिर्वाणस्थली का दर्शन करेंगे और यहां  विकास की बड़ी-बड़ी योजनाओं का शुभारम्भ करेंगे।

इस बीच दावा हुआ कि प्रधानमंत्री को स्वच्छ, निर्मल आमी का दर्शन भी कराया जाएगा। इस हेतु प्रशासन ने भी कमर कस ली और खजाना खोल दिया है। सुना तो मन प्रसन्न हुआ। लगा कि दस साल से चल रहा संघर्ष अब थमेगा। आमी अपने पुरातन रूप में आएगी, अंचल की खुशहाली लौटेगी। उत्कंठा जगी कि अपनी आमी देखूं। जरा परखूं कि प्रधानमंत्री के आगमन पर आमी की सफाई कैसे हो रही है। देखूं कि साफ होती आमी, सजती- संवरती आमी कैसी लग रही है।

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आमी नदी में अभी भी औद्योगिक और शहरी कचरा और पानी गिराया जा रहा है

मंगलवार को आमी की सफाई देखने पहुंचा मगहर। उसी मगहर, जहां आमी को साक्षी मानकर कबीर ने कुरीतियों, पाखंड के खिलाफ मोर्चा खोला था। वही मगहर, जहां से कबीर ने दुनियाभर को आपसी सद्भाव, भाईचारे का संदेश दिया था। उस मगहर में आज कुछ नया नहीं था। वही मरती हुई, दुर्गन्ध से बेजार आमी सामने थी और दूसरी तरफ थी प्रशासनिक बाजीगरी। आमी को बचाने, सजाने-संवारने की नहीं, प्रधानमंत्री के आँख में धूल झोंकने की। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी ) के आदेश को मुँह चिढ़ाते हुए नगर पंचायत का कचरा आमी में पूर्ववत गिर रहा है।

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आमी नदी से जलकुम्भी निकले जा रहे हैं लेकिन नदी में औद्योगिक कचरे को गिरने से नहीं रोका जा रहा है

आमी को रोकने के नाम पर उसके किनारे तटबंध बनता भी दिखा। जो आमी बूंद बूंद पानी को खुद ही तरस रही है, उसे रोकने को तटबंध!! ये कौन सा नाटक है ? ये कैसी सफाई है ? तिल तिलकर मरती आमी में सांस भरने की ये कैसी कवायद है ? ऐसे तो आमी साफ नहीं हो सकती। निर्मल-अविरल, जीवित नहीं हो सकती। हां , सरकारी धन की लूटकर तिजोरी भरी जा सकती है। प्रधानमंत्री की आँख में धूल झोंकी जा सकती है।

प्रधानमंत्री जी, आंखें खोलिये और यदि कबीर के प्रति, बुद्ध के प्रति, आमी के प्रति जरा भी संवेदना है तो आमी को जिलाने के लिये कोई ठोस कार्ययोजना बनाइये, लागू करिये।

कुशीनगर में महात्मा बुद्ध के अंतिम दिनों की साक्षी ऐतिहासिक हिरण्यवती नदी है। सफाई के नाम पर गत वर्ष प्रशासन द्वारा बिना विशेषज्ञ की सलाह एवं ठोस कार्ययोजना के मनरेगा के तहत खुदाई कराई गई जिसका नतीजा सामने है नदी पानी रहित हो गयी है। ऐसी ही साजिश महात्मा बुद्ध के सन्यास एवं महान संत कबीर के अंतिम दिनों की साक्षी आमी नदी के साथ भी किये जाने की कोशिश हो रही है।

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कुशीनगर में सुखी हिरण्यवती नदी

प्रधान मंत्री जी के प्रस्तावित मगहर यात्रा के शोर के बीच गोरखपुर के जिला पंचायत राज अधिकारी ने आमी के किनारे के प्रधानों को भी मनरेगा के तहत सफाई के नाम पर खुदाई के निर्देश दिए है। मगहर में कुछ जगहों पर इसकी शुरुआत भी हुई है। इस सम्बन्ध में जब पर्यावरण विशेषज्ञ एवं गोरखपुर इंजीनियरिंग विश्व विद्यालय के प्रोफेसर डा. गोविंद पांडेय जी से बात किया तो उन्होंने कहा कि हर नदी का स्वभाविक ढाल होता जो वर्षो और सदियों में नदी स्वयं तैयार करती है। अनियोजित खुदाई से ढाल तो प्रभावित होगा ही प्राकृतिक जलश्रोत के बन्द होने का खतरा भी उत्पन्न होगा।

आमी की अनेक यात्रा के दौरान हमने इसके प्रभाव को देखा भी है। अमोना पांडेय से लेकर रुधौली ( बस्ती) के बीच में की गयी आमी की खुदाई में इसके दुष्प्रभाव को देखा जा सकता है।आमी को यदि वास्तव में प्रदूषण मुक्त करना है तो प्रशासन बाजीगरी छोड़ औद्योगिक एवं नगरीय कचरा आमी में जाने से रोकने का ठोस उपाय करे। शेष नदी स्वयं अपने को ठीक कर लेगी।

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