विचार

कुशीनगर की बंद चीनी मिलों पर चुप्पी क्यों है

बंद पडरौना चीनी मिल

  रामचंद्र सिंह

 

लोकसभा चुनाव में मतदाताओं में चुनाव के प्रति ज्यादा उत्साह नहीं दिख रहा है. इसका मूल कारण किसी को ठीक से पता नही चल पा रहा है. राजनैतिक दलों के चुनावी घोषणा पत्र में किसानों, गरीबों और मजदूरों के लिए बातें तो लिखी गई हैं लेकिन व इसकी चर्चा करने बजाय एक -दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में ज्याद समय ख्रर्च कर रहे हैं. यदि किसी भी वोटर से पूछा जा रहा है की वोट किस पार्टी को देना है तो वह इस पर खुलकर बात करने को तैयार नहीं है ?

पहले जब कोई भी चुनाव होता था तो वोटर गली से लेकर चौराहे तक अपनी-अपनी मनपसंद पार्टी के उम्मीदवार के विषय में बात करते नजर आते थे.

जनपद कुशीनगर में कपास, सेब, अंगूर, अनार काजू और किसमिस जैसे चीजें पैदा नही होती हैं. कुशीनगर जिला गन्ना बाहुल्य क्षेत्र है और यहाँ की नकदी फसल सिर्फ गन्ना ही है. गन्ने की खेती के सहारे किसान अपने घर की हर जरूरत को पूरा करता है.

कुशीनगर जनपद में दस चीनी मिलें है जिसमे से पांच चीनी मिलें (लक्ष्मीगंज, रामकोला खेतान, पडरौना, कठकुइयाँ और छितौनी) सरकारों की गलत नीतियों के वजह से बंद हैं.  पांच चीनी मिलें कप्तानगंज, रामकोला (पंजाब), ढाढा , सेवरही और खड्डा चीनी मिल चल रही है लेकिन ये चीनी मिलें किसानों का गन्ना खिरद नहीं पा रही हैं. सैकड़ों एकड़ गन्ना खेत में खड़ा सूख रहा है.

चीनी मिलों की बंदी, चीनी मीलों द्वारा समय से गन्ना खरीद न करने और बकाया गन्ना मूल्य के कारण जनपद कुशीनगर में किसानों की हालत दयनीय हो गयी है.गन्ना समितियों द्वारा समय से पर्ची नही आने के वजह से किसान अपने गन्ने को औने-पौने दामों में बेचने पर मजबूर हो रहे हैं.

इसका जिम्मेदार कौन है ? क्या इसका जिम्मेदार किसान है ?

हमने लक्ष्मीगंज की चीनी मिल को चलवाने के लिए 61 दिन तक अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया लेकिन सरकार का कोई नुमाइंदा, जन प्रतिनिधि बात तक करने नहीं आया. मैंने अपने संगठन की ओर से शासन-प्रशासन को दर्जनों ज्ञापन दिए लेकिन किसी पर कोई असर नहीं हुआ. किसानों की दुर्दशा से किसी को कोई मतलब नही है.

सभी दलों के चुनाव घोषणा पत्र में यह देखने को नही मिला है कि देश में जितनी चीनी मिलें बन्द पड़ी है, उसका क्या किया जायेगा. 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पडरौना की सभा में पडरौना की बंद चीनी मिल को चलाने का वादा किया था. लेकिन उनका वादा, वादा ही रहा. कुशीनगर के बन्द चीनी मिलों के बारे में हर नेता मौन है.

 (लेखक भारतीय किसान यूनियन भानु के कुशीनगर इकाई के जिलाध्यक्ष हैं )

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