लोकसभा चुनाव 2019

42 दिन में ही राजमति निषाद और अमरेन्द्र निषाद की घर वापसी, भाजपा छोड़ सपा में आए

गोरखपुर। पूर्व विधायक राजमति निषाद और उनके बेटे अमरेन्द्र निषाद की 42 दिन बाद ही घर वापसी हो गई. दोनों आज फिर सपा में शामिल हो गए. दोनों नेताओं ने आज लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की उपस्थिति में सपा में शामिल हो गए.

राजमति निषाद और अमरेन्द्र निषाद आठ मार्च को भाजपा में शामिल हो गए थे. राजमति निषाद दो बार पिपराइच से विधायक रही हैं. वह 2014 का लोकसभा चुनाव सपा के टिकट पर गोरखपुर से लड़ीं थीं.

राजमति निषाद कद्दावर निषाद नेता एवं पूर्व मंत्री जमुना निषाद की पत्नी हैं. जमुना निषाद गोरखपुर सीट पर तीन बार 1998, 1999, 2004 में योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़े थे. तीनों बार वह हारे लेकिन 1998 और 1999 में हार का अंतर मामूली रहा. वह 2012 में बसपा के टिकट पर पिपराइच से विधायक बने और फिर मंत्री. सड़क दुर्घटना में उनकी आकस्मिक मौत हो गई.

आठ मार्च की अमरेन्द्र निषाद और उनकी माँ राजमति निषाद भाजपा में शामिल हो गए थे. यह तस्वीर उस समय की है

जमुना निषाद की मौत के बाद राजमति निषाद दो बार पिपराइच से चुना लड़ीं और जीतीं. उनके बेटे अमरेन्द्र निषाद वर्ष 2017 का विधानसभा चुनाव पिपराइच से लड़े लेकिन भाजपा प्रत्याशी से हार गए.

अमरेन्द्र निषाद गोरखपुर से सपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा रखते थे लेकिन निषाद पार्टी तब तक सपा के साथ थी और उनके लिए कोई अवसर नहीं मिल रहा था. इस कारण वह अपनी माँ के साथ भाजपा में चले गए. अमरेन्द्र निषाद ने अपने नजदीकी लोगों से कहा कि उन्हें टिकट देने का आश्वासन देकर भाजपा में लाया गया लेकिन भाजपा ने यहां से फिल्म अभिनेता रवि किशन को टिकट दे दिया. रवि किशन के नाम की घोषणा के चार दिन बाद ही आज उन्होंने लखनउ जाकर सपा में वापसी कर ली.

अमरेन्द्र निषाद और राजमति निषाद के सपा में वापसी के बाद भाजपा को निषाद वोट प्राप्त करने की उम्मीद पर करारा झटका लगा है. सपा ने यहां पर पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद को प्रत्याशी बनाया है जो निषादों के एक और बड़े नेता हैं. अब भाजपा को निषाद पार्टी पर भरोसा है लेकिन निषाद पार्टी के अध्यक्ष डा. संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद भाजपा में शामिल होकर संतकबीरनगर से चुनाव लड़ रहे हैं. वहां उन्हें कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में निषाद पार्टी भाजपा को गोरखपुर में कितना फायदा पहुंचा पाएगी, यह देखने वाली बात होगी.

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