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आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह
आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह

आमी नदी को प्रदूषण मुक्त किए बिना संत कबीर के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना बेमानी : विश्वविजय सिंह

संत कबीर नगर, 12 जून. आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह ने कहा कि आमी नदी को प्रदूषण मुक्त किए बिना संत कबीर के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना बेमानी होगी। मगहर में किये जा रहे विकास कार्य का तब तक मतलब नहीं होगा जब तक आमी का जल निर्मल नहीं हो जाता. यदि आमी प्रदूषित रहेगी और नदी से से दुर्गंध उठेगा तो यहां पर्यटक आने से रहे।

श्री सिंह ने यह बातें रविवार को संतकबीरनगर में पत्रकारों से बातचीत में कही. श्री सिंह ने आमी की खुदाई करने की योजना को गलत बताया। उन्होंने कहा की इस तरह की खुदाई से नदी सूख जाएगी. उन्होंने आमी को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए आमी तटवासियों के साथ आंदोलन करने की भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि भौतिक विकास के नाम पर फैलाए जा रहे प्रदूषण ने गांव की गंगा (आमी) को ही मार डाला है। ऐसे में आमी को प्रदूषण मुक्त किए बिना कबीर के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना बेमानी होगी।

मगहर में कबीर आश्रम के पास आमी नदी (फाइल फोटो)

मगहर में कबीर आश्रम के पास आमी नदी (फाइल फोटो)

उन्होंने कहा कि आज कबीर की प्रासंगिकता पूरे विश्व में है, लेकिन जिस आमी में कबीर के विचार प्रवाहित होते हैं, उसके स्वच्छता और संरक्षण पर किसी का कोई ध्यान नहीं है। उन्होंने कहा कि आमी बचाओ मंच के अनवरत संघर्ष में वर्तमान में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भूमिका अहम रही है। उन्होंने इस मंच के संरक्षक के रूप में भी कार्य किया। अब प्रदेश के मुखिया की कमान उन्हें मिली है तो वह कबीर के प्रति आस्था व्यक्त करने पहुंचे जरूर लेकिन आमी के अविरल धारा को सुरक्षित करने और उसके संरक्षण के बारे में कोई ध्यान नहीं दिया।

विश्वविजय सिंह ने कहा कि इतने लम्बे संघर्ष और एनजीटी की रोक के बावजूद मगहर, खलीलाबाद का नगरीय कचरा बस्ती संतकबीरनगर, गोरखपुर स्थित गीडा का औद्योगिक कचरा आमी में प्रवाहित हो रहा है। मगहर और खलीलाबाद में एसटीपी की स्थापना के कोई प्रयास नहीं किये गये। गीडा में स्वीकृत 35 एमएलडी के सीईटीपी की स्थापना भी केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा धन न दिये जाने के कारण नहीं हो पा रही है।

आमी के प्रदूषण मुक्ति अभियान के प्रति सरकार की उदासीनता का यह भी प्रमाण है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का स्थानीय कार्यालय और स्थानीय प्रशासन शासन व सरकार को लगातार झूठी रिपोर्ट भेज कर गुमराह कर रहा है। जनप्रतिनिधियों की चुप्पी की उन्होंने निन्दा भी और जल्द ही एक वृहद आंदोलन की शुरुआत करने की चेतावनी दी।

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