स्वास्थ्य

विश्व मलेरिया दिवस आज, मलेरिया से बचाव को सतर्कता जरुरी

देवरिया. मौसम में आए बदलाव के चलते ज्यादातर लोग वायरल और बुखार से पीडि़त होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। जांच में बुखार का कारण मलेरिया भी निकल रहा है और मरीज कोमा में चला जा रहा है। ऐसे में थोड़ी सी भी लापरवाही जान पर भारी पड़ सकती है। जिला अस्पताल के इमरजेंसी और ओपीडी में रोजाना ऐसे मरीज आ रहे हैं।

सीएमओ डॉ धीरेन्द्र कुमार का कहना है कि ओपीडी एवं इमरजेंसी में मरीज बुखार के साथ आ रहे हैं। पहले मलेरिया की सामान्य दवाओं से ठीक हो जाता था लेकिन अब रक्त जांच में मलेरिया पी-वाइवैक्स निकल रहा है। इनपर क्लोरोक्वीन काम नहीं करती है। इसके कारण मरीज की लो बीपी (ब्लड प्रेशर), पीलिया व किडनी में खराबी भी हो रही है। समय से सही इलाज न मिलने पर मरीज कोमा में चले जाते हैं। उनके इलाज में सतर्कता जरूरी है।

उन्होंने कहा कि पीड़ितों के लक्षणों में भी बदलाव आया है। ठंड देकर आए बुखार के बाद मरीज कोमा में चला जा रहा है। उसकी किडनी तक पर असर पड़ रहा है। वाइवैक्स परजीवी से संक्रमित मरीजों को तेज बुखार आने पर दवाएं असर नहीं कर रही हैं। सीएमओ कहते हैं कि दवाओं का कांबिनेशन बदलने पर सुधार होता है। इसमें मरीज को 7 से 10 दिन लग जाते हैं।

ऐसे करें मच्छरों से बचाव
इससे बचाव के बारे में सीएमओ ने बताते हुए कहा कि मच्छर-दानी लगाकर सोऐं और उसमे कोई छेद न हो और वह कहीं से फटी न हो। वह अच्छी तरह लगी हो, ताकि मच्छर अंदर न आएं। घर के अंदर मच्छर मारनेवाली दवा छिड़कें। घर के दरवाज़ों और खिड़कियों पर जाली लगाएं और एसी और पंखों का इस्तेमाल करें, ताकि मच्छर एक जगह पर न बैठें। हल्के रंग के कपड़े पहनिए जिनसे आपका शरीर पूरी तरह ढका हो।
ऐसी जगह पर मत जाइए, जहां झाड़ियां हों क्योंकि वहां बहुत मच्छर होते हैं, या जहां पानी इकट्ठा हो क्योंकि वहां मच्छर पनपने का खतरा होता है। अगर आपको मलेरिया हो गया है, तो फौरन इलाज कराएं।

दो तरह के होते मलेरिया परजीवी

जिला मलेरिया अधिकारी शिव प्रसाद तिवारी ने बताया कि मलेरिया परजीवी वाइवैक्स एवं पैल्सीफेरम प्रमुख हैं। वाइवैक्स मलेरिया के केस अधिक आ रहे हैं जबकि चार-पांच साल पहले पी फैल्सीफेरम मलेरिया के केस अधिक आते थे। यह काफी घातक होता है, जिसे खूनी मलेरिया भी कहते हैं। मलेरिया के मच्छरों में विकसित हो रही प्रतिरोधक क्षमता मादा एनोफिलीज (मच्छर) से मलेरिया फैलता है। इसका मच्छर ठहरे पानी में पनपता है, 30-35 दिन जीवित रहता है। मच्छर किसी व्यक्ति का खून चूसता है तो उसमें मलेरिया पैरासाइड आ जाते हैं। बारिश में मच्छरों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है।

जिला महामारी वैज्ञानिक डॉ. देव सिंह का कहना है कि मच्छरों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो रही है। इससे इन पर लिक्विड और क्वाइल बेअसर हो रहे हैं। मच्छर से बचने के लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।

विश्व मलेरिया दिवस आज, होंगे जागरूकता कार्यक्रम

सहायक मलेरिया अधिकारी सुधाकर मणि ने बताया कि विश्व मलेरिया दिवस पर गुरुवार को सभी ब्लाकों के सीएचसी व पीएचसी पर मलेरिया जागरूकता गोष्ठी का आयोजन किया जायेगा। जिसमे ग्रामीणों को मलेरिया कैसे होता है, इससे बचाव कैसे करेंगे इसके प्रति जागरूक किया जायेगा।

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