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एग्रो एवं आईटी इंडस्ट्री आधारित हो यूपी की औद्योगिक नीति -यूपीडीएफ़

यूपी के प्रवासियों को शामिल किया जाए नई औद्योगिक नीति में

यूपी के प्रवासी तैयार हैं हजारों करोड़ का निवेश लेकर

लखनऊ, 5  जुलाई. प्रेस क्लब में यूपी के प्रवासियों की मुंबई स्थित संस्था उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट फोरम (यूपीडीएफ़) ने 4 जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि मुंबई में यूपी के प्रवासी हजारों करोड़ रुपये का निवेश करने के लिए तैयार हैं. यदि सरकार ने अनुकूल माहौल बनाया, तो प्रवासी हजारों करोड़ रुपये का निवेश प्रदेश में कर सकते हैं. यूपीडीएफ़ ने यह भी कहा कि औद्योगिक नीति अभी भी एक जनरल पॉलिसी है इसे विशेषकर एग्रो एवं आईटी इंडस्ट्री आधारित होना चाहिए.

यूपीडीएफ़ यूपी के प्रवासियों की एक संस्था है जिसकी स्थापना मुंबई में यूपी के विकास के बारे में सोचने वाले लोगों ने बनाई है. इस संस्था में देश के जाने-माने पत्रकार, पेशेवर एवं उद्योगपति शामिल हैं.
प्रेस कांफ्रेंस में यूपीडीएफ़ के सदस्यों ने कहा कि यूपी के औद्योगिक विकास के लिए यूपीडीएफ़ संस्था ने समय समय पर सरकार के साथ संवाद बातचीत एवं सेमिनार किया है. यूपी से बाहर गए लोगों का यही दर्द है किं उन्हे निवेश का वैसा माहौल नहीं मिल रहा है जैसा की अन्य प्रदेशों मे हैं जिसके कारण जो निवेश यूपी में होना चाहिए वह दूसरे प्रदेशों में हो रहा है.
यूपीडीएफ़ संस्था की एक मांग थी कि वह समय समय पर सरकार को सुझाव भेजती रहती है, सरकार इन सुझावों को स्वीकार भी करती है , उनमें से कुछ सुझावों को अपने पॉलिसी मे शामिल भी करती है लेकिन इन नीतियों को बनाते वक़्त संस्था या संस्था के सदस्यों को अपने टीम में शामिल नहीं करती है.
सरकार को पश्चिम में कानपुर को ध्यान में रखकर औद्योगिक नीति बनानी चाहिए और पूरब में अयोध्या को ध्यान मे रखकर योजना बनानी चाहिए. जब गुजरात में भुज और कांडला के बीच 2 बड़े एयरपोर्ट हो सकते हैं जो की 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं तो लखनऊ और कानपुर के बीच 2 बड़े एयरपोर्ट क्यूँ नहीं हो सकते.

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संस्था के महासचिव पंकज जायसवाल ने कहा कि कानपुर में एक बड़ा पैसेंजर एयरपोर्ट बना कर उसकी पुरानी औद्योगिक गरिमा स्थापित की जाए. पूर्वाञ्चल मे एग्रो आधारित औद्योगिक विकास के लिए अयोध्या को एक्सपोर्ट गेटवे बनाते हुए अयोध्या में कार्गो एयरपोर्ट बनाया जाय. इस कार्गो एयरपोर्ट से जोड़ते हुए 5 मेगा फूड पार्क पूर्वाञ्चल मे स्थापित किए जाएँ. प्रत्येक जिले में छोटे छोटे क्लस्टर बना के मिनी फूड पार्क को स्थापित किए जाएँ. हर जिले में कोल्ड स्टोरेज बनाए जाएँ और इनको पोर्ट से जोड़ते हुए इनकी चेन बनाई जाए. किसानों के दरवाजे से हरी फसल के संग्रह के लिए मोबाइल कूलिंग वैन का प्रयोग कर इन्हे कोल्ड स्टोरेज से जोड़ा जाए और इन सभी को मिला के इन्हे देश के कांडला पोर्ट , जेएनपीटी पोर्ट एवं कोलकाता पोर्ट से जोड़ा जाए. जो ईस्टर्न कॉरीडोर बनाए जा रहें है उसका मार्ग कानपुर लखनऊ फ़ैज़ाबाद गोरखपुर आजमगढ़ बनारस इलाहाबाद होते हुए गुजरना चाहिए ताकि इन क्षेत्रों का समावेशी विकास हो सके, और आसपास कई सहायक उद्योग विकसित हो सकें।

संस्था के संस्थापक सदस्य अरविंद राही एवं शैलेंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि हम प्रयास करते रहे हैं और करते रहेंगे, भले ही सरकार इसे स्वीकार करे या न करे.  हम इसके एक प्रोटोटाइप मोडेल पर काम कर रहें हैं जिसके तहत 50 एकड़ लैंड पर कृषि कर उसे विश्व बाजार से कनेक्ट कर प्रदेश में युवाओं को एक माँडल का प्रदर्शन करना चाहते हैं ताकि युवा अपने आप उद्योग का विकास करें।

वार्ता में यूपीडीएफ़ की तरफ से एस एन यादव एवं अनिल पाण्डेय द्वारा सब्जियों की ऑनलाइन बिक्री का मोडडल कैसे शुरू की जाए , पर चर्चा की. वार्ता में विशेष रूप से लखनऊ के उद्योगपति संदीप सक्सेना, अंजनी कुमार दास, रितेश गुप्ता, गिरिजेश सिंह एवं संदीप गुप्ता भी उपस्थित थे।

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