Friday, January 27, 2023
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दुर्गा आयल मिल से हटेगा पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी का 23 वर्ष का अवैध कब्जा

वर्ष 1993 में आवंटित करा अपना कार्यालय बना लिया था अमरमणि ने
हाईकोर्ट ने आवंटन को खारिज कर कब्जा हटाने का दिया है आदेश
महराजगंज, 22 मई। कवयित्री मधुमिता की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी का नौतनवां स्थित दुर्गा आयल मिल पर 23 वर्ष से ’ अवैध कब्जा ’ कल हट जाएगा। हाईकोर्ट के सख्त रूख के बाद प्रशासन कल सुबह 11 बजे अमरमणि त्रिपाठी का कब्जा हटाकर भवन के मालिक द्वारा अधिकृत अब्दुर्रहमान उर्फ साजिद को सौंपने की कार्यवाही करेगा।
हालांकि पूर्व में दो बार भी इस तरह की कार्यवाही हो चुकी है लेकिन भवन का कब्जा अब्दुर्रहमान को नहीं सौंपा जा सका था लेकिन इस बार हाईकोर्ट द्वारा डीएम और एसपी को पूर्व मंत्री का कब्जा हटाने और अब्दुर्रहमान को कब्जा दिलाकर कोर्ट में हलफनामा दाखिल करने के स्पष्ट आदेश के कारण प्रशासन अपनी ओर से कोई कोताही नहीं करना चाहता है।
नौतनवां कस्बे के मुख्य मार्ग पर दुर्गा मिल आयल मिल स्थित है जहां पर सरसो तेल का उत्पादन होता था। यह मिल मशहूर व्यवसायी दुर्गा प्रसाद कमालिया की है जो वर्ष 1939 में स्थापित हुई थी। दुर्गा प्रसाद कमालिया के परिवार का नेपाल, बिहार, झारखंड में व्यवसाय है। यह मिल करीब 90 डिस्मिल एरिया में है और इसमें मंदिर भी बना हुआ है। आयल मिल 1988 तक चलती रही। मिल बंद होने के बाद मिल के कर्मचारी और कमालिया परिवार के लोग इसमें रहते थे। पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की नजर इस भवन पर थी और उन्होंने अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए 23 जून 1993 में रेट कन्ट्रोल एक्ट के तहत आवंटित करा लिया। आवंटन के तुरंत बाद उन्होंने इस पर कब्जा कर लिया और अपना जनसम्पर्क कार्यालय बना लिया। कमालिया परिवार ने अमरमणि त्रिपाठी को भवन आंवटित करने के विरूद्ध कानूनी लड़ाई शुरू की।
उनके अधिवक्ता अतुल प्रताप श्रीवास्तव ने गोरखपुर न्यूज लाइन को बताया कि उन्होंने रेट कन्ट्रोल एक्ट के तहत इस भवन के आवंटन को गैरकानूनी बताते हुए जिला जज के अदालत मंे चुनौती। हमने यह दलील रखी कि आवंटन करते समय भवन मालिक की रजामंदी नहीं ली गई जो कि जरूरी होती है। साथ ही यह भवन कारखाना था जिसे किसी को आवास के लिए आवंटित नहीं किया जा सकता। 20 वर्ष की कानूनी लड़ाई के बाद 10 सितम्बर 2013 को जिला जज की अदालत ने अमरमणि त्रिपाठी का आवंटन रद कर दिया। इसके खिलाफ पूर्व मंत्री हाईकोर्ट गए लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने रेट कन्ट्रोल अधिकारी और अमरमणि त्रिपाठी पर 50 हजार रूपए का हर्जाना भी लगाया। बाद में पूर्व मंत्री के प्रभाव में महराजगंज के रेट कन्ट्रोल अधिकारी ने सरकार की तरफ से आवंटन खारिज करने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की लेकिन हाईकोर्ट के सख्त रूख देख अपील वापस ले ली। पूर्व मंत्री हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट भी गए लेकिन वहां अपनी स्थिति कमजोर देख अपील वापस ले ली।

दुर्गा आयल मिल पर कब्जे से लेकर अब तक 13 वर्ष में पूर्व मंत्री के लिए भी दुनिया काफी बदल गई। अमरमणि चार बार लक्ष्मीपुर से विधायक रह चुके हैं। इस दौरान वह मंत्री भी बने लेकिन वर्ष 2003 से उनका बुरा दौर शुरू हुआ। यह दबंग नेता वर्ष 2003 में कवयित्री मधुमिता की हत्या में आरोपित हुआ और अब इस मामले में पत्नी के साथ आजीवन कारवास की सजा भुगत रहे हैं। उनके बेटे अमन मणि भी अपनी पत्नी की संदिग्ध स्थितियों में मौत के मामले में जेल गए। अमरमणि की सियासी ताकत भी घटी है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में उनके बेटे अमनमणि चुनाव हार गए।
जेल में बंद होने और बेटे के चुनाव हारने के बावजूद पूर्व मंत्री के रसूख में कोई कमी नहीं आई है। वह सपा की सरकार बनने के बाद कथित रूप से बीमार होने के कारण पत्नी के साथ बीआरडी मेडिकल कालेज में भर्ती रहे। अभी हाल में हाईकोर्ट के सख्त रूख के कारण उनके सहित कई बंदियों को अस्पताल से वापस जेल पहुंचाया गया है।
AMARMANI  SP

उधर कानूनी लड़ाई लड़ते हुए दुर्गा प्रसाद कमालिया की मौत हो गई तो उनके बेटे ओम प्रकाश व पौत्र मनोज की हत्या हो गई। इसके बावजूद कमालिया परिवार ने कानूनी लड़ाई जारी रखी और दुर्गा आयल मिल का मालिकाना हक लेने के लिए अब्दुर्रहमान को पावर आफ अर्टानी दे दी। अब्दुर्रहमान भवन पर कब्जे के लिए महराजगंज से लेकर हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी जब प्रशासन ने पूर्व मंत्री का कब्जा नहीं हटाया और तो अब्दुर्रहमान द्वारा हाईकोर्ट में इस वर्ष अवमानना वाद 1454 / 2016 दाखिल किया गया। इस पर हाईकोर्ट ने डीएम महराजगंज को आदेश किया कि 23 मई को 11 बजे तक अब्दुर्रहमान को भवन पर कब्जा दिला दिया जाए और डीएम व एसपी व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में उपस्थित होकर कब्जा दिला देने का हलफनामा दाखिल करें।
इस आदेश के बाद प्रशासन कल पूर्व मंत्री का कब्जा हटाकर अब्दुर्रहमान को कब्जा दिलाने की तैयारी कर रहा है।
यहां यह जानकारी देना जरूरी है कि हाईकोर्ट द्वारा पूर्व मंत्री के आवंटन को खारिज करने और अब्दुर्रहमान को कब्जा दिलाने के आदेश के बाद अब्दुर्रहमान पर कई मामलों में मुकदमे दर्ज हो गए। इसमें एक मामला एक किशोरी द्वारा यौन शोषण के आरोप का भी है। 50 वर्षीय अब्दुर्रहमान का कहना है कि पूर्व मंत्री ने साजिश कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है ताकि वह भवन पर कब्जे के लिए मौके पर आ न सके। उनके अनुसार पूर्व में दो बार वह इसी कारण मौके पर नहीं पहुंच सके क्योंकि पुलिस उन्हें पकड़ने के लिए छापे डालने लगी थी। उनका कहना है कि वह कल जरूर उपस्थित होंगे और भवन पर कब्जा लेंगे।

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