Monday, February 6, 2023
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नौजवान तलाक का बेजा इस्तेमाल न करें : अल्लामा मौलाना मसऊद अहमद

-यूरोप की सारी तरक्की मुसलमानों की देन हैं

-इल्म के साथ अख्लाक व किरदार भी संवारे

गोरखपुर।आजकल मुस्लिम औरतों के मसायल के मुताल्लिक हिन्दुस्तान में बड़ा हंगामा हैं। औरतों को मिसगाइड किया जा रहा हैं। औरतों को समझाया जाता हैं कि इस्लाम औरतों को दबा कर रखता हैं जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं हैं। आप अगर इस्लाम के कवानीन पर गौर करें तो महसूस होगा कि दुनिया में इस्लाम वह वाहिद मजहब हैं जिसने औरतों को घर की मलिका बना दिया।

यह बातें अलजामियतुल अशरफिया अरबी यूनिवर्सिटी मुबारकपुर के मौलाना मसऊद अहमद बरकाती ने गोरखपुर के मियां साहब इस्लामियां इंटर कॉलेज बक्शीपुरर में जलसा सीरतुन्नबी के दौरान कहीं।

उन्होंने कहा कि तलाक एक जरुरत हैं। जिन मजहबों में तलाक की कोई सूरत नहीं उनकी औरतें आत्महत्या करने पर मजबूर होती हैं। तलाक का हुक्म मजबूरियों के लिए हैं। तलाक नापसंदीदा होने के बाद भी एक जरुरत है। उन्होने नौजवानों से अर्ज किया कि वह तलाक का बेजा इस्तेमाल न करें। तलाक का बेजा इस्तेमाल करने की वजह से इस मसले पर हुकूमत की दखलअंदाजी हुई। तलाक एक देनी जरुरी है तो तीन क्यों देते हैं। शरीयत व कुरआन मना करता है। इससे बचिए।

उन्होंने कहा कि कुरआन की पहली आयत इल्म हासिल करने से ताल्लुक रखती हैं। इल्म की अहमियत की वजह से हमें कयादत मिली। यूरोप, एशिया, अफ्रीका को हमनें कई दशकों तक रोशन किया। मुस्लिम साइंस दां ने कुरआन व हदीस में गैरो फिक्र करके नई खोtsa की। यूरोप की सारी तरक्कियां मुसलमानों की देन हैं। हमें कयादत इसलिए मिली की हमनें इल्म के साथ अखलाक, इंसानियत को साथ रखा।आज यूरोप सहित तमाम देशों के पास इल्म तो हैं इंसानियत,अख्लाक खत्म हो गया। जिसका खामियाजा हिरोशीमा नागासाकी, अफगानिस्तान, इराक आदि में नजर आता हैं। साइंस की बुनियाद कुरआन हैं।मुसलमान तो वह है जो साइंस को मुसलमान बना दें।   पैगम्बर ने सहाबा को सिर्फ इल्म ही नहीं बल्कि अख्लाक, किरदार, इंसानियत की भी तालीम दी। आप इल्म जरुर हासिल करें साथ ही अख्लाक, किरदार और इंसानियत की तालिम हासिल करें। वक्त की कद्र करें। उस्ताद का अदब करें। कुरआन पढ़े और उसमें गौर फिक्र करें। अगर इल्म के साथ उक्त सारी चीजें आ गयी तो कयादत फिर से हमारी होगी।

खिताब के बाद किरात, तकरीर , नात सहित अन्य मुकाबले में सफल प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।

इस मौके पर राशिद कमाल समानी, जफर अहमद खां, रिजवानुल हक, मुख्तार अहमद, सफीक, मौलाना शौकत नूरी, मुफ्ती अख्तर हुसैन, मौलाना रियाजुद्दीन, कारी सरफुद्दीन, मौलाना जहांगीर, नवेद आलम, मोहसिन खान, मोहम्मद आरिफ अंसारी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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