जनपद

पर्यावरण पर बढ़ते कुप्रभाव को रोकने में जैविक खेती वरदान

जैविक खेती पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

गोरखपुर , 12 सितंबर। लघु लद्यु सीमान्त कृषक मोर्चा, उत्तर प्रदेश एवं फोकस आॅन द ग्लोबल साउथ के संयुक्त तत्वाधान में जैविक खेती पर दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन कैम्पियरगंज में किया गया। इस प्रशिक्षण में गोरखपुर मण्डल के 40 प्रगतिशील किसानों के प्रतिभाग किया।

लद्यु सीमान्त कृषक मोर्चा, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डा0 वीरेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि भारत में कृषि की घटती जोत, संसाधनों की कमी, लगातार कम होती कार्यकुशलता और कृषि की बढ़ती लागत तथा साथ ही उर्वरक व कीटनाशकों का पर्यावरण पर बढ़ते कुप्रभाव को रोकने में निःसन्देह जैविक खेती एक वरदान साबित हो रही है। जैविक खेती का सीधा सम्बन्ध जैविक खाद से हैं या यहाँ कहें कि ये दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

फोकस आॅन द ग्लोबल साउथ समन्वयक अशरफ जाफरी ने कहा कि आज जबकि दूसरी हरित क्रान्ति की चर्चा जोरों पर हैं, वहीं हमें कृषि उत्पादन में मंदी के कारणों पर भी ध्यान केन्द्रित करना होगा और कृषि उत्पादन बढ़ाने हेतु जल प्रबन्धन, मिट्टी की गुणवत्ता बनाये रखने और फसलों को बीमारी से बचाने पर जोर देना होगा। यह कहना गलत न होगा कि जैविक खेती से तीनों समस्याओं का प्रभावी ढंग से समाधान किया जा सकता है। इसलिए रसायनिक उर्वरकों के उपयोग को हतोत्साहित करते हुए जैविक खेती को प्रोत्साहन देना आज के समय की मांग है।
लद्यु सीमान्त कृषक मोर्चा, उत्तर प्रदेश के महामंत्री श्री विजय कुमार पाण्डेय के कहा कि हमारे परम्परागत बीज लुप्त हो गये तथा संकर बीजों पर निर्भरता बढ़ गई। उपज तो अच्छी प्राप्त हुयी लेकिन रसायनों का दुष्प्रभाव मनुष्यों और जानवरों पर जब देखा गया तो विभिन्न प्रकार के रसायनों के अत्यधिक इस्तेमाल से आन्त्रशोध, एलर्जी, हेपेटाईटिस, हृदय रोग एवं कैंसर होने की संभावना बढ़ी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्वे के अनुसार 20000-25000 व्यक्ति प्रतिवर्ष इन रसायनों के प्रभाव से अकाल मृत्यु को प्राप्त करते है।

 

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