Wednesday, February 1, 2023
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प्रेमचन्द पार्क में ‘ अभी वही है निजामे कोहना ’ तो रैम्पस में ‘ सौत ’ का मंचन

गोरखपुर, 12 दिसम्बर। गोरखपुर की दो नाट्य संस्थाओं ने रविवार को दो नाटकों का मंचन किया। अलख कला समूह ने प्रेमचन्द पार्क में ‘अभी वही है निजामे कोहना ‘का मंचन किया तो इप्टा की गोरखपुर इकाई ने रैम्पस स्कूल के थियेटर हाल में प्रेमचन्द की कहानी ‘ सौत ‘ का नाट्य मंचन प्रस्तुत किया।

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नाटक अभी ‘ वही है निजामे कोहना ‘ के निर्देशक राजराम चौधरी

प्रेमचन्द पार्क में रविवार को दोपहर दो बजे अलख कला समूह ने राजाराम चैधरी द्वारा लिखित व निर्देशित नाटक ‘ अभी वही है निजामे कोहना ’ का मंचन किया। इस नाटक में चुटीले संवाद वर्तमान राज व्यवस्था पर करारा चोट करते हैं। नाटक में दिखाया गया है कि कैसे सत्ता परिवर्तन के बाद भी व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं हो रहा बल्कि व्यवस्था किसान, मजदूर, नौजवान, महिलाओं के लिए और क्रूर होती जा रही है।

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नाटक ‘ अभी वही है निजामे कोहना ‘ को देखते दर्शक

नाटक में अधिकतर पात्रों की भूमिका किशोर वय के कलाकारों ने निभायी। सुमिरनजीत मौर्य और बैजनाथ मिश्र ने भारत, आशुतोष पाल ने इंडिया, उत्सव पाल ने जापान, अंमित कुमार गौड़ ने अलाने, रौशन पांडेय ने फलाने, आदर्श पांडये ने शायर की भूमिका निभायी। रितु श्रीवास्तव और जंजीर सिंह ने नाट्य प्रस्तुति में सहयोग दिया।

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नाटक ‘ सौत ‘ का दृश्य

रात छह बजे इप्टा की गोरखपुर इकाई ने इंडियन थियेटर एसोसिएशन के तत्वावधान में ‘ गोरखपुर में प्रेमचन्द: शताब्दी स्मरण ’ श्रृंखला के तहत रैम्पस स्कूल में प्रेमचन्द की कहानी ‘ सौत ’ का नाट्य मंचन किया। यहां पर हर महीने कम से कम एक नाटक के मंचन की परम्परा शुरू की गई है।

नाटक ' सौत ' का दृश्य
नाटक ‘ सौत ‘ का दृश्य

नाट्य प्रस्तुति के पहले प्रेमचन्द साहित्य संस्थान के सचिव मनोज कुमार सिंह ने गोरखपुर में प्रेमचन्द से जुड़ाव के बारे में दर्शकों को जानकारी दी और कहा कि संस्थान द्वारा 19 अगस्त से अगले वर्ष 31 जुलाई तक चलने वाले शताब्दी वर्ष समारोह मनाया जा रहा है जिसमें अनके कार्यक्रम हो रहे हैं।
नाटक ‘ सौत ’ का मंचन डा. मुमताज खान ने किया था।यह नाटक रजिया नाम की स्त्री के स्वाभिमान, संघर्ष और त्याग की कहानी है। नाटक में रजिया की भूमिका रीना श्रीवास्तव, दसिया की भूमिका सोनी निगम और रामू महतो की भूमिका एस रफत हुसैन ने अभिनीत की। अन्य भूमिकाओं में धर्मेन्द्र दूबे, विनोद चन्द्रेश, आसिफ सईद, संजय सत्यम, तनवीर आजाद, मृत्युंजय शंकर सिन्हा आदि ने अभिनय किया। परिधान एवं मंच परिकल्पना सीमा मुमताज और रूप सज्जा राम बहाल का था। नाट्य प्रस्तुति के बाद रैम्पस के प्रबंधक प्रेमचन्द श्रीवास्तव ने निर्देशक डा. मुमताज खान को स्मृति चिन्ह प्रदान किया।

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