Monday, January 30, 2023
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मदरसों से उपाधि प्राप्त करने वालों को भी वही अवसर दिए जाएं जो एक शास्त्री और आचार्य को प्राप्त हैं: राष्ट्रीय मदरसा संघ नेपाल

नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. बाबूराम भट्टराई से मिल राष्ट्रीय मदरसा संघ नेपाल का ज्ञापन

सग़ीर ए खाकसार,

 बढ़नी ( सिद्धार्थनगर), 8 दिसम्बर।  राष्ट्रीय मदरसा संघ नेपाल के एक प्रतिनिधि मंडल ने  पूर्व प्रधानमंत्री और नए संविधान समिति के अध्यक्ष डॉ. बाबूराम भट्टराई, पूर्व महिला एवं बाल कल्याण और सामाजिक कल्याण मंत्री दान बहादुर चौधरी, और संयुक्त राष्ट्र में एक लम्बे समय तक देश के लिए अपनी सेवा दे चुके और हाल राजनीति में सक्रिय डॉक्टर सुरेंद्र चौधरी से एक कार्यक्रम के दौरान उन से भेंट की। इस मौके पर संघ ने  डॉ. बाबु राम भट्टाराई को मुसलमानों के अधिकार और उनकी मांगों पर आधारित एक ज्ञापन सौंपा।

पूर्व प्रधानमंत्री से अपनी बातचीत में संगठन के अध्यक्ष डॉ. अब्दुल ग़नी अल्क़ूफ़ी ने मुस्लिम अल्पसंख्यक के हवाले से नए  संविधान में दिए गए अधिकारों और मुस्लिम आयोग के गठन के संबंध में पूर्व प्रधान मंत्री को धन्यवाद दिया।  साथ ही कहा कि सिर्फ इतना काफी नहीं है बल्कि मुस्लिम आबादी के आधार पर सभी क्षेत्रों में उनका प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए और देश के  निर्माण एवं तरक्की के लिए सभी सरकारी नौकरियों से मदरसों और उनसे संबंधित लोगों को उसी तरह लाभान्वित होने का अवसर प्रदान किया जाए जैसे एक शास्त्री और आचार्य को प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि अगर मदरसों की उपाधि प्राप्त करने वालों को अवसर दिया जाए और विशेष रूप से खाड़ी देशों में कूटनीतिक मामलों के लिए उनकी सेवाएँ ली जाएं जो वास्तव में उनसे बेहतर कोई और अंजाम नहीं दे सकता। इस से देश और राष्ट्र गरिमा को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

कार्यक्रम में डॉ. बाबूराम भट्टाराई के भाषण के बाद संगठन के महासचिव मौलाना मशहूद खान नेपाली ने भी अपनी बात कही।उन्होंने श्री डॉक्टर भट्टाराई की निडर और बेबाक शैली की ओर इशारा करते हुए उस घटना का उल्लेख किया जब उन्होंने अपनी  यूरोप की एक यात्रा में एक प्रश्न के उत्तर में कहा था कि अगर आज मतदान हो जाए तो मैं फिलिस्तीन के पक्ष में और इस्राएल के खिलाफ वोट दूंगा। उनके इस वाक्य ने नेपाल ही क्या पूरे इस्लामी देशों बल्कि सभी न्यायपूर्ण और सामान्य लोगों के दिलों को जीत लिया था, उन्होंने कहा कि हम उनसे इसी बेबाकी और साहस का प्रदर्शन खुद अपने देश में मुस्लिम अल्पसंख्यक के अधिकार की प्राप्ति के संदर्भ से रखते हैं।

राष्ट्रीय मदरसा संघ के इस प्रतिनिधिमंडल में मौलाना ज़हीर अहमद बरेलवी, अब्दुल रहीम शाह, मोहम्मद आरिफ और अकील अहमद इसहाक आदि शरीक थे।⁠⁠⁠⁠

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