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कुशीनगर 17 फरवरी। पडोसी देश नेपाल में सभी धर्मो के आस्था के केन्द्र मदारिया बाबा मजार पर मंगलवार को चादरपोशी के साथ एक सप्ताह तक चलने वाला उर्स मेला शुरु हो गया।
मदार बाबा मजार के गद्दीनशीन मौलान हाजी अमर उल्लाह अंसारी कादरी ने बताया कि बाबा हजरत बदीउद्दीन कुतबुल मदार 600 वर्षों पूर्व कई देशों का भ्रमण करते हुए भाईचारे व मुहब्बत का पैगाम लेकर ईरान से आए थे। नेपाल में पाल पाली वंश के राजाओं के निर्देश पर तत्कालीन जमींदार माधव पजिंयार ने गुदरी गांव के शेर बहादुर आमात्य के सहयोग से मदार गढी में चिल्ला कसी यानि ध्यान धारणा करने के लिए जमीन मुहैया करा दी। जहाॅ बाबा ने दीन दुःखियों को निरोग रहने के मदार का दूध लगाने सलाह देते और लोग ठीक हो जाते थे। इस लिए उनका नाम मदार बाबा पड गया।
मदार बाबा मजार पर जाने के लिए मेला के दिनों में पडरौना या पनियहवाॅ से बस सेवा शुरू हो जाती है। टेªन से वाल्मीकिनगर से नेपाल बार्डर तक जाया जा सकता है। नेपाल के अन्दर तीन किमी0 महलबारी के बाद दुर्गम पहाड़ शुरु हो जाते है। पहला पड़ाव गुद्दर बाबा है जहाॅ कपडा के कतरन चढाया जाता है। दूसरा पड़ाव टीम की नगाडा है जहाॅ मुजावर डंका बजाते देख जाते है। सबसे कठिन चढाई नकदरवा है जहां सम्भल के चलना पडता नही तो हजारो फीट खाई में गिरने का भय रहता है। चौथा पड़ाव चावल चढा कर आगे बढते है जिसे चावल धोई कहा जाता है। पांचवे पहाड़ पर जंगली बाबा है यहाॅ मन्नत मांग कर छठा गेट पार करते है जहाॅ सिर्फ महिलाए प्रवेश करती है। इसको सदर गेट कहते है। सातवां पड़ाव पर कोहडा बाबा है। आठवें पर शहजादी का मजार हैं जहां भूत प्रेत की बाधा दूर कराने के लिए लोग आते हैं। नौवें पड़ाव पर मदार बाबा हैं।

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