साहित्य - संस्कृति

प्रसिद्ध कथाकार शिवमूर्ति बने जसम के प्रदेश अध्यक्ष

 
नफरत,  हिंसा और अविवेक के खिलाफ जसम का प्रदेश सम्मेलन सम्पन्न
लखनऊ, 16 अक्टूबर। जन संस्कृति मंच का दो दिवसीय सातवाँ राज्य सम्मेलन आजमगढ़ के शिब्ली एकेडमी में सम्पन्न हो गया। इसमें देवरिया, गोरखपुर, आगरा, झांसी, ललितपुर, बलिया, इलाहाबाद, लखनऊ, सुल्तानपुर, जौनपुर मऊ, आजमगढ़ आदि जिलों से कवि, लेखक, कलाकार, रगकर्मी,  बुद्धिजीवी आदि ने हिस्सा लिया। हिन्दी के प्रसिद्ध कथाकार शिवमूर्ति प्रदेश अध्यक्ष बनाये गये। वहीं कवि कौशल किशोर को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। युवा लेखक, चिन्तक व आलोचक डॉ रामायण राम जसम के प्रदेश सचिव चुने गये। इसके साथ ही अध्यक्ष मंडल, सचिव मंडल, राज्य कार्यकारिणी और राज्य परिषद का भी चुनाव हुआ।
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जसम के इस राज्य सम्मेलन का केन्द्रीय विषय था: नफरत,  हिंसा और अविवेक के खिलाफ उभरते सांस्कृतिक प्रतिरोध के नए रूप’। मुख्य अतिथि के बतौर बोलते हुए मशहूर कथाकार शिवमूर्ति ने कहा कि आज देश में लोकतंत्र का अपहरण करने की कोशिश चल रही है। इसका जवाब लेखकों-संस्कृतिकर्मियों को एकजुट होकर देना होगा। उन्होंने कहा कि संघ-भाजपा का काम  जनता के बीच भ्रम फैलाना है, विघटन और अलगाव पैदा करना है, इसलिए इनके छल-छद्म से सीधी-सादी जनता को बचाना होगा। इनसे लेखकों-संस्कृतिकर्मियों को सावधान रहना चाहिए, इनके प्रलोभनों में नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में लेखक संगठनों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो गयी है।
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मुख्य वक्ता थे ‘नॉट इन माय नेम’ अभियान के संयोजक और फिल्मकार राहुल रॉय व सबा दीवान। उन्होंने अपने अभियान के बाबत नफरत, हिंसा और अविवेक के होते विस्तार और परिणाम पर बात करते हुए कहा कि नफरत की संस्कृति और राजनीति के खिलाफ हर रोज लड़ना होगा। यह कोई एक दिन की लड़ाई नहीं है। नॉट इन माय नेम अभियान के दौरान पेश आयी दिक्कतों को सामने रखते हुए दोनों ने कहा कि सिर्फ सत्ता ही नहीं बल्कि घर-परिवार और समाज तक में अलगाव में डालने की कोशिश हुई। उन्होंने कहा कि आज आर.एस.एस. की उग्र हिंदुत्व की विचारधारा भारत के धर्म-निरपेक्ष व लोकतांत्रिक स्वरुप के लिए खतरा बन चुकी है। ऐसे में भारतीय संविधान की मूल आत्मा की रक्षा करना हमारा कर्तव्य बन गया है। देश के हर नागरिक को सामाजिक ताने-बाने की सुरक्षा व संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए।
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उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कर रहे जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर राजेंद्र कुमार ने कहा कि संवाद की परम्परा बनाए रखकर ही इस चुनौती से मुकाबिल होना होगा। हमें नफरत, हिंसा और अविवेक के खिलाफ देश भर में चल रहे अलग अलग प्रतिरोधों और नए रूपों के साथ एकता कायम करने की कोशिश करनी चाहिए तथा अपने से असहमत लोगों से भी संवाद करना चाहिए। इस सत्र में बिरादराना संगठनों की तरफ से जनवादी लेखक संघ के राज्य सचिव नलिन रंजन सिंह तथा प्रगतिशील लेखक संघ के राज्य महासचिव संजय श्रीवास्तव ने अपनी बात रखी और फासिस्ट राजनीति व संस्कृति के खिलाफ वाम-जनवादी साझी लड़ाई को  और आगे ले जाने की जरूरत बतायी। सम्मेलन में प्रदेश के जिलों से आये प्रतिनिधियों और अतिथियों का स्वागत किया डॉ.बाबर अशफाक खान ने तथा़ आजमगढ़ फिल्मोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष विजय बहादुर राय ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस मौके पर अशोक भौमिक की किताब ‘जीवनपुरहाट जंक्शन ‘ का विमोचन शिवमूर्ति, राहुल राय, सबा दीवान और राजेंद्र कुमार द्वारा हुआ।
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सम्मेलन के दूसरे दिन आजमगढ़ फिल्मोत्सव का आयोजन था। आरम्भ सबा दीवान की दस्तावेजी फिल्म ‘द अदर सांग से हुआ। फिल्म के बाद सबा दीवान व फिल्म के छायाकार राहुल रॉय ने दर्शकों के सवालों का जवाब दिया। इसके बाद बच्चों का सत्र हुआ जिसमे संजय जोशी और सौरभ ने छोटी फिल्मों और दृश्यों के मार्फत बच्चों से जीवंत संवाद किया। यह एक अलग अनुभव था बच्चों के लिए। इसके बाद फीचर फिल्म ‘तुरुप’ दिखाई गयी। इसमें एकतारा समूह के सुशील उपस्थित रहे और दर्शकों से रूबरू हुए। इसी क्रम में छोटी फिल्म ‘अग्निशिखा’ का प्रदर्शन हुआ। इस फिल्म के निर्देशक सौरभ फिल्म के साथ दर्शकों से मुखातिब हुए। फिल्मोत्सव का समापन प्रतिरोध के संगीत से हुआ जिसमें कई म्यूजिक विडिओ दिखाई गयी। इन दो दिनों का मुख्य आकर्षण सम्भावना कला मंच के द्वारा कविता पोस्टर की प्रदर्शनी और स्त्री-आजादी को अभिव्यक्त करती कला प्रस्तुति भी रही। इस दौरान समकालीन जनमत और प्रतिरोध का सिनेमा की तरफ से पुस्तक प्रदर्शनी भी लगायी गयी।
सम्मेलन में जसम के राष्ट्रीय महासचिव मनोज कुमार सिंह, जसम फिल्म समूह द ग्रूप के संजय जोशी,  ‘अभिनव कदम’ के संपादक जयप्रकाश धूमकेतु, कवि भगवान स्वरूप कटियार, ओम प्रकाश मिश्र व श्याम अंकुरम, ‘समकालीन जनमत’ के प्रधान संपादक रामजी राय व प्रबंध संपादक मीना राय, जसम के पूर्व राज्य सचिव प्रेम शंकर,  आलोचक प्रियम अंकित, पत्रकार अशोक चौधरी, कथाकार हेमन्त कुमार, ‘कथा’ के संपादक दुर्गा सिंह, कलाकार राजकुमार सिंह, कवयित्री ममता सिंह व विमल किशोर, संस्कृतिकर्मी जगदीश लाल, अंशुमन, रुचि दीक्षित व गीतेश, कवि सरोज पाण्डेय व उदभव मिश्र, युवा लेखक ब्रजेश शर्मा आदि शामिल हुए।

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