Monday, February 6, 2023
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1.22 लाख जमा करें तब देंगे आंगनबाड़ी केन्द्र के बारे में जानकारी

-लार के बाल विकास परियोजना कार्यालय का आरटीआई आवेदन पर हैरान करने वाला जवाब
आरटीआई आवेदक ने मांगी थी अपने गांव के आंगनबाड़ी केन्द्र के बारे में जानकारी
कार्यालय ने कहा 61493 पेज में है जानकारी, देने होंगे 1,22,986 रूपए

देवरिया, 14 जुलाई। सूचना अधिकार कानून के बने एक दशक से अधिक समय होने के बाद भी अधिकारियों के रवैये में कोई खास बदलाव नहीं आया है और वे आज भी लोगों को तमाम बहाने बनाकर सूचना देने से बचने का रास्ता निकालते हैं। लार क्षेत्र के एक युवक द्वारा अपने गांव के आंगनबाड़ी केन्द्र के बारे में मांगी गई सूचना पर बाल विकास परियोजना कार्यालय ने सूचना देने की फीस के बतौर 1.22 लाख रूपए की मांग कर दी।
लार क्षेत्र के रावतपार रहोन गांव निवासी विकास कुमार पाल ने बाल विकास परियोजना कार्यालय के सहायक जन सूचना अधिकारी से अपने गांव के आंगनबाड़ी केन्द्र के बारे में नौ विंदुओं पर सूचना मांगी। उन्होंने आवेदन में आंगनबाड़ी कार्यकत्री, सहायिका के शैक्षिक योग्यता के प्रमाण पत्र, इन दोनों के साथ-साथ सुपरवाइजन के दायित्व और उन्हें मिलने वाले लाभ, वितरित किए जाने वाले पुष्टाहार व कुपोषित पाए गए बच्चों के बारे सूचना मांगी। आवेदन में उन्होंने आंगबाड़ी केन्द्र के किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट की प्रति भी मांगी थी।
श्री पाल को आवेदन के जवाब में बाल विकास परियोजना कार्यालय के सहायक जन सूचना अधिकारी द्वारा पांच जुलाई को भेजा गया पत्र मिला जिसे देखकर वह हैरान हो गए। इस पत्र में कहा गया है कि उनके द्वारा मांगी गई जानकारी 61493 पेज में है और इसके लिए उन्हें प्रति पेज दो रूपए की दर से 1,22,986 रूपया जमा करना होगा तब उन्हें सूचना दी जा सकती है।
श्री पाल ने बताया कि सूचना न देने के लिए उनसे सूचना शुल्क के रूप में इतनी भारी धनराशि की मांग की गई है। आंगनबाड़ी सेंटर वर्ष 2001 में शुरू हुआ है। क्या 16 वर्ष में इस आंगनबाड़ी सेंटर से सबंधित दस्तावेज 61 हजार से अधिक पेज के हो गए हैं ? वह तो सभी दस्तावेज मांग भी नहीं रहे हैं। उनके द्वारा मांगे गई कई सूचनाए तो महज एक दो पंक्तियों में दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि वह कार्यालय को पत्र लिखकर अनुरोध करेंगे कि उनके द्वारा मांगी गई सूचना पेन ड्राइव में दी जाए। इसके बावजूद यदि सूचना नहीं दी जाती है तो वह प्रथम अपील करेंगे और फिर सूचना आयोग जाएंगें।

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