Saturday, August 13, 2022
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मानसिक रोगों के प्रति जागरूकता फैलाएंगे सवा सौ स्वास्थ्यकर्मी

गोरखपुर. राष्ट्रीय डिमेंशिया जागरूकता सप्ताह और विश्व अल्जाईमर्स दिवस के मौके पर मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) कार्यालय के प्रेरणा श्री सभागार में शनिवार को मानसिक रोग जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सीएमओ डा. श्रीकांत तिवारी ने प्रतिभागी करीब सवा सौ स्वास्थ्यकर्मियों से अपील किया कि वे जन-जन तक मानसिक रोगों के बारे में जानकारियों का प्रचार प्रसार करें और करवाएं।

सीएमओ ने कहा कि बहुत से ऐसे मानसिक रोग हैं जिनके बारे में लोगों को पता नहीं होता है। भूलने की बीमारी भी ऐसी ही आदत है। यह भी एक प्रकार का मानसिक रोग है। 60 वर्ष की उम्र के बाद पांच फीसदी, 70 वर्ष की उम्र के बाद 10 फीसदी और 80 वर्ष की उम्र के बाद 15 फीसदी लोगों को यह बीमारी प्रभावित करती है।

राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के एमडी साइकेट्रिस्ट डा.अमित शाही और क्लीनिकल साइकोलाजिस्ट रमेन्द्र त्रिपाठी ने स्वास्थ्यकर्मियों को बताया कि कम नींद आना, ज्यादा सोना, उलझन, घबराहट, हीन भावना, जिंदगी के प्रति नकारात्मक सोच, एक ही विचार मन में बार-बार आना, एक ही कार्य को बार-बार करने की इच्छा होना, डर लगना, अनावश्यक शक होना, कानों में आवाज आना समेत कई प्रकार के ऐसे लक्षण हैं जो मानकिस बीमारियों से जुड़े हुए हैं। अगर चिकित्सक को दिखा कर सही परामर्श लिया जाए तो समय रहते बीमारी ठीक हो सकती है।

कार्यक्रम में जिला मलेरिया अधिकारी डा. एके पांडेय, जेई-एईस कंसल्टेंट डा. सिद्धेश्वरी, एनसीडी सेल से अजय सिंह रूप से मौजूद रहे। कार्यशाला के प्रतिभागी राकेश पाठक ने बताया कि उन्हें मानसिक रोगों से संबंधित विस्तार से जानकारी दी गयी है जिसका वह खुद तो प्रचार-प्रसार करेंगे ही, आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से भी समुदाय में जागरूकता लाएंगे।

  • बुजुर्गावस्था में अल्जाइमर के लक्षण
    • चीजों को खो देना और वापस ढूंढने में असमर्थताष।
    • दोस्तों व परिवार के सदस्यों को पहचानने में असमर्थता।
    • नियोजन व समस्या उलझाने में मुश्किल
    • दूरी निर्धारण व रंगों में अंतर करने में परेशानी होना।
    • सामाजिक गतिविधियों से अलगाव
    • मूत्राशय और आंत नियंत्रण की कमी

स्वस्थ हो रहे हैं मानसिक रोगी

सीएमओ ने बताया कि जिले में राष्ट्रीय मानसिक रोग कार्यक्रम के तहत सितम्बर 2017 से जून 2019 तक कुल 23,655 मरीजों की स्क्रिनिंग की गयी। इन मरीजों में से 9249 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं और इनका लगातार फालोअप चल रहा है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक महीने के पहले मंगलवार को सरदारनगर, दूसरे मंगलवार को गोला, तीसरे मंगलवार को बांसगांव और चौथे मंगलवार को पाली में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी शिविर लगता है। इसके अलावा प्रत्येक महीने के पहले गुरुवार को डेरवा, दूसरे गुरुवार को पिपराईच, तीसरे गुरुवार को ब्रह्मपुर और चौथे गुरुवार को गगहा में शिविर लगा कर मानसिक रोगियों का इलाज किया जाता है। प्रत्येक शनिवार को जेल, सेल्टर होम, विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, स्कूल, चयनित स्लम क्षेत्र या कार्यस्थल (इनमें से किसी एक स्थान पर) पर शिवर लगा कर काउंसिलिंग सत्र चलाया जाता है और मानसिक रोगियों को चिन्ह्त कर उनका इलाज किया जाता है

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