Wednesday, January 19, 2022
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सावधानी न रखने पर एक टीबी मरीज से संक्रमित हो सकते हैं 15 लोग

गोरखपुर। क्षय रोग (टीबी) के शुरुआती लक्षण को नजरंदाज कर अगर समय से जांच न हो और सावधानी न रखी जाए तो एक टीबी मरीज 15 अन्य लोगों को संक्रमित कर सकता है। ऐसे में आवश्यक है कि लक्षण दिखते ही टीबी मरीज की जांच हो और दवा शुरू हो जाए। दवा बीच में बंद नहीं होनी चाहिए अन्यथा टीबी की जटिलताएं बढ़ सकती हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने प्रेरणा श्री सभागार में यह बातें पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहीं। वह आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम के तहत मनाए जा रहे आईकानिक वीक ऑफ हेल्थ की कड़ी में पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे।

सीएमओ ने कहा कि टीबी की दवा बीच में छोड़ने वाले लोगों में जब ड्रग रेसिस्टेंट पैदा हो जाता है तो इलाज काफी लंबा और महंगा हो जाता है। सभी सरकारी अस्पतालों में हर प्रकार के टीबी का इलाज और दवा निःशुल्क उपलब्ध है। ऐसे में सभी लोगों को लक्षण दिखने पर समय से जांच करवा लेना चाहिए।

इस मौके पर जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्र ने बताया कि टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (टीपीटी) के तहत जिन घरों में टीबी के मरीज हैं उनके परिवार के प्रत्येक सदस्य को तीन महीने तक निःशुल्क दवा खिलाई जाएगी। इस कार्य में लोगों को आशा कार्यकर्ता के प्रति सहयोगात्मक रवैया अपनाना चाहिए। इससे पूर्व जिन घरों में टीबी के मरीज निकलते थे उन घरों में पांच साल से छोटे उम्र के बच्चों को ही यह दवा खिलाई जाती थी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मेडिकल कंसल्टेंट डॉ. सौरभ श्रीवास्तव ने पीपीटी प्रस्तुति के जरिये क्षय उन्मूलन में सरकार के लक्ष्य और सामुदायिक सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला । इस अवसर पर जिला कार्यक्रम समन्वयक धर्मवीर प्रताप सिंह, जिला पीपीएम अभय नारायण मिश्र, मिर्जा आफताब बेग, पाथ संस्था से सलाहकार डॉ. नीरज पांडेय, इंद्रनील और गोविंद कुमार प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।

आयोजित हो रहे हैं कार्यक्रम

डीटीओ ने बताया कि आजादी के अमृत महोत्वस के आईकानिक वीक ऑफ हेल्थ के तहत बीते छह जनवरी को पं. दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विवि के एनएसएस के करीब 300 बच्चों को टीबी के प्रति संवेदीकृत किया गया । जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक, धर्मगुरूओं का संवेदीकरण और इंजीनियिरंग कॉलेज के छात्रों के संवेदीकरण का कार्यक्रम प्रस्तावित है । इससे पूर्व पिछले माह नियमित जनजागरूकता कार्यक्रम की कड़ी में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में और स्वास्थ्य केंद्रों पर 400 से अधिक लोगों को टीबी उन्मूनल की शपथ दिलाई गयी। निजी क्षेत्र के 200 लोगों को संवेदीकृत किया गया और निजी कॉलेज के करीब 500 छात्र-छात्राओं को टीबी के बारे में जानकारी दी गयी ।

यह हैं लक्षण

डॉ. मिश्र ने बताया कि दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, बलगम में कभी-कभी खून आना, सीने में दर्द होना, शाम को हल्का बुखार आना, वजन कम होना और भूख न लगना टीबी के सामान्य लक्षण हैं। ऐसे टीबी के संभावित मरीज दिखें तो उनकी टीबी की जांच अवश्य करवाई जानी चाहिए।

मिलती है प्रोत्साहन राशि

डीटीओ ने बताया कि गैर सरकारी व्यक्ति या किसी निजी चिकित्सक द्वारा भी नया टीबी रोगी खोजने पर 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है । इसके अलावा टीबी मरीज को इलाज के दौरान पोषण के लिए 500 रुपये प्रति माह उसके खाते में दिये जाते हैं । जिले में अब तक करीब 63.13 लाख रुपये इस योजना के तहत 25313 लाभार्थियों को दिये जा चुके हैं । जिले में इस समय टीबी के 6110 मरीजों का इलाज चल रहा है।

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