विचार समाचार

क्या जाति इंसान से बड़ी है

दिव्यल भूषण गुप्ता / अभिनव शंकर गोस्वामी

जब भी  हम टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस की बात किसी से करते हैं , तो उसका पहला प्रश्न तो यह होता है कि क्या ऐसा कोई इंस्टीट्यूट भी है क्या ? उसके बाद अगर आप उनको समझा लें तो बात आती है , इसमें होता क्या है ? तो मैं अपने पाठकों को बता दूं यह इंस्टीट्यूट देश के सर्वश्रेष्ठ प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक है जो समाज की समस्याओं को कैसे सुलझाया जाए, यह पढ़ाता है.

टाटा इंस्टीट्यूट में हर दिन कुछ नया सीखा जाता है, कुछ ऐसा ही दिन आज भी था. आज हमारी सोशियोलॉजी की कक्षा में जाति प्रथा को लेकर चर्चा चल रही थी. इसी चर्चा पर बात को आगे बढ़ाने और जाति प्रथा को हम लोगों को अच्छे से समझने के लिए एक डॉक्यूमेंटरी दिखाई गई.

इस डॉक्यूमेंटरी का नाम है India Untouched. इस डॉक्यूमेंटरी को स्टालिन के. ने डायरेक्ट किया है. इस डॉक्यूमेंटरी में स्टालिन के. ने दर्शाया है कि किस प्रकार हमारे देश के प्रमुख धर्मों में जाति प्रथा उसका अभिन्न अंग बन चुकी है. डॉक्यूमेंटरी के पहले सीन में हम एक गांव को देखते हैं, जहां पर एक रिपोर्टर और उसका  कैमरा-मैन गांव की दलित महिला के घर जाते हैं और उसका इंटरव्यू लेते हैं. इंटरव्यू के दौरान कई बच्चे जो कि आस-पास के घरों में रहते हैं , वे उस महिला की बात गौर से सुनते हैं लेकिन कोई घर के अंदर नहीं आ रहा है. रिपोर्टर बच्चों से पूछता है कि वे अंदर क्यों नहीं आते तो कुछ देर बाद उन्ही में से एक बच्चा बोल उठता है – अगर हम घर के अंदर आए तो हमारा धर्म भ्रष्ट  हो जाएगा। ’

यह बात सुनकर रिपोर्टर हैरान हो जाता है। फिर वह बच्चों से यह सवाल भी करता है कि यह आपको किसने सिखाया है , परंतु वे बता नहीं पाते. वे  सिर्फ यह कह पाते हैं कि वे बचपन से सुन रहे हैं.

दूसरे सीन देश के सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जवाहरलाल लाल नेहरू का है  जो अपने खुले माहौल और अच्छी पढ़ाई के कारण चर्चा में रहता है. इस डॉक्यूमेंट्री में लेफ्ट का गढ़ कहे जाने वाली इस संस्था की एक दलित लड़की जो बिहार की रहने वाली है , उसकी कहानी को बयान किया हैं. वह बताती है कि जब उसने अपनी ही प्रदेश की दूसरी लड़की की मदद कि जब वह बीमार थी , तो उस लड़की को शुक्रिया करने की जगह उसने उसकी जाति पूछी और जब उसको पता चला कि वह एक दलित है तो उसने कहा तुमने तो मेरा धर्म भ्रष्ट कर दिया.

 डॉक्यूमेंटरी में देश के विभिन्न कोनों में खोज पड़ताल को दिखाया गया है और इसको करने के बाद रिपोर्टर अपनी रिपोर्ट में  पंजाब को दिखाता है. वह देखता है कि सिखों में भी जाति प्रथा है और इसमें दलित भी  हैं. इस्लाम में सय्यद और पठान के वर्चस्व के होने की बात होती और बाकी जातियों को उनके नीचे रहना पड़ता है. सबसे अंत में देश के सबसे विकसित राज्यों में से एक केरल में रिपोर्टर पहुँचता है. वहां वह देखता है कि ईसाइयों में भी अपर कास्ट और लोअर कास्ट के गिरजाघर हैं. यहीं डॉक्यूमेंटरी खत्म होती है और हमें बताने में कामयाब होती है कि दलित कितना भी पढ़ लिख जाए या यदि  दूसरे रिलीजन में कनवर्ट हो जाए तब भी उसकी जो आइडेंटिटी  है वहीं रहती है, बदलती नहीं है.

(लेखक टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, गुवाहाटी के छात्र हैं और कैम्पस पत्रिका ‘ Campus Zephyr ’ से जुड़े हैं )

About the author

गोरखपुर न्यूज़ लाइन

Leave a Comment

aplikasitogel.xyz hasiltogel.xyz paitogel.xyz