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कुशीनगर में भूख और बीमारी से दो मुसहर भाइयों की मौत

कुशीनगर, 29 दिसम्बर। कुशीनगर में भूख और बीमारी ने कल दो मुसहर भाइयों की जान ले ली। दोनों तीन माह से बीमार थे। गरीबी के कारण वे ठीक से इलाज नहीं करा सके। अंतिम दिनों में तो दोनों भाइयों के परिवार को फाकाकशी करनी पड़ी।
कुशीनगर में एक दशक से अधिक समय से मुसहर समुदाय में भूख और बीमारी से मौतों की खबरें आती रही हैं। मुसहर समुदाय के लोग भूख और कुपोषण के कारण तपेदिक, कालाजार सहित कई अन्य बीमारियों से बड़ी संख्या में ग्रसित हैं।
घटना कुशीनगर जिले के दुदही क्षेत्र के मठिया माफी गांव की है। इस गांव में सुरेश 40 और गंभा 35 दो सगे भाईयों का घर है। दोनों के पिता शिवशंकर अब इस दुनिया में नहीं हैं। दोनों भाई गांव में आस-पास झोपड़ी में रहते थे। दोनों मजदूरी कर अपने परिवार की आजीविका चला रहे थे। सुरेश के पांच संतानें- तो गंभा के तीन बच्चे हैं। सुरेश और गंभा तीन माह पहले बीमार पड़े। उन्हें बुखार और सांस लेने में तकलीफ होने लगे। जागरूकता के अभाव में दोनों दुदही या पडरौना के सरकारी अस्पताल में इलाज कराने के बजाय पडरौना में किसी प्राइवेट डाक्टर के पास गए। डाक्टर ने जो भी दवाइयां लिखी, पैसे की कमी के कारण वे खरीद नहीं सके। कभी-कभार एकाध गोली खा ली। बीमारी गंभीर होती गई और वे काम-काज करने में भी असमर्थ हो गए। कामकाज नहीं कर पाने के कारण घर में रोटी का भी संकट हो गया और कुछ दिनों से दोनों के घर फाकाकशी होने लगी। बुधवार की शाम सुरेश की मौत हो गई। कुछ देर बाद गंभा भी चल बसा। आज दोनों का एक साथ अंतिम संस्कार हुआ।
सुरेश की पत्नी चाना और गंभा की पत्नी पासमती ने बताया कि दोनों के पास खेती के लिए जमीन का एक टुकड़ा भी नहीं है। पति मजदूरी कर गुजारा करते थे। पति के बीमार होने पर उन दोनों ने मजदूरी की। उन्हें एक दिन की दिहाड़ी 80 रूपए मिलती थी। ठंड बढ़ने पर कई दिन से दिहाड़ी भी नहीं मिल पा रही थी। पति की देखभाल भी करने के कारण मजदूरी करना मुश्किल हो रहा था। दो दिन से घर में खाना नहीं बन पाया। उन्होंने दो दिन पहले भोजन के बतौर सिर्फ चाय पी थी। उसके पहले उन्हें पावरोटी ही खाने को नसीब हुआ था।
सुरेश के पास मनरेगा का जाब कार्ड है लेकिन उसके जाब कार्ड पर कोई इंटी नहीं है जिससे पता चलता है कि उसे काफी दिन से कोई काम नहीं मिला था। सुरेश और गंभा को अन्त्योदय का राशन कार्ड जारी किया गया है लेकिन राशन कार्ड उनके पास न होकर कोटेदार के पास था। इंदिरा आवास के लिए दोनों को पहली किश्त मिली थी जिससे उन्होंने दीवार खड़ी की थी लेकिन छत की ढलाई नहीं हो पायी थी।
सुरेश और गंभा की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया है। उपजिलाधिकारी विपिन कुमार ने कहा कि गांव में लेखपाल को भेजा गया है। उनकी रिपोर्ट मिलने के बाद दोेेनों परिवारों को मुख्यमंत्री सहायता कोष से सहायता दिलायी जाएगी। दुदही के चिकत्साधिकारी ने आज गांव में टीम भेजी जिसने गांव में मच्छरों को मारने वाली दवा का छिड़काव किया।

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