Wednesday, February 21, 2024
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हाईकोर्ट ने डॉ कफ़ील खान के भाई पर जानलेवा हमले की केस डायरी तलब की, एसएसपी से हलफ़नामा माँगा

डॉ कफ़ील खान के भाई काशिफ जमील पर जानलेवा हमले की सीबीआई जाँच करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका

गोरखपुर. डॉ कफ़ील खान के भाई काशिफ जमील पर जानलेवा हमले के मामले की सीबीआई  जाँच करने की मांग के संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने इस मामले की केस डायरी तलब करते हुए गोरखपुर के एसएसपी को व्यक्तिगत रूप से हलफ़नामा देने को कहा है.

यह याचिका डॉ कफ़ील खान के बड़े भाई अदील अहमद ने दायर किया था. हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और दिनेश कुमार सिंह की बेंच ने याचिका पर सुनवाई करते हुए 11 जुलाई को यह आदेश दिया. अगली सुनवाई 26 जुलाई को होगी.

अदील अहमद के अधिवक्ता नज़रूल इस्लाम जाफरी ने कहा कि अदील के भाई काशिफ जमील पर 10 जून की रात जानलेवा हमला हुआ था और उसे पांच गोलियां मारी गई. एक गोली काशिफ़ के गले से बरामद हुई. इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. आपरेशन के बाद काशिफ़ जमील ने पुलिस विवेचना अधिकारी को धारा 161 सीआरपी के तहत बताया की उसके ऊपर हमले में भाजपा सांसद कमलेश पासवान और कुछ अन्य लोग शामिल हैं.

याचिकाकर्ता ने कहा कि कमलेश पासवान पर उनके ममेरे भाई असद उल्लाह वारसी ने  एक एफआईआर ( केस क्राइम नम्बर 149/2018 धारा 147, 148, 14 9, 323, 504, 506, 427, 447 और 120 बी आईपीसी ) दर्ज कराया था. पुलिस दोनों मामलों में   उचित तरीके से जांच नहीं कर रही है और दोनों मामलों में आरोपी व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है.

याचिकाकर्ता का कहना था कि संसद कमलेश पासवान राजनीतिक व्यक्ति है और वह दोनों मामलों की जांच में हस्तक्षेप कर रहे हैं. उनके हस्तक्षेप के कारण वर्तमान मामले उचित तरीके से निष्कर्ष निकाल नहीं पाएगा. इसलिए इस मामले की जाँच सीबीआई को स्थानांतरित किया जाय.

एडीजी ने कहा कि याचिकाकर्ता का आपराधिक इतिहास है और याचिकाकर्ता के वकील द्वारा इसका खुलासा नहीं किया गया है. याचिकाकर्ता और कमलेश पासवान के बीच विवाद और शत्रुता का इतिहास है. विवाद के कारण याचिकाकर्ता का आपराधिक इतिहास सामने आ गया है.

हाई कोर्ट ने सांसद को नोटिस जारी कर तीन हफ्तों के भीतर काउंटर हलफनामा दाखिल करने तथा शासकीय अधिवक्ता को इस मामले की केस डायरी प्रस्तुत करने का आदेश दिया. हाईकोर्ट ने एसएसपी गोरखपुर को वर्तमान मामले की प्रगति के बारे में व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने का आदेश दिया और कहा कि वह सुनिश्चित करें कि वर्तमान मामले में निष्पक्ष  जांच जारी रहे. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया वर्तमान केस की जांच का परिणाम इस अदालत के फैसले के अधीन होगा.

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