स्वास्थ्य

बिहार के सीमावर्ती गांवों में फैल रहा कालाजार, पांच वर्षों में मिले 96 मरीज

देवरिया. स्वास्थ्य महकमा इन दिनों जिले में कालाजार प्रभावित गांवो को लेकर सतर्क है। प्रति वर्ष बढ़ रहे मरीजों की संख्या पर नियंत्रण के लिए विभाग चिह्नित गांवों में छिड़काव व निरोधात्मक कार्य करा रहा है. इसके अलावा प्रत्येक दो माह पर सर्वे भी किया जा रहा है.

बिहार के सीमावर्ती गांवों में 5 वर्ष में कालाजार के 96 मरीज मिले हैं. पिछले पांच वर्ष के आकड़ों पर गौर करें तो 2014 में 2, 2015 में 4, 2016 में 11, 2017 में 29, 2018 में 41, वही मार्च 2019 तक 9 मरीज कालाजार के मिले हैं.

सीएमओ डॉ धीरेन्द्र कुमार ने बताया कि जिले में कालाजार के मरीजों की बढ़ती संख्या को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क है और जिले प्रभावित चिह्नित गांवों में निरोधात्मक कार्य कराए जा रहे हैं, जिसमें छिड़काव के साथ ही बीमारी के बारे में जानकारी दी जा रही है. इसे जड़ से समाप्त करने का हमारा प्रयास है हमारी टीम बेहतर कार्य कर रही है.

चित्र -यू ट्यूब से साभार

सीएमओ ने बताया कि जिले के तीन ब्लाक भाटपाररानी, बनकटा व भटनी विकास खंड के गांवों से सर्वाधिक मरीज निकल रहें हैं. भाटपाररानी ब्लाक का टडवा गांव, भटनी ब्लाक का बनकटा शिव, पिपरा बिट्ठल व बनकटा विकास खंड का सर्वाधिक मरीज मिले हैं, जिसमें सुन्दरपार, रामपुर बाजार,खुरवसिया उत्तर, खुरवसिया दक्षिण पट्टी, बैंकुंठपुर, पकड़ी नरहियां, जानकी कुटियाभर, नियरवा, सिकटियां बाजार, राजापुर,गजहड़वा, पकड़ी बाजार, कड़सरवा बुजुर्ग गांव शामिल है.

वहीँ पथरदेवा, भलुअनी, रामनाथ देवरिया व गरूलपर में भी कालाजार के मरीज मिले हैं. इन गांवों पर स्वास्थ्य विभाग की पैनी नजर है और इन गांवों में छिड़काव व निरोधात्मक कार्य कराया जा रहा है. इसके अलावा सर्वे के दौरान देसही देवरिया पथरदेवा व महेन में भी एक एक मरीज मिले.

क्या है कालाजार

सीएमओ डॉ धीरेन्द्र कुमार ने बताया कि कालाजार बालू मक्खी से फैलने वाली बीमारी है. ये मक्खी नमी वाले स्थानों पर अंधेरे में पाई जाती है. यह तीन से चार फीट ही उड़ पाती है. इसके काटने के बाद मरीज बीमार हो जाता है. उसे बुखार होता है और रुक-रुक कर बुखार चढ़ता-उतरता है. पंद्रह दिन से अधिक समय तक अगर एंटी बायोटिक व एंटी मलेरियल दवा खाने के बाद बुखार नहीं ठीक हो रहा है तो मरीज को चिकित्सक को दिखाना चाहिए.

इस बीमारी में मरीज का पेट फूल जाता है. भूख कम लगती है. शरीर काला पड़ जाता है. इस बीमारी से बचाव के बारे में बताए हुए सीएमओ ने बताया कि बालू मक्खी से बचाव के लिए घर में छिड़काव करवाना चाहिए, जिससे मक्खियां मर जायें. घर की दीवारों में नमी कत्तई न रहने दें.  मिट्टी के घरों की पोताई करते रहें और सुराखों को बंद कर दें. पक्की मकान में अगर प्लास्टर न हो तो उसे प्लास्टर करा दें. इन सुराखों व नमी वाले स्थान ही बालू मक्खी का निवास है. बचाव के लिए जमीन पर न सोए चारपाई व तख्ते पर सोयें.

जिला मलेरिया अधिकारी शिव प्रसाद तिवारी कहते हैं कि अगर किसी मरीज को पन्द्रह दिन से अधिक बुखार हो तो प्रत्येक पीएचसी, सीएचसी व जिला चिकित्सालय में जांच उपलब्ध है. कालाजार के इलाज के लिए एम्बीसोम इंजेक्शन निशुल्क लगाया जाता है.

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