साहित्य - संस्कृति

किसान- मजदूर की आवाज हैं गोरख पांडेय के गीत

गोरखपुर. भोजपुरी संगम की 119 वीं बैइठकी खरैया पोखरा स्थिति स्व.सत्य  नारायण मिश्र सत्तन के आवास पर हुई जिसके प्रथम सत्र में क्रांतिकारी कवि     गोरख पांडे और उनकी रचनाओं पर चर्चा की गई.
अध्यक्षता कर रहे सूर्य देव पाठक पराग ने कहा की रचना की सार्थकता यही होती है कि रचनाकार के ना होने पर भी लोग उसकी रचनाओं के माध्यम से याद करते रहें. इस परिप्रेक्ष्य में गोरख पांडे का नाम विशेष उल्लेखनीय है. उनकी लोकप्रियता के आधार भोजपुरी गीत है जो जहां-तहां चौपालों में गाये जाते हैं. उनके गीत और कवितायेँ ‘ जागते रहो ‘ . ‘ लोहा गरम हो गया है ‘,  ‘ समय का पहिया ‘ में संग्रहित है.
आद्या प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि गोरख पांडे के गीत भोजपुरी इलाके के किसान, मजदूर और लाचार आदमी के हृदय की आवाज हैं. उनकी लगभग सभी गीत मजदूर आंदोलन के गीत बनकर आज भी जनमानस को आंदोलित करने की ताकत रखते हैं.
कार्यक्रम के दुसरे सत्र में वीरेंद्र मिश्र दीपक, डॉक्टर फूल चंद प्रसाद गुप्त, अवधेश शर्मा, नंद कुमार, अभिनीत, ओमप्रकाश पांडे, आचार्य राम सुधा सिंह सैंथवार, जगदीश खेतान, मधुसूदन पांडे, रामनरेश शिक्षक आदि ने काव्य पाठ किया. इस अवसर पर सृजन गोरखपुरी, रविंद्र मोहन त्रिपाठी, बलराम राय, कुमार विनीत सहित अनेक लोग सहित अनेक लोग उपस्थित थे. संचालन अवधेश शर्मा नंद और आभार ज्ञापन इंजीनियर राजेश्वर सिंह ने किया.

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