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हरियाणा के बल्लभगढ़ से देवरिया के लिए पैदल ही चल रहे हैं 10 मजदूर

गोरखपुर। पूरे देश में लाकडाउन के बाद यूपी और बिहार के मजदूर जगह-जगह फंस गए हैं और उन्हें पैदल अपने-अपने गांवों के लिए चलना पड़ रहा है। सरकार-प्रशासन की ओर से उनके यातायात के लिए कोई इंतजाम अभी तक नहीं किया गया है। देवरिया के 10 मजदूर हरियाणा के बल्लभगढ़ से आज शाम पैदल ही चल पड़े हैं। रात 10 बजे तक वे मथुरा पहुंचे थे।

देवरिया के इन दस मजदूरों के साथ बिहार के मोतीहारी जिले का भी एक मजदूर उज्जवल दूबे भी है।
देवरिया जिले के ये 10 मजदूर-आशुतोष यादव, संतोष राजभर, शैलेश राजभर, मनोज राजभर, अर्जुन राजभर, अर्जुन गोंड, जैनुद्दीन अंसारी, बिट्टू प्रसाद व दो अन्य बघौचघाट के पास कोइरीपति गांव के रहने वाले हैं। ये सभी एक पखवारे पहले हरियाणा के फरीदाबाद जिले के बल्लभगढ़ के पास सिकड़ी गांव में एक कन्सट्रक्शन वर्कशाप में काम करने आए थे। इस वर्कशाप में बिल्डिंग के लिए कालम तैयार करने का कार्य होता है। कोरोना महामारी के चलते लाकडाउन की घोषणा होने के बाद इनको यहां काम देने वाला ठेेकेदार इन्हें कुछ बताए भाग गया। इसके बाद इन मजदूरों को वपास अपने गांव लौटने का चारा नहीं था।

गोरखपुर न्यूज लाइन से बातचीत करते हुए आशुतोष यादव ने बताया कि उन्हें बल्लभगढ़ में यातायात को कोई सााधन नहीं मिला। मजबूर होकर वे अपरान्ह बाद चार बजे पैदल ही चल पड़े। छह घंटे तक करीब 24 किलोमीटर पैदल चलने के बाद वे पलवल पहुंचे जहां उन्हें एक बस मिल गयी। फिलहाल वे बस में सवार हो गए हैं। बस चालक कह रहा है कि मथुरा के तीन किलोमीटर पहले वह उन्हें उतार देगा। वहां से वे फिर पैदल चल पड़ेंगें।

देवरिया और बिहार के इन मजदूरों की दर्द भरी इस दास्तान की जानकारी जब सामाजिक कार्यकर्ता महेन्द्र यादव को मिली तो उन्होंने इसे अपने फेसबुक वाल पर लिखा और उत्तर प्रदेश प्रशासन व प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही जो कि देवरिया जिले के ही हैं, उनसे अपील की कि वे इन मजदूरों की मदद करें । महेन्द्र यादव इन मजदूरों के गांव के ही रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार को इन मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। जब तक कोई व्यवस्था नहीं हो जाती है, इन्हें रास्ते में शेल्टर देकर भोजन का इंतजाम करना चाहिए।

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