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‘ पांच दिन में नगदी और राशन खत्म हो गया, अब हमें भूखे रहना पड़ेगा ’

कांशीराम आवासीय योजना, तारामंडल में रहने वाले दिहाड़ी कामगारों की हालत, प्रशासन एक अप्रैल से राशन बंटवाने की बात कर रहा, कामगारों का सवाल-सिर्फ राशन से कैसे गुजरा होगा

गोरखपुर। कोरोना महामारी को रोकने के लिए किए गए लाकडाउन का असर गरीबों और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ना शुरू हो गया है। कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना तारामंडल में रहने वाले कई गरीब परिवारों के घर राशन के साथ-साथ नगदी खत्म हो गई है और उन्हें भुखमरी की चिंता सताने लगी है। उनकी गुहार आज जब जिला प्रशासन तक पहुुंची तोे दोपहर बाद पहुंचे अफसरों ने कहा कि एक अप्रैल से उन्हें राशन उपलब्ध कराया जाएगा। इन गरीबों का कहना था कि सिर्फ राशन मिलने से उनका गुजारा नहीं होगा क्योंकि उनकी जिंदगी रोज कमाने और खाने पर चलती थी। उनके लिए लाकडाउन तक ठोस इंतजाम करने की जरूरत होगी।

इस आवासीय योजना में करीब 300 परिवार रहते हैं। यह आवासीय भवन बसपा राज में गरीबों के लिए बनाया गया था। इसमें अधिकारी दिहाड़ी कामगार रहते हैं।

गोरखपुर न्यूज लाइन ने यहां रहने वाले कई परिवारों से आज बातचीत की। सुमित्रा देवी लोगों के घरों में चौका-बर्तन करने का काम करती हैं। वह विधवा हैं। उनके उपर वृद्ध पिता के अलावा दो बच्चों के भरण-पोषण का भार है। उन्होंने बताया कि जनता कर्फ्यू के बाद से ही वह काम पर नहीं जा पा रही हैं क्योंकि यातायात के साधन पूरी तरह बंद हैं। वह बेतियाहाता के दो घरों चौका-बर्तन का काम करती थीं। तंगी के कारण उन्होंने एडवांस ले रखा था। अब सारे पैसे खत्म हो गए है। आज सुबह सब राशन भी खत्म हो गया। रात का किसी तरह खाना बना है। अब कल से भूखे पेट रहना पड़ेगा।

इस आवासीय योजना में सी ब्लाक में रहने वाले गुलाब टाउनहाल में दोपहिया वाहनों की धुलाई का काम करते हैं। उनकी रोज की कमाई अनिश्चित है। कभी 250 से 300 रूपए तक कमाई हो जाती थी तो कभी 50 रूपए भी नहीं कमा पाते थे। देशव्यापी लाकडाउन के पहले गोरखपुर जिला प्रदेश सरकार के आदेश पर लाकडाउन चल रहा था। इस कारण जिस दुकान पर वह काम करते थे, वह बंद हो गई। पिछले शुक्रवार से वह काम पर नहीं जा पा रहे हैं। उनके समझ में नहीं आ रहा है कि अगले 19 दिन वह कैसे अपने परिवार का गुजारा करेंगे। उनके घर में बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी व दो बच्चे हैं। उन्होंने बताया कि वह आज कुछ राशन लेकर आए हैं। अब उनके पास नगदी खत्म हो गया है।

गुलाब ने बताया कि आज कुछ अफसर आए थे जिनसे उन्होंने और अन्य कामगारों ने आने हालात बताए। अफसरों ने कहा कि एक अप्रैल से राशन बटेगा लेकिन हम लोगों को सिर्फ चावल-आटा मिलने से तो काम नहीं चलेगा। सब्जी, किराना का सामान व अन्य जरूरतों के लिए वह पैसा कहां से लाएंगें। जब उनकी कमाई ही बंद हो गई तो उनकी जिंदगी कैसे चलेगी।

60 वर्षीय दुर्गा की भी यह कहानी है। उनके पति का निधन हो चुका है। इकलौता बेटा बेरोजगार है। गरीबी और बेरोजगारी के कारण उनकी बहू बच्चों को लेकर मायके रहती है। घर पर वह और उसका बेटा है। घर चलाने के लिए उन्हें इस उम्र में वह लोगों के घर में खाना बनाने का काम करती है। हाल के दिनों में वह एक घर में खाना बनाने का काम रही थी। अब काम बंद है। उनकी सबसे बड़ी परेशानी खाना बनाने के लिए लकड़ी जुटाने की है। उनके पास उज्ज्वला गैस कनेक्शन नहीं है जबकि वह पूरी तरह इसकी पात्र हैं। उन्होंने कनेक्शन के लिए आवेदन किया था लेकिन उन्हें नहीं मिल सका। उन्हें जलौनी लकड़ी लेने तारामंडल के पास जाना पड़ता है जहां उन्हें 20 रूपया किलो लकड़ी मिलती है। घर में राशन खत्म हो रहा है। न काम है न पैसा। कैसे दो जून की रोटी का इंतजाम होगा,यही चिंता खाए जा रही है। एक दुकान पर काम करने वाले हेमंत पासवान की भी यह दास्तान है।

यहां रहने वाले कई कामगार आटो चलाकर अपने परिवार का गुजारा करते हैं। सी ब्लाक में रहने वाले राजू भी इनमें से एक हैं। लाकडाउन के कारण अब वह घर बैठे हैं। रोज की कमाई से घर चलता था। उनके घर में पत्नी, दो बच्चे और पिता हैं। पांच लोगों के परिवार का भरण-पोषण अब उनके सामने बड़ी चुनौती बन गया है।

कांग्रेस के प्रदेश महासचिव विश्वविजय सिंह ने बताया कि उनके एक परिचित ने यहां रहने वाले कामगारों के सामने आ रहे विकट संकट के बारे में बताया तो उन्होंने इसकी जानकारी कमिश्नर और डीएम को दी। वहां से उन्हें बताया गया कि इन लोगों के राशन कार्ड पर राशन दिया जाएगा। श्री सिंह ने कहा कि आज दोपहर वहां अधिकारी गए थे और उन्होंने एक अप्रैल से राशन बंटवाने का आश्वासन दिया है लेकिन यह कार्रवाई अपर्याप्त है। यहां रहने वाले सभी कामगारों को तत्काल राशन उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक सहायता देनी चाहिए ताकि उन्हें भूखों मरने की नौबत नहीं आए।

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