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कोशी नव निर्माण मंच ने बिहार के सीएम को पत्र लिखा-मक्का की सरकारी खरीद तत्काल शुरू हो

पटना। कोशी नव निर्माण मंच ने बिहार के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मक्के की सरकारी खरीद तत्काल शुरू करने और उसका भुगतान करन के लिए पत्र लिखा है।

मंच द्वारा लिखे पत्र में कहा गया है कि कोशी क्षेत्र में मक्के की खेती किसानों की जीवन रेखा है। मधेपुरा जिले में ही देखे तो रबी की फसल के क्षेत्रफल का लगभग 60 प्रतिशत से ऊपर भाग में मक्का की फसल तैयार है। ऐसा ही सुपौल, सहरसा, पूर्णिया खगड़िया,भागलपुर इत्यादि जिलों में भी है।

कोविड -19 के संकट के कारण हुए लॉक डाउन से इन मक्का किसानों पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है और ऊपर से मौसम की मार कहर बनकर आ पड़ती है। अभी हाल में आंधी-तूफान, ओला वृष्टि से फसल बर्बाद हुई है। उसके क्षति के भुगतान की घोषणा तो सरकार द्वारा हुई है परन्तु वह सभी तक नही पहुंचा है। क्षतिपूर्ति के लिए तय राशि भी लागत मूल्य से बहुत कम है।

मंच ने कहा कि मक्के का लागत मूल्य अन्य फसलों से बहुत ज्यादा है किसान इसके लिए, बैंक, अन्य क्रेडिट एजेंसियों, साहूकार से कर्ज लेकर खेती करते है। मक्के की फसल ससमय समुचित मूल्य पर बिकती है तो कर्ज अदायगी के साथ उनके जीवन की अनेक बुनिवादी जरूरते पूरी होती हैं नही तो वह कर्ज में डुबो देती है। अभी मक्के की कटाई के समय कभी-कभी होने वाली वर्षा या खराब मौसम से कहीं-कहीं मक्का सड़ भी गया है। मक्का के सुखाने की मशीन की व्यवस्था का भी अभाव है तो दूसरी तरफ भंडारण की कोई व्यवस्था नही है इसलिए जल्दबाजी में किसान को फसल बेचने की विवशता रहती है।

मंच ने पत्र में कहा है कि मक्का का बाजार मूल्य लॉक डाउन के कारण बहुत कम है। जो गैर संस्थागत व्यापारी आकर मक्का ले जाते थे वे लॉक डाउन के कारण नही आ रहे है। इसलिए तैयार मक्का खरीददार के अभाव में पड़ा है। ऊपर से नयी मार कोविड 19 के कारण अनेक किसानों के जो परिजन असंगठित क्षेत्र में प्रवासी मजदूर बनकर रोजगार में लगे थे वे भी घर लौट रहे है घरों में उनकी आय भी किसानों की सहारा बनती थी पर उल्टे उनकी परवरिश की जिम्मेवारी इन किसानों पर आ गयी है।
ऐसे में किसानों की मक्के की तैयार फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद समय पर करना और तत्काल भुगतान करना आवश्यक है।

मक्का बेचने के लिए किसान भटक रहे है पर कोई सरकारी खरीद करने को तैयार नहीं है। सुपौल, मधेपुरा के जिला सहकारिता पदाधिकारियों से बात की गयी तो वे बताए कि मक्के के खरीद का कोई आदेश ही सरकार की तरफ से नही आया है। ऐसी बदहाल स्थिति रही तो चैतरफा मार झेलने को विवश ये किसान भी अन्य राज्य के किसानों की भाँति आत्महत्या करने पर विवश होंगे।
कोशी नव निर्माण मंच ने यह पत्र बिहार के सहकारिता मंत्री, कृषि मंत्री, सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव, कृषि विभाग के प्रधान सचिव के अलावा मधेपुरा, सुपौल, पूर्णिया, खगड़िया, सहरसा और भागलपुर के जिला पदाधिकारी को भी भेजा हे।

पत्र पर कोशी नव निर्माण मंच के संदीप यादव, अनिल दास, चन्द्र किशोर यादव, बिजेन्द्र मण्डल, शिवनंदन मुखिया, त्रिलोक दास, अरुण जी, शम्भू कुमार, पीरबत पासवान, राजो दास रजनी, रमन जी, माधव साह, राजदीप, यशपाल, अजय, शिशुपाल, बिजेन्द्र यादव, रौशन गंगापुर, रतनकुमार, अनिल मास्टर, रघुनाथपुर, प्रभाष कुमार, कुलदीप, आभाष चन्द्र, विजय यादव, राजू भाई, दिलीप झा, अनिल मेहता, मंटू यादव, रविरंजन, अरविंद कुमार, रविन्द्र यादव, रूपेश कुमार, अजीत कुमार सिंह, जवाहर राम, प्रणव कुमार, प्रभाकर, राहुल कुमार, मिथिलेश यादव, अशोक सिंह, सत्यनारायण महतो, प्रकाश कुमार, चन्द्र भूषण, शरीफ आलम, असद रजा, मो जावेद, रविन्द्र कुमार, शन्ति रमण, कमल किशोर यादव के हस्ताक्षर हैं।

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