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डब्ल्यूएचओ के जोनल कोआर्डिनेटर ने कालाजार से बचाव के लिए छिड़काव कार्य का जाना हाल

देवरिया. जिले के छह विकास खण्डों के 29 कालाजार प्रभावित गांवों में कालाजार के वाहक बालू मक्खी से बचाव के लिए दवा का छिड़काव 18 मई से कराया जा रहा है. बुधवार को जिले के बैतालपुर, पथरदेवा, बनकटा, भाटपाररानी ब्लॉक में दवा छिड़काव कार्य का हाल डब्ल्यूएचओ के जोनल कोआर्डिनेटर डॉ सागर घोडेकर ने जाना.

छिड़काव अभियान में लगे सहायक मलेरिया अधिकारी सुधाकर मणि  ने बताया कि चिह्नित गांवों में छिड़काव व निरोधात्मक कार्य लगातार जारी है. वेक्टर जनित रोग नियंत्रण हेतु अल्फ़ा साईपर मेथरीन 5 % दवा का छिड़काव कराया जा रहा  है. कालाजार दवा छिड़काव के लिए 10 टीम बनी हैं , जिनमें  60 कर्मी लगाए गए हैं. अभियान में संबंधित क्षेत्र की आशा एवं एएनएम का भी सहयोग लिया जा रहा.

जिले के बनकटा, भाटपाररानी, पथरदेवा, बैतालपुर, भलुअनी और भटनी ब्लाक के 29 कालाजार प्रभावित गांवों में छिड़काव कार्य कराया जा रहा है. उन्होंने बताया बैतालपुर ब्लाक के गांवों में छिड़काव कार्य पूरा कर लिया गया है. डब्लूएचओ के जोनल कोआर्डिनेटर डॉ सागर घोडेकर ने बताया कि कालाजार रोग बालू मक्खी के काटने से होता है. बालू मक्खी को जड़ से समाप्त करने हेतु ही दवा का छिड़काव किया जा रहा है. बालू मक्खी जमीन से तीन से चार फीट की ऊंचाई तक उड़ सकती है. छिड़काव के बाद तीन माह तक घर में लिपाई-पुताई नहीं करनी चाहिए.

 इस  दौरान वीबीडी परामर्शदाता डॉ एसके पांडेय, सहायक मलेरिया अधिकारी सीपी मिश्रा, विचित्र मणि सहित अन्य लोग मौजूद रहे.

कालाजार

एसीएमओ वेक्टर वार्न डिजीज डॉ डीवी शाही ने बताया कि लोगों से अपील की गयी है कि बालू मक्खी से बचाव के लिए घर में छिड़काव करवाना चाहिए, जिससे मक्खियां मर जाएं. उन्होंने सोशल डिस्टेंशिंग का ध्यान रखते हुए छिड़काव कार्य करवाने का निर्देश दिया है. उन्होंने बताया कालाजार बालू मक्खी से फैलने वाली बीमारी है. यह मक्खी नमी वाले स्थानों पर अंधेरे में पाई जाती है. इसके काटने के बाद मरीज बीमार हो जाता है. उसे बुखार होता है और रुक-रुक कर बुखार चढ़ता-उतरता है. लक्षण दिखने पर मरीज को चिकित्सक को दिखाना चाहिए. इस बीमारी में मरीज का पेट फूल जाता है. भूख कम लगती है, शरीर काला पड़ जाता है.

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