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कुशीनगर में कालाजार से प्रभावित हैं 48 गाँव, इस वर्ष छह महीने में मिले नौ केस

छिड़काव का जायजा लेते जिला मलेरिया अधिकारी एसएन पांडेय और डब्लूएचईओ के जोनल को आर्डिनेटर डाँ सागर घोडेकर

 

कुशीनगर.  जिला की करीब एक लाख की आबादी को कालाजार से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग जुट गया है। इसके लिए सात ब्लाकों के 48 गाँवों में पिछले माह से ही छिड़काव शुरू कर दिया गया है।

कुशीनगर के सात ब्लाकों के प्रभावित गाँवों में कालाजार के मरीज मिले थे, इन प्रभावित गांवों में तरयासुजान ब्लाक के 23, तमकूही के 5, दुदही के 6, कसया व विशुनपुरा के 2-2, कुबेर स्थान के 9 तथा फाजिल नगर के एक गांव के नाम शामिल हैं।

इन सभी प्रभावित गांवों में कालाजार के वाहक बालू मक्खी से बचाव के लिए दवा का छिड़काव पिछले माह से ही कराया जा रहा है।

छिड़काव अभियान में लगे जिला मलेरिया अधिकारी एसएन पांडेय ने बताया कि चिह्नित गांवों में छिड़काव व निरोधात्मक कार्य लगातार जारी है. वेक्टर जनित रोग नियंत्रण हेतु अल्फ़ा साईपर मेथरीन 5 % दवा का छिड़काव कराया जा रहा  है।

कालाजार के लक्षण
-मरीज पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर न होना।
-मरीज को भूख न लगना।
-मरीज का लीवर व तिल्ली बढ़ जाना।
-मरीज के शरीर में खून की कमी होना।
मरीज का वजन कम हो जाना।
-त्वचा का रंग काला हो जाना।

छिड़काव में लगी नौ टीमें

जिला मलेरिया अधिकारी एसएन पांडेय ने बताया कि कालाजार दवा छिड़काव के लिए नौ टीम बनी हैं , जिनमें 54 कर्मी लगाए गए हैं. अभियान में संबंधित क्षेत्र की आशा एवं एएनएम का भी सहयोग लिया जा रहा।

जिला मलेरिया अधिकारी श्री पांडेय ने बताया कि कालाजार से बचाव के लिए घरों, शौचालयों तथा गोशाला में भी छिड़काव कराया जा रहा है, छिड़काव करीब 6 फीट की ऊंचाई तक कराया जा रहा है। कच्चे घरों, अंधेरे व नमी वाले स्थानों पर विशेष तौर पर छिड़काव कराया जा रहा है। इस कार्य विश्व स्वास्थ्य संगठन के जोनल को-आर्डिनेटर डाँ सागर घोडेकर का विशेष सहयोग मिल रहा है। इनके द्वारा निरंतर छिड़काव कार्य का जायजा भी लिया जा रहा है।

क्या है कालाजार

कालाजार रोग जन स्वास्थ्य की एक गंभीर समस्या है। यह रोग एक मनुष्य से दूसरे मनुष्य तक मादा बालू मक्खी के काटने से फैलता है। बालू मक्खी प्रायः घरों के सीलन युक्त अंधेरे स्थानों,दीवारों की दरारों, छेदों, गोबर की ढेरों में पाई जाती हैं। विशेष कर गोबर की ढेरों में अंडे देती है। जो समयानुसार बढ़ कर बालू मक्खी बन जाते हैं। बालू मक्खी का भोजन रक्त होता है। यह रोग समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग में ज्यादा है। कुशीनगर नगर में मुसहर समुदाय के लोग इस रोग की चपेट में अपेक्षाकृत ज्यादा पाया जाता है।

 

कब -कब मिले कालाजार के कितने मरीज

वर्ष 2015 मे 108
वर्ष 2016 में 78
वर्ष 2017 में 61
वर्ष 2018 में 47
वर्ष 2019 में 32
वर्ष 2020 में 9 मरीज(जून माह तक)

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