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गृह जिले से 100 से 800 किमी दूर ड्यूटी करने पर मजबूर हैं दो हजार संविदा एएनएम

संविदा एएनएम (फाइल फोटो )

हाथरस की एएनएम बंदायू में, बागपत की बलरामपुर और बांदा की एएनएम को महराजगंज जिले में किया गया है तैनात, महज 11 से 13 हजार रूपया मिलता है मानदेय

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में करीब दो हजार संविदा एएनएम ऐसी हैं जो अपने गृह जनपद से 100 से 800 किलोमीटर दूर तक तैनात है। सिर्फ दस हजार रूपए मानदेय पर काम करने वाली इन संविदा एएनएम को अपनी ड्यूटी करने के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने में विकट मुश्किलांे का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना काल में भी महिला एएनएम को घर-परिवार से काफी दूर के इलाकों में कोविड मरीजों का सर्वे करने का काम करना पड़ा है। इस दौरान गर्भवती महिलाओं व बच्चों के टीकाकरण का कार्य भी उन्होंने मुस्तैदी से किया लेकिन उनकी सुख-सुविधाओं का ख्याल सरकार को नहीं आया। उनकी मांगों को सरकार लगातार अनसुनी कर रही है। यही नहीं जुलाई 2020 से संविदा एएनएम के स्थानान्तरण पर रोक लगा रखी है।

उत्तर प्रदेश में एनएचएम के तहत संविदा पर 16 हजार एएनएम आक्सीलरी नर्स मिडवाइफ कार्यरत हैं। इन्हें करीब 11 हजार से 13 हजार रूपए मानदेय मिलता है। इन्हें अपने तैनाती स्थल के गांवों में गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण, बच्चों का टीकाकरण का कार्य करना पड़ता है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की सभी योजनाओं के प्रचार-प्रसार की भी इन पर जिम्मेदारी होती है। इंसेफेलाइटिस, टीबी उन्मूलन सहित कई अभियानों में इनकी प्रमुख भूमिका है।

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कोविड महामारी के समय इनको बिना कोई अतिरिक्त सुविधाएं दिए प्रवासी मजदूरों के सर्वे के साथ-साथ कोविड मरीजों को चिन्हित करने, जागरूकता अभियान संचालित किए जाने का काम लिया गया।

संविदा एएनएम को सीएचसी-पीएचसी पर तैनात किया जाता है और उन्हें सीएचसी-पीएचसी से जुड़े गांवों में जाकर स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रमों को संचालित करती हैं।
संविदा एएनएम की वर्षों पुरानी मांग है कि उन्हें नियमित पदों पर समायोजित किया जाय और समायोजन होने तक उन्हें 25 हजार रूपए मानदेय दिया जाय। नियमित एएनएम को 35 हजार से 60 हजार रूपए वेतन मिलता है। इसके अलावा एएनएम चाइल्ड केयर लीव, दूर-दराज के गांवों में आने-जाने के लिए स्कूटी देने, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री आवास योजना में एएनएम को शामिल करने की भी मांग कर रही है।

उनकी सबसे बड़ी मांग है कि दो हजार संविदा एएनएम को उनके गृह जनपद में तैनात किया जाय। हालत यह है कि बागपत जिले की रहने वाली एएनएम को बलरामपुर जिले में तैनात किया गया है तो अम्बेडकर नगर जनपद की एएनएम को सोनभद्र के चोपन में तैनात कर दिया गया है। घर से काफी दूर तैनाती की वजह से उन्हें ड्यूटी करने में काफी कठिनाई होती है लेकिन उन्हें कोई सुनने वाला नहीं है।

हाथरस जिले की रहने वाली संविदा एएनएम रीना को बंदायू जिले में तैनात कर दिया गया है। वह एक वर्ष से अधिक समय से अपने जिले से काफी दूर ड्यूटी कर रही हैं। इसी तरह बागपत जिले की रहने वाली ममता को बलरामपुर जिले के तुलसीपुर में तैनात किया गया है जबकि बांदा जिले की विद्या देवी को महराजगंज जिले के मिठौरा में तैनात किया गया है। इन सभी एएनएम ने गृह जनपद स्थानान्तरण के लिए आवेदन कर रखा है लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

गृह जनपद से दूर तैनात संविदा एएनएम को रहने के लिए किराए का मकान लेना पड़ता है। कम वेतन में उनके के लिए किराए का मकान का खर्च उठाना बेहद भारी पड़ता है। इसके अलावा उनको अपने बच्चों की देखरेख में भी भारी कठिनाई होती है।

 

एएनएम संविदा संघ ने 21 दिसम्बर को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गृह जनपद से दूर तैनात दो हजार संविदा एएनएम को उनके गृह जनपद में स्थानान्तरण करने की मांग की है। संघ की अध्यक्ष प्रेमलता पांडेय ने कहा कि संघ की ओर से सांसदों, विधायकों को ज्ञापन देकर सरकार पर इस मांग को पूरा करने का दबाव बनाने का आग्रह किया जा रहा है। तीन जनवरी को पूरे प्रदेश में संविदा एएनएम अपने-अपने जिलों में सांसद, विधायक और मंत्री को ज्ञापन देंगी।

उन्होंने बताया कि हमने मुख्यमंत्री केा 12 सूत्री मांग पत्र भेजा है जिसमें संविदा एएनएम की गृह जनपद में तैनाती और नियमित पदों पर समायोजन को को सबसे प्रमुख मुद्दा बनाया है। प्रेमलता पांडेय ने मुख्यमंत्री को अलग से एक ईमेल लिखकर 19 संविदा एनएनएम की सूची भेजी है जिन्होंने अपने गृह जनपद में ट्रांसफर के लिए आवेदन किया हुआ है।

एएनएम संविदा संघ की मांग का समर्थन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मी संघ और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कम्युनिटी प्रोसेस संविदा कर्मचारी संघ ने किया है और मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।

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