जनपद

लंगर व दुआ के साथ उर्स-ए-पाक का समापन

गोरखपुर।अंधियारीबाग स्थित ख़ानक़ाह मिस्कीनिया पर हज़रत मिस्कीन शाह रहमतुल्लाह अलैह के 81वें उर्स-ए-पाक के अंतिम दिन शनिवार को कोलकाता के हज़रत सैयद निहाल अहमद शाह अलैहिर्रहमां के यहां से आयी चादर मजार पर पेश की गई। सैकड़ों अकीदतमंदों ने मिलकर लंगर खाया। कुल शरीफ की रस्म व महफिले समा हुई। फातिहा ख्वानी व दुआ ख्वानी के साथ उर्स-ए-पाक का समापन हुआ।

अकीदतमंदों को संबोधित करते हुए ख़ानक़ाहे मिस्कीनिया कमेटी के सदर मोहम्मद फर्रुख जमाल व सचिव खादिम फिरोज अहमद निहाली ने कहा कि हज़रत मिस्कीन शाह ने गोरखपुर वालों को एक-दूसरे के प्रति आपसी मोहब्बत का पैगाम दिया है। उनके बताए राह को अपनाने से दोनों जहां की कामयाबी हासिल होगी। लोगों में सबसे पहले पढ़ने व लिखने के प्रति झुकाव जरूरी है। उर्दू भाषा ने राष्ट्र निर्माण में अहम योगदान दिया है। उर्दू की तरक्की में सभी को भरपूर मदद करनी चाहिए।

उर्स में शम्स तबरेज निहाली, अली अख्तर शाह, मौलाना अली अहमद, जियाउल इस्लाम, कारी मुख्तार, अकील अहमद, वकील अहमद, शकील अहमद, शाहरुख खान, मुस्तकीम, गोलू, ज़ैद, अदनान, शाकिर अली सलमानी, सैयद इरशाद अहमद, अबू नसर सिद्दीकी, मो. अनीस, अली गजनफर शाह, मो. अख्तर, ख्वाजा शमसुद्दीन आदि मौजूद रहे।

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