साहित्य - संस्कृति

सांस्कृतिक संध्या में सुर, संगीत और नाटक के जरिए बराबरी और प्रेम का समाज बनाने का संदेश

गोरखपुर। बुद्ध, गोरखनाथ, कबीर के विचार और शिक्षा को समाज में प्रचारित-प्रसारित करने और समाज में प्रेम, सद्भाव, शांति को फैलाने के उद्देश्य से मंगलवार से शुरू हुई पांच दिवसीय बुद्ध से कबीर तक यात्रा शाम को प्रेमचंद पार्क पहुंची। यात्रियों का प्रेमचंद पार्क में स्वागत किया गया। इस मौके पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या-ढाई आखर प्रेम का में दो नाटक मंचित किए गए और लोक गीत, जनगीत, भजन गायन हुआ। कवि सुरेश चन्द ने बांसुरी वादन से पूरे कार्यक्रम को सुरमयी बना दिया।

प्रेमचंद साहित्य संस्थान, अलख कला समूह द्वारा बुद्ध से कबीर तक टस्ट के सहयोग से आयोजित सांस्कृतिक संध्या का प्रारम्भ प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण और प्रेमचंद साहित्य संस्थान की त्रैमासिक पत्रिका साखी के गुरू गोरखनाथ पर केन्द्रित विशेष अंक के विमोचन से हुई। पत्रिका का विमोचन बुद्ध से कबीर तक ट्रस्ट के मुख्य संरक्षक एवं गुजरात के डीजीपी डा. विनोद मल्ल, गुजरात की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनुराधा मल्ल, प्रो राजेश मल्ल, एडीम वित्त एवं राजस्व राजेश कुमार सिंह, वरिष्ठ पत्रकार अशोक चौधरी ने किया।

इस मौके पर अपने सम्बोधन में डा. विनोद मल्ल ने कहा कि भारत बहुधार्मिक, बहुभाषिक, बहुसांस्कृतिक देश है। इसकी विविधिता ही इस देश का खूबसूरत बनाती है। बुद्ध से लेकर कबीर तक और उसके बाद गांधी, अम्बेडकर, प्रेमंचद ने अपने विचारों-लेखन ने देश की बहुलवादी संस्कृति को मजबूत करने का कार्य किया। आज जब वैमनस्य, नफरत और कट्टरता को कुछ ताकतें हवा दे रही हैं, हमें बुद्ध, गुरू गोरखनाथ, कबीर, रैदास, गांधी, अम्बेडकर, प्रेमचंद को याद करने और उनके विचारों-शिक्षाओं को समाज में गहनता के साथ ले जाने की जरूरत है। बुद्ध से कबीर तक यात्रा यही कार्य कर रहा है।

डा. मल्ल के सम्बोधन के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हुआ। सबसे पहले कवि सुरेश चन्द ने बांसुरी वादन प्रस्तुत किया। उन्होंने ‘ बारहमासा ‘और ‘ सारी जिनगी गुलामी में सिरान पिया ‘ गीत को बांसुरी के धुन में पिरोया।

बाँसुरी वादन के बाद अलख कला समूह के जे एन शाह और उनके साथियों ने लोक गीत गाए। सबसे पहले उन्होंने कबीर की रचना ‘ मन लागो यार फकीरी में ‘ प्रस्तुत किया। इसके बाद उन्होंने किसान गीत ‘ चांदी के रुपइया लुटावे असमनवा, भोर की किरनवा सोनवा ‘ गाया।

बुद्ध से कबीर तक की यात्रा का थीम सांग वीडियो प्रोजेक्ट पर दिखाया गया जिसे बीएसकेटी बैंड ने तैयार किया था।

इसके बाद अलख कला समूह के कलाकारों ने वरिष्ठ रंगकर्मी राजाराम चौधरी द्वारा लिखित नाटक ‘ अभी वही है निजामे कोहना- 3 का मंचन किया। इस नाटक ने कोरोना महामारी में प्रवासी मजदूरों के पलायन और शहर से गांव तक उनके उत्पीड़न, भेदभाव को मार्मिक तरीके से दर्शकों के सामने रखा। नाटक के अंत में शासन सत्ता की क्रूरता और दमन के खिलाफ किसान -मजदूर उठ खड़े होते हैं।

नाटक में धनिया की भूमिका अनन्या, होरी की निखिल वर्मा, गब्बर सिंह की रजत, माखन की राम दयाल गौड़, लाखन की अनीस वारसी, शायर की प्रदीप कुमार विक्रांत , सिपाही की प्रियेश पांडेय, नेता की राकेश कुमार ने अभिनीत की। कोरस में नेहा थीं। रूप सज्जा एवं मंच परिकल्पना देश बंधु की थी।

 

सांस्कृतिक संध्या के आखिर में प्रेरणा कला मंच के कलाकारों ने प्रेमचंद की कहानी ‘ मुक्ति धन ‘ पर आधारित नाटक ‘ दुनिया का मेला ’ प्रस्तुत किया। इस प्रभावकारी नाटक में किसान रहमान के जीवन संघर्ष को दिखाया गया है। किसान की इमानदारी, सरलता से प्रभावित होकर उसके कष्टों से लाला दादू दयाल बदल जाते हैं और वे न सिर्फ उसका सारा कर्ज माफ कर देते हैं बल्कि उससे खरीदी गाय लक्ष्मीनिया को भी लौटा देते हैं। प्रेरणा कला मंच के कलाकारों ने इस नाटक से दर्शकों के दिल पर अमिट छाप छोड़ा।

कार्यक्रम का संचालन प्रेमचंद साहित्य संस्थान के सचिव मनोज कुमार सिंह ने किया।  इस मौके पर एस ए रहमान, राजेश सिंह, अब्दुल्लाह सिराज, असिम रउफ, विजय कुमार श्रीवास्तव, आलोक शुक्ल, चतुरानन ओझा, जर्नादन शाही, राजेश साहनी, रामकिशोर वर्मा, अशोक चौधरी, मनीष चौबे, सुजीत श्रीवास्तव, बैजनाथ मिश्र, देवयानी, आनंद पाण्डेय, कलीमुल हक, सुनील दत्ता  सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

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गोरखपुर न्यूज़ लाइन

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