साहित्य - संस्कृति

‘‘कुल्लियात-ए-वफ़ा गोरखपुरी’’ हिन्दुस्तानी सभ्यता का दर्पण है : डा0 अज़ीज़ अहमद

गोरखपुर। राही आर्ट एण्ड कल्चर फाउण्डेशन के तत्वावधान में राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित रचनाकार, शिक्षाविद् टी एन श्रीवास्तव ‘वफ़ा गोरखपुर’ की समग्र रचनाओं का संग्रह ‘‘कुल्लियात-ए-वफ़ा’’ का लोकार्पण रविवार को होटल प्रगति इन में हुआ।

नगर के प्रतिष्ठित चिकित्सक एवं समाजसेवी डा. अज़ीज़ अहमद ने इस मौके पर कहा कि गोरखपुर की काव्य रचना की परम्परा ग़ालिब के जमाने से रही है। मुंशी माधवराम और अहमद शाह की रचनाएं उसका प्रमाण हैं। यहाँ कायस्थ शायरों की बड़ी तादाद रही है, उन्हीं में से ‘वफ़ा गोरखपुरी’ का भी नाम आता है। विगत वर्षों में वफ़ा साहब की रचनाओं को डा0 अशफ़ाक़ अहमद उमर ने सम्र (कुल्लियात) का रूप दिया है, उसकी रचनाएँ भारतीय सभयता का दर्पण हैं। मैं इस बड़े काम के लिए उन्हें साधुवाद देता हूँ।

मुख्य अतिथि पूर्व मेयर डा. सत्या पाण्डेय ने कहा कि राही आर्ट एण्ड कल्चर फाउण्डेशन की सचिव मेरी बहन शायरा नुसरत अतीक़ को साधुवाद दूँगी कि उन्होंने गोरखपुर की धरोहर का संजोये रखने की परम्परा का निर्वहन किया है। वफ़ा साहब सच्चे रचनाकार है। वो राष्ट्रीय एकता के प्रतीक हैं वो फ़िराक़ साहब की तरह अंग्रेज़ी के अध्यापक रहे और उर्दू-हिन्दी के रचनाकार के रूप में देश में ख्याति पाई। मैं उन्हें इस विशेष कार्य के लिए साधुवाद देती हूँ।

अध्यक्षता कर रहे दी.द.उ. गो.वि.वि. गोरखपुर के हिन्दी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. आर. डी. राय ने कहा कि गोरखपुर की माटी सुनामधन्य है जहाँ ऐसे-ऐसे रचनाकार आज भी हैं। वफ़ा गोरखपुरी ने भारतीय ग़ज़ल परम्परा का इतना सच्चा निर्वहन किया है कि पूरी एक पीढ़ी को निरोत्तर कर दिया। रचना वही होती है जो समाज को दर्पण दिखाए। कुल्ल्यित-ए-वफ़ा में सभी कुछ है।

राही आर्ट एण्ड कल्चर फाउण्डेशन के अध्यक्ष डा. कलीम क़ैसर ने कहा कि वफ़ा गोरखपुरी की रचनाएँ चुम्बक की तरह हैं जो आसानी से सबको अपनी ओर आकर्षित कर लेती हैं। कुल्लियात-ए-वफ़ा की काव्य धर्मिता में भाषाई सरलता बड़ी चीज़ है। मैं इसके लोकार्पण पर उन्हें अशेष बधाई देता हूँ।

राही फाउण्डेशन की सचिव सुविख्यात शायरा श्रीमती नुसरत अतीक़ गोरखपुरी ने कहा कि मैंने अपने बड़ों की रचनाओं को एकत्रित करने की कोशिश की है। प्रति वर्ष इस तरह का आयोजन कर एम. कोठियावी राही सम्मान का निर्वहन करूँगी, जिसकी पहली कड़ी वफ़ा गोरखपुरी जी हैं।

प्रथम एम. कोठियावी एवार्ड पाने वाले रचनाकार डा. अफ़रोज़ आलम ने कहा कि मेरी कोशिश है कि वफ़ा गोरखपुरी पर किसी विश्वविद्यालय से शोध करवाऊँ।

इस अवसर पर डा. अफ़रोज़ आलम को एम. कोठियावी राही सम्मान 2021और प्रतिष्ठित समाज सेवी श्रीमती प्रगति श्रीवास्तव को उनकी विस्तृत सामाजिक सेवाओं के लिए माँ टेरेसा सम्मान से सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर मो0 कामिल ख़ाँ, सरदार जसपाल सिंह, प्रवीण श्रीवास्व, रवीन्द्र मोहन त्रिपाठी, डा. विनोद श्रीवास्तव, अरशद जमाल सामानी, अरशद अहमद, डा. मुस्तफ़ा ख़ाँ, रीता त्रिपाठी, परवेज़ काज़मी, अरशद राही, शैवाल शंकर, डा. तारिक, राजीवदत्त पाण्डेय, विद्यानन्द, अशफ़ाक़ मेकरानी आदि उपस्थित थे।

कार्यक्रम का संचालन राही फाउण्डेशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ शायर डा. कलीम क़ैसर ने किया एवं सांस्कृतिक सचिव डा. अमरनाथ जायसवाल ने आये हुए अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कवि सम्मेलन/मुशायरा

इस मौके पर एक कवि सम्मेलन/मुशायरा भी आयोजन किया गया, जिसमें आगंतुक कवियों/शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

( 1 )

मंज़िल पे जा के लोग हमें भूल ही गये, हम रास्ता बता के बहुत सोचते रहे – ‘वफ़ा’ गोरखपुरी

( 2 )

अजब फ़िजाओं का रूख़ हुआ है, ज़मीं की चादर सरक चुकी है,
क़दम जहाँ पे मैं रख रहा हूँ, वहीं से लावा निकल रहा है – डा0 फ़रोज़ आलम

( 3 )

सदियों से चल रही है फ़ना और बक़ा की जंग,
पीपल निकल रहा है मेरी छत को तोड़ कर – डा0 संजय मिश्रा ‘शौक़’’

( 4 )

ये सियासत की तालीम है, आम कहिये, भले नीम है,
काटिये, सींचिये, काटिये, आदमी आज बरसीम है -‌ डा0 ज्ञानेन्द्र द्विवेदी दीपक

( 5 )

कम अज़ कम सर तो अपना तोड़ सकता,
तेरी तस्वीर अगर पत्थर की होती – डा0 लोकेश शुक्ल

( 6 )

मुझको आता है ज़माने के हर इक ग़म का इलाज,
ज़ख़्म को फूल बनाने के लिए काफ़ी हूँ – डा0 नीलिमा मिश्रा

( 7 )

किसी पे जान देना बहुत आसान है ‘तारिक़’
पता चल जायेगा तुमको भी कि मरने का मज़ा क्या है – डा. तारिक़ अनवर

( 8 )

इश्क़ के बीज को डाल दिया है मिट्टी में
उपजा तो वो मेरा वरना मिट्टी का – वैष्णवी सिकरवार

( 9 )

जो अना बेच के बैठे हैं यहाँ ऐ ‘नुसरत’
बात करते हैं हमेशा वही ख़ुद्दारी की – नुसरत अतीक़ गोरखपुरी

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गोरखपुर न्यूज़ लाइन

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