Saturday, August 13, 2022
Homeसमाचार48 घंटे में मेडिकल कालेज में 18 वयस्कों की मौत को छुपा...

48 घंटे में मेडिकल कालेज में 18 वयस्कों की मौत को छुपा गया प्रशासन

गोरखपुर, 12 अगस्त। बीआरडी मेडिकल कालेज में तीन दर्जन बच्चों की मौत तो हुई ही 24 घंटे में 10 वयस्कों की भी मौत हो गई। वयस्क मरीजों की मौत साबित करती हैं कि आक्सीजन सप्लाई की कमी ही इन मौतों के लिए जिम्मेदार है। प्रशासन द्वारा कही गई बातों और आंकड़ों में भारी फर्क है जिससे यह आशंका हो रही है कि मौतों को छुपाने का काम किया गया है।
गोरखपुर के डीएम राजीव रौतेला ने 11 अगस्त की रात आठ बजे प्रेस ब्रीफींग में नौ अगस्त को 12 बजे रात से 11 अगस्त की रात सात बजे तक 30 बच्चों की मौत को स्वीकार किया। इसमें 17 नवजात शिशुओं, आठ जनरल पीडिया के मरीजों और पांच इंफेलाइटिस से ग्रस्त मरीजों की मौत की बात स्वीकार की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आक्सीजन की कमी से एक भी मरीज की मौत नहीं हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि बीआरडी मेडिकल कालेज बड़ा अस्पताल है और यहां बड़ी संख्या में बच्चे भर्ती होते हैं। एईएस यानि कि एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम से औसतन दस तथा नवजात शिशुओं की भी इतनी ही संख्या में मौत हो जाती है।
लेकिन बीआरडी मेडिकल कालेज के इस वर्ष के आंकड़े डीएम के दावे को झूठलाते हैं। इंसेफेलाइटिस से इस वर्ष 24 घंटे में अधिकतम मौत 5 है। इसी तरह नियोनेटल वार्ड में औसतन एक दिन की मौत पांच ही है। इस तरह से एक दिन में अधिकतम 10 से 15 के बीच ही मौतें हैं यदि अन्य बीमारियों से बच्चों की मौत का आंकड़ा भी जोड़ दिया जाए लेकिन यहां तो बकौल डीएम नौ तारीख की रात 12 बजे से 11 अगस्त की शाम सात बजे तक यानि 43 घंटों में 30 बच्चों की मौत हो गई। यही नहीं 18 वयस्को की भी मौत हो गई जिसका जिक्र ही नहीं किया गया। वार्ड संख्या 14 जो कि मेडिसीन विभाग के अन्तर्गत आता है, उसमें 10 अगस्त को 8 और 11 अगस्त को 10 लोगों की मौत हो गई। जिन लोगों की मौत हुई उनमें गोरखपुर के उमाशंकर, महराजगंज के रामकरन, गोरखपुर के रामनरेश, कुशीनगर के हीरालाल, देवरिया के अजय कमार, देवरिया की संकेशा, पूरन यादव, घनश्याम, इन्दू सिंह, विजय बहादुर आदि हैं।
खुद स्वास्थ्य विभाग ने जो आंकड़ा तैयार किया उसके अनुसार 10 और 11 अगस्त को एनआईसीयू यानि नियोनेटल इंटेसिव केयूर यूनिट में क्रमशः 14 और 3, इंसेफेलाइटिस से 3 और 2 तथा नान एईएस से 6 और 2 बच्चों की मौत हो गई। यानि 10 अगस्त को 23 और 11 अगस्त को 7 बच्चों की मौत हो गई। यहां हैरानी की बात यह है कि मीडिया ने जब मेडिकल कालेज प्रशासन ने 10 अगस्त को एईएस यानि कि इंसेफेलाइटिस से मौतों की जानकारी मांगी थी तो एक भी मौत न होने की बात कही गई थी। अब 10 अगस्त को इंसेफेलाइटिस से 3 मौतों की जानकारी दी जा रही है। यह आंकड़े ही तस्दीक करते हैं कि प्रशासन ने पिछले 24 घंटे में अत्यधिक मौतों को छुपाने के लिए उन्हें 48 घंटे में बांट दिया और सर्वाधिक मौतें 10 अगस्त में दर्ज कर लीं जब लिक्विड इंसेफेलाइटिस की आपूर्ति हो रही थी।
सचाई यह है कि 10 अगस्त की रात से 11 अगस्त की शाम तक ही सर्वाधिक मौतें हुई जब लिक्विड आक्सीजन की सप्लाई ठप हो गई थी।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments