Friday, August 19, 2022
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गोरखपुर-बस्ती मंडल की 41 सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं 51 मुस्लिम उम्मीदवार

गोरखपुर। गोरखपुर-बस्ती मंडल की 41 विधानसभा सीटों पर 3 मार्च को मतदान होना है। दोनों मंडल में 51 मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे हैं जिनमें से आधा दर्जन सीटों पर कड़ी टक्कर भी दे रहे हैं।

सपा ने रामपुर कारखाना से गजाला लारी व डुमरियागंज से सैयदा खातून, बसपा ने खलीलाबाद से आफताब आलम, मेंहदावल से मोहम्मद ताबिश खान, फाजिलनगर से इलियास अंसारी, खड्डा से डॉ. निसार अहमद सिद्दीकी, गोरखपुर शहर से ख़्वाजा शमसुद्दीन, कप्तानगंज से जहीर अहमद, पथरदेवा से परवेज आलम, कांग्रेस ने रामपुर कारखाना से शहला अहरहरी, पथरदेवा से अंबर जहां, पडरौना से मोहम्मद जहीरुद्दीन, मेंहदावल से रफीका खातून, इटवा से अरशद खुर्शीद को चुनाव मैदान में उतारा है। एआईएमआईएम, पीस पार्टी और आप सहित 37 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में हैं।

खलीलाबाद से पीस पार्टी के डॉ. मो. अयूब, बसपा के आफताब आलम सपा, भाजपा व कांग्रेस उम्मीदवार को टक्कर दे रहे हैं। मो. अयूब को एआईएमआईएम और आजाद समाज पार्टी  का समर्थन मिला है। यहां मुस्लिम वोटर निर्णायक की भूमिका में हैं। रामपुर कारखाना से सपा की गजाला लारी, डुमरियागंज से सपा की सैयदा खातून, मेंंहदावल से बसपा के मो. ताबिश खान, फाजिलनगर विस से बसपा के इलियास, खड्डा से बसपा के डॉ. निसार अहमद, इटवा से कांग्रेस के अरशद खुर्शीद आदि भी मुकाबले में हैं।

गोरखपुर-बस्ती मंडल में लाखों बुनकर, मीट कारोबार व उससे जुड़े कारोबारी, मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक कई सालों से रोजी रोटी के संकट से जुझ रहे हैं। उनका मानना है कि वर्तमान केंद्र व राज्य सरकार ने मुसलमानों में सिर्फ निराशा व भय का वातावरण दिया है। उप्र की सियासत में मुसलमानों की अहम भूमिका रही है। ज्यादातर सीटों पर सपा, बसपा, कांग्रेस अन्य वोटरों के साथ मुस्लिम वोटों पर ही निर्भर रहते हैं जबकि भाजपा की कोशिश रहती है कि मुस्लिम वोट बंटे।

गोरखपुर-बस्ती मंडल के सात जिलों की 41 सीटों में से 13 सीटों पर मुस्लिम वोटरों का खास प्रभाव है। सभी पार्टियों की निगाहें खलीलाबाद, डुमरियागंज, शोहरतगढ़, मेंहदावल, इटवा, मेंहदावल, गोरखपुर ग्रामीण, पिपराइच, फाजिलनगर, कुशीनगर, पडरौना, बांसी, पथरदेवा, रामपुर कारखाना, पनियरा आदि मुस्लिम बाहुल्य इलाकों पर लगी हुई हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र की शोहरतगढ़, इटवा व डुमरियागंज विस सीट से बसपा के तीन मुस्लिम उम्मीदवार बहुत कम वोटों के अंतर से हार गए थे। यहां मुस्लिम वोट पाने की सपा-बसपा-कांग्रेस-एआईएमआईएम-पीस पार्टी में होड़ है।

पिछले विधानसभा चुनाव में देवरिया जिले की रामपुर कारखाना विस सीट से सपा की गजाला लारी 9,987 वोट से हार कर जीत की हैट्रिक लगाने से चूक गयीं थीं।  पथरदेवा सीट से सपा के शाकिर अली 42,997 वोट से हार कर दूसरे स्थान पर रहे थे। कुशीनगर जिले की पडरौना सीट से बसपा के जावेद इकबाल 40,532 वोट से हार कर दूसरे स्थान पर रहे थे। गोरखपुर जिले की पिपराइच सीट से बसपा के आफताब आलम ‘गुड्डू’  12,809 वोट से चुनाव हार गए थे।

संतकबीरनगर जिले की खलीलाबाद विस सीट से बसपा के मशहूर आलम चौधरी 16,037 वोट से चुनाव हारे थे। सिद्धार्थनगर जिले की डुमरियागंज विस सीट से बसपा की सैयदा खातून मात्र 171 वोट से चुनाव हार गयीं थीं। यहां का परिणाम सबसे ज्यादा चौंकाने वाला था। इटवा से बसपा के अरशद खुर्शीद 10,208 वोट से हार गए थे। शोहरतगढ़ से बसपा के मो. जमील 22,124 वोट से हारे थे।

उप्र विधानसभा का चुनावी इतिहास बताता है कि दोनों मंडलों में कभी 4 से अधिक मुस्लिम उम्मीदवार विधायक नहीं बन पाए हैं। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में डुमरियागंज से बसपा के तौफीक अहमद, मेंहदावल से सपा के अबुल कलाम व सलेमपुर से सपा की गजाला लारी चुनाव जीतने में कामयाब हुई थीं। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में डुमरियागंज से पीस पार्टी के मलिक कमाल युसुफ, खलीलाबाद से पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मो. अयूब, देवरिया के पथरदेवा से सपा के शाकिर अली व रामपुर कारखाना से सपा की गजाला लारी ने जीत हासिल की थी।

गोरखपुर-बस्ती मंडल की 9 लोकसभा सीटों पर आज़ादी के बाद से सिर्फ तीन मुस्लिम उम्मीदवार (डुमरियागंज व महराजगंज लोकसभा सीट) सांसद बनने में कामयाब हुए हैं। दोनों मंडल की 7 सीट (गोरखपुर, संतकबीरनगर, बस्ती, सलेमपुर, कुशीनगर, देवरिया, बांसगांव) पर आज़ादी के बाद से मुस्लिम उम्मीदवार का खाता तक नहीं खुला है। बांसगांव सुरक्षित सीट को छोड़कर तकरीबन हर लोकसभा में मुस्लिम उम्मीदवार खड़े तो जरूर होते हैं लेकिन जनता का वोट पाने में नाकाम रहते हैं।

महराजगंज लोकसभा सीट पर वर्ष 1980 में अशफाक हुसैन अंसारी कांग्रेस (आई) के टिकट पर चुनाव जीते थे। मुस्लिम वोटरों की अधिकता वाली डुमरियागंज लोकसभा सीट पर वर्ष 1980 व 1984 में काजी जलील अब्बासी कांग्रेस के टिकट पर तो वर्ष 2004 में मो. मुकीम बसपा के टिकट पर चुनाव जीतने में कामयाब हुए थे।

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