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भारत-नेपाल सीमा के 37 गाँवों में मानव तस्करी के विरुद्ध शुरु हुआ जागरूकता अभियान 

बहराइच। उत्तर प्रदेश व महाराष्ट्र राज्यों के अति पिछड़े जिलों में विगत दो दशकों से बाल अधिकारों के लिए कार्यरत स्वैच्छिक संस्था-डेवलपमेंटल एसोसिएशन फार ह्यूमन एडवांसमेंट (देहात) द्वारा कोरोना महामारी के चलते उत्पन्न रोजी रोटी संकट एवं बढ़ती गरीबी के चलते मानव तस्करी की बढ़ती संभावनाओं के चलते अभियान की शुरुआत की गई।

30 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय मानव तस्करी निषेध दिवस के मद्देनजर 29 जुलाई को देहात संस्था, उत्तर प्रदेश पुलिस व कैरीटास इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में “स्वरक्षा परियोजना” के अंतर्गत भारत-नेपाल सीमा के 37 गाँवों के लिए एक जागरुकता रथ रवाना किया गया।

इस रथ के जरिए इंडो-नेपाल बॉर्डर के सुजौली और रुपैडीहा थाना क्षेत्र के गांवों में कोरोना वायरस महामारी से बचाव हेतु सरकारी निर्देशों, पलायन से वापस आए मजदूरों हेतु सरकारी योजनाओं, गरीबी व बेरोजगारी के विरुद्ध शासन की योजनाओं, मानव तस्करी से बचाव के तरीके व पुलिस हेल्पलाइन-112, चाईल्ड हेल्पलाइन-1098, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1076 आदि के बारे में जन सामान्य को माईक के माध्यम से उदघोषणा कर जागरूक किया गया।

मानव तस्करी के खिलाफ सुरक्षा के प्रमुख बिंदुओं वाले हैंड बिल वितरित किये गये, जिसमे बताया गया कि खुद को और अपने परिवार को असुरक्षित प्रवासन, बाल श्रम और मानव तस्करी से कैसे बचाएं।

समुदाय की भागीदारी के लिए, विशेष रूप से बच्चों की, कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, इन गांवों के बच्चों को ड्राइंग किट वितरित किए गए, और उसमे मानव तस्करी के विषय पर चित्र बनाने के लिए कहा गया। प्रवासियों और अन्य सदस्यों से संबंधित महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं वाले बैनर और हैंडबिल को मौजूदा योजनाओं और नीतियों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए विधिवत तरीके से वितरित किया गया। आयोजनों की एक श्रृंखला के साथ यह अभियान 30 जुलाई को समाप्त होगा।

पुलिस अधिकारियों एवं एसएसबी कर्मियों के साथ एक परस्पर संवादात्मक बैठक के बाद, एक हस्ताक्षर अभियान होगा।

देहात संस्था के मुख्य कार्यकारी जितेन्द्र चतुर्वेदी ने बताया कि इस कार्यक्रम का समापन रुपईडीहा पुलिस स्टेशन के बाल-मित्र थाने में होगा, जहाँ बच्चों द्वारा बनाए गए चित्र सभी आगंतुकों और समुदाय के सदस्यों को देखने के लिए बाल-मित्र थाने में एक स्थापना के रूप में प्रदर्शित किए जाएंगे।

इन गांवों के सामुदायिक सदस्यों ने जागरूकता फैलाने के लिए काम की बहुत सराहना की, विशेष रूप से एक महामारी संकट के दौरान मानव तस्करी पर ध्यान केंद्रित करने और सदस्यों को उनकी पहल के लिए धन्यवाद दिया। इस अभियान के आयोजन में मुख्य भूमिका समन्वयक हसन फ़िरोज़, अस्मिता सरकार, रमाकांत पासवान, गीता प्रसाद, पवन कुमार , विजय यादव , देवेश अवस्थी व अन्य टीम सदस्य मौजूद रहे ।

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