Monday, July 4, 2022
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नदियों और जलाशयों को संरक्षित करने के लिए नदी सम्मेलन और पूर्वांचल नदी यात्रा करने का फैसला

गोरखपुर। विश्व वेटलैंड्स डे पर आज प्रेमचंद पार्क में हुई एक बैठक में पूर्वांचल की नदियों, जलाशयों और उनके वेटलैंड को संरक्षित करने, प्रदूषण, अतिक्रमण और अवैध बालू खनन रोकने के लिए लोगों को जागरूक करने और इस दिशा में सरकार पर कार्य करने के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से पूर्वांचल नदी मंच नामक संगठन का गठन किया गया।

यह संगठन 27 फरवरी से गोरखपुर और बस्ती जिले के सात जिलों की नदी तटों की यात्रा के लिए पूर्वांचल नदी यात्रा शुरू करेगा। इसके पहले 14 फरवरी को गोरखपुर में नदी सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

पूर्वांचल नदी मंच के संयोजक मंडल में रामगढ़ ताल सहित कई जलाशयों और उसके वेटलैंड को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य करने वाले पूर्व कुलपति प्रो राधेमोहन मिश्र, आमी नदी को प्रदूषण मुक्त करने की एक दशक से अधिक समय से संघर्ष करने वाले आमी बचाओ मंच के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह, देवरिया में स्याही नदी को बचाने के लिए आंदोलन कर रहे अच्छेलाल कुशवाहा शामिल हुए हैं। ये सभी लोग बैठक में शामिल थे।

इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकार मनोज कुमार सिंह, अशोक चौधरी, कुशीनगर से आये हृदयानंद शर्मा, महराजगंज से आये अनिल सिंह, संतकबीर नगर से आये सुनील गौड़, गोरखपुर के पिपरौली से दिग्विजय सिंह, उनवल से गिरिजेश तिवारी, गोरखपुर के युवा नेता सुजीत सोनू, पीयूसीएल के विकास द्विवेदी भी संयोजक मंडल में शामिल हुए और इस आंदोलन से जुड़ने का ऐलान किया। बैठक में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और उसके द्वारा गठित मॉनिटरिंग कमेटी द्वारा आमी नदी, रामगढ़ ताल सहित कई नदियों व जलाशयों को प्रदूषण मुक्त, अतिक्रमण मुक्त और अविरल बनाने की दिशा सरकार व सरकारी एजेंसियों को दिए गए निर्देश व की गई कार्यवाही का स्वागत किया गया।

वक्ताओं ने कहा कि नदियों व जलाशयों के संरक्षण में स्थानीय लोगों की भागीदारी जरुरी है। पूर्वांचल नदी यात्रा इस दिशा में एक महत्वपूर्ण अभियान साबित होगी। इस यात्रा के जरिये गोरखपुर-बस्ती मंडल की सभी नदियों, बड़े जलाशयों की स्थिति का अध्ययन किया जाएगा, प्रदूषण, अतिक्रमण, अवैध बालू खनन, नदी व जलाशय के जल के अत्यधिक दोहन से उत्पन्न समस्या के बारे में स्थानीय नागरिकों से जानकारी ली जाएगी। साथ ही लोगों को नदियों व जलाशयों, वेटलैंड के बारे जागरूक करने का कार्य किया जाएगा। इसके लिए यात्रा के दौरान नदी घाटों पर सभा, सम्मेलन, संगोष्ठी आयोजित की जाएगी।

बैठक में कुशीनगर जिले की ऐतिहासिक हिरण्यवती के अस्तित्व पर उत्पन्न खतरे, बांसी नदी के प्रदूषित होने और देवरिया जिले में स्याही नदी के सूख जाने पर चिन्ता व्यक्त की गई। इन तीनों नदियों को पूर्वांचल नदी यात्रा में टॉप एजेंडे पर लेने का निर्णय लिया गया। बैठक में दोनों मंडलों में कई स्थानों पर नदियों के कटान से घर और खेती की जमीन खो देने वाले लोगों के पुनर्वास की व्यवस्था नहीं करने व मुवावजा नहीं दिए जाने पर आक्रोश जताया गया और इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने का फैसला लिया गया।

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