Friday, January 27, 2023
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धर्मेंद्र कटियार के गजल संग्रह “ शहर के वास्ते ” में गरीब- मजदूर की पीड़ा है

बांगरमऊ (उन्नाव)। भगत सिंह-अंबेडकर लाइब्रेरी व साहित्य लोक बांगरमऊ के तत्वावधान में 27 नवम्बर को वरिष्ठ कवि धर्मेंद्र कटियार के नवीनतम गजल संग्रह ” शहर के वास्ते” का विमोचन और कवि सम्मेलन व मुशायरे का आयोजन किया गया।
नगर के हरदोई -उन्नाव मार्ग पर स्थित हरित लोक ढाबा पर आयोजित किए गए वरिष्ठ कवि धर्मेंद्र कटियार के नवीनतम प्रकाशित गजल संग्रह “शहर के वास्ते” के विमोचन कार्यक्रम के अवसर पर मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं समीक्षक प्रोफेसर वाचस्पति ने कहा कि उन्नाव जनपद कलम व तलवार का धनी रहा है। साहित्य के क्षेत्र में धर्मेंद्र कटियार ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इन्होंने समसामयिक रचनाएं कहने के साथ ही उनकी रचनाओं में गंभीर चिंतन के साथ ही गरीब- मजदूर की पीड़ा साफ झलकती है।

मुख्य वक्ता असगर बिलग्रामी ने अपने संबोधन में कहा कि धर्मेंद्र कटियार का नाम साहित्य जगत में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। इन्होंने हमेशा गंगा जमुनी तहजीब को बढ़ावा दिया है। इन्होंने गांव, किसान, गरीब की आवाज बनकर साहित्य में पिरोने का काम किया है।

इसके बाद एक कवि सम्मेलन व मुशायरे का भी आयोजन किया गया। शायर जमालुद्दीन “जमाल” ने अपनी ग़ज़ल पढ़ी–” मेरे महबूब वादा निभा दीजिए, जो खलिश दिल में है अब मिटा दीजिए।” कवि अमोल सिंह अमर ने पढ़ा–” आज फिजा में मदहोशी शोखी है अल्हड़ चंचलता, भौरों ने कलियों से शायद प्रणय गीत दोहराया है।” नौजवान कवि व शायर फजलुर्रहमान “फ़ज़्ल”बांगरमवी ने अपनी ग़ज़ल पढ़ी जो काफी सराही गई–” निगाहे नाज से बिजली गिराई जाती है, नजर की चोट कलेजे पे खाई जाती है। बीज नफरत के कभी हम नहीं बोया करते, हमारे घर में मोहब्बत सिखाई जाती है।”

हरदोई जनपद से आए प्रसिद्ध कवि पवन कश्यप ने पढ़ा–” तिनकों से घर बना दिया मैंने, श्राप को वर बना दिया मैंने। तुमने पत्थर जिसे बनाया था, संगमरमर बना दिया मैंने।।” शायर असगर बिलग्रामी ने अपनी ग़ज़ल पढ़ी–” आग गुलशन में कैसे लगाते भला, हमको अपने ही सब आशियाने लगे।”  डॉ सतीश दीक्षित ने पढ़ा–” जागृत शब्दों के शिल्पकार हम चेतनता के संवाहक, ले धर्मध्वजा हम ज्ञान यज्ञ के दीप जलाने आए हैं।” कवि राघवेंद्र राघव ने पढ़ा–” सत्य पथ पर जो चला उसका समय चरण हुआ है, और वह ही समय के उल्लेख का कारण हुआ है।” कवि राम बिहारी वर्मा ने पढ़ा–” जिंदगी एक अनुबंध है उस पर सांसों का प्रतिबंध है, दस्तखत तेरी धड़कन पर है दिल लिफाफा तेरा बंद है।” इस मौके पर प्रोफेसर वाचस्पति, नगर पंचायत गंजमुरादाबाद के चेयरमैन रामनरेश कुशवाहा, सत्येंद्र नाथ, वरिष्ठ पत्रकार प्रेरणा कटियार, आरती, शार्दुल विक्रम, वेदांत विक्रम, नितीश कनौजिया, अबरार खां मुन्ना, गोपाल रस्तोगी, पियूष शुक्ला, अर्पित गुप्ता, आनंद प्रकाश जोशी व फजलुर्रहमान सहित काफी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।

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