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कोरोना काल में दूसरे प्रांतों से महराजगंज आए 4850 बच्चों को लगेगा जापानी इंसेफेलाइटीस का टीका

महराजगंज। कोरोना काल के दौरान गैर प्रांतों से आए नौ माह से 15 साल के 4850 प्रवासी बच्चों को चिन्हित किया गया हैं जिन्हें जापानी इंसेफलाइटिस (जेई) का टीका लगेगा। इसमें से 530 प्रवासी बच्चों को जेई का टीका लगा दिया गया है। शत प्रतिशत प्रवासी बच्चों के टीकाकरण के लिए करीब 5000 जेई के टीके की दरकार है। इनकी मांग शासन से की गयी है।

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डाॅ. आइए अंसारी ने उपरोक्त्त जानकारी देते हुए यह भी कहा कि शासन से निर्देश मिला कि प्रवासी बच्चों को भी जापानी इंसेफ्लाइटिस का टीका लगवा दिया ताकि बीमारी से बचाया जा सके।

इस निर्देश के क्रम में 15 साल तक के बच्चों का सर्वे कराया गया। सर्वे से पता चला कि कुल करीब 4850 प्रवासी बच्चे जिले में आए हैं। जिनका जेई टीकाकरण कराना है। उपलब्ध टीके से उक्त बच्चों का टीकाकरण कराया है।

उन्होंने कहा कि महराजगंज इंसेफ्लाइटिस को लेकर काफी संवेदनशील है। पिछले कई सालों के दौरान टीकाकरण तथा साफ सफाई के लिए जागरूकता की बदौलत काफी हदतक इस दिमागी बुखार ( नौकी बीमारी) पर काबू पाया जा सका है। कोरोना काल में अधिकतर उन प्रांतों से प्रवासी बच्चे आए जहां पर इंसेफ्लाइटिस जैसी बीमारी का प्रकोप नहीं होता है। उन प्रांतों में नियमित टीकाकरण में जेई का टीका शामिल नहीं होता है।

ऐसे में जिले में प्रवास के दौरान ऐसे बच्चों के बीमारी से प्रभावित होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में प्रवासी बच्चों को दिमागी बुखार से बचाने के लिए जेई टीकाकरण की आवश्यकता बेहद जरूरी है।

 टीकाकरण का लक्ष्य: 4850
– 9 से 12 माह – 168
– 16 से 24 माह- 558
– 2 साल से 15 साल-4124

बच्चों की संख्या जिनको टीका लगा
-9 से 12 माह–88
-16 से 24 माह-422
-दो वर्ष से 15 वर्ष-20

वर्ष 2008 से शुरू है जेई टीकाकरण

डिप्टीे सीएमओ डाॅ. आईए अंसारी ने बताया कि विशेष टीकाकरण अभियान वर्ष 2008 से जिले में शुरू हुआ था, इसके बाद इस टीके को अन्य टीकों के साथ लगाया जाने लगा। जेई टीकाकरण, साफ सफाई एवं दस्तक अभियान का नतीजा है कि अब जिले में जेई के केस में लगातार गिरावट आ रही है।

क्या करें जब तेज बुखार हो जाए

-तेज बुखार होने पर तत्काल नजदीक के सरकारी अस्पताल पर जाएं।
-सामान्य पानी की पट्टी सिर, पांव व पेट पर रखी जाएं ।
– बुखार आने पर स्वच्छ पेयजल, नारियल पानी,ताजे फल के रस का सेवन करें।

संक्रामक रोगों से से बचाव के उपाय
-घर के आसपास व नालियों में जलभराव रोकें। नियमित सफाई कराएं।
– सुअरबाड़ों को आबादी से दूर कराएं।
-झाड़ियों की सफाई कराते रहें ।
-इंडिया मार्का हैंडपंप का पानी पिएँ।
-भोजन से पहले और शौच के बाद हाथ साबुन पानी से 60 सेकेंड तक ठीक से धोवें।

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