Sunday, January 29, 2023
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देवरिया के पांच बच्चों में मिले फाइलेरिया के लक्षण

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुरू किया प्री-ट्रांसमिशन ऐसेसमेण्ट सर्वे
चिह्नित चार स्थानों पर शिविर लगाकर हो रही है बच्चों की जाँच
देवरिया, फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले में प्री टास (ट्रांसमिशन ऐसेसमेण्ट सर्वे) के तहत चयनित चार स्थानों पर सोमवार को मलेरिया विभाग की टीम ने पांच से दस वर्ष तक के 200 बच्चों में फाइलेरिया की जांच की. जिसमे पांच बच्चे पाजिटिव मिले.
भारत सरकार के निर्देश पर जिले में फाइलेरिया कार्यक्रम के अंतर्गत प्री ट्रांसमिशन ऐसेसमेण्ट सर्वे शुरू किया गया. सर्वे में मलेरिया विभाग की टीम ने नगर के नेहरू प्राथमिक विद्याल गरूलपार, भागलपुर ब्लाक के सतराव, प्राथमिक विद्याल चुनकी लार व भाटपाररानी ब्लाक के सरया गांव में शिविर लगाकर बच्चों में फाइलेरिया की जाँच की. प्रत्येक शिविर में 50 बच्चों की जांच की गई. मलेरिया अधिकारी सुधाकर मणि, सीपी मिश्रा, मलेरिया निरीक्षक विचित्र मणि, सीपी सिंह, एलटी धर्मेंद्र कुमार एएनएम पुष्पा सहित अन्य लोगों की टीम ने जिले के कुल 200 बच्चों का परीक्षण किया गया. जिसमे प्राथमिक विद्यालय लार में 5 बच्चे पॉजिटिव पाए गए. 6 वर्ष की संजना, 9 वर्ष की चंदा, 10 वर्ष की निधि पांडेय, 8 वर्ष की कनक, 5 वर्ष के गौरव साहनी में फाइलेरिया पाया गया. जिनका इलाज विभाग कराएगा. सहायक मलेरिया अधिकारी सुधाकर मणि ने बताया कि यह बीमारी मच्छर के काटने से होती है. इसे सामान्यत: हाथी पांव के नाम से भी जाना जाता है. इसके मच्छर अधिकतर गंदगी में पनपते हैं. संक्रमित व्यक्ति को काटकर यह मच्छर संक्रमित हो जाते हैं. इसके बाद यही संक्रमित मच्छर स्वस्थ व्यक्ति को काटकर संक्रमित कर देते हैं. इससे संक्रमित व्यक्तियों को हाथी पाँव व हाइड्रोसिल का खतरा बढ़ जाता है. सामान्यत: तो इसके कोई लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते हैं.
30 अगस्त तक चलेगा सर्वे 
जिला मलेरिया अधिकारी एसपी त्रिपाठी ने बताया कि उच्चाधिकारियों द्वारा जिले को फाइलेरिया उन्मूलन हेतु प्री टास सर्वे के लिए चयनित किया गया है. जिसके लिए जिले के चार स्थानों गरूलपार, भागलपुर ब्लाक के सतराव, प्राथमिक स्वाथ्य केंद्र लार व भाटपाररानी ब्लाक के सरया गांव में 26 से 30 अगस्त तक प्री टास (ट्रांसमिशन ऐसेसमेण्ट सर्वे) आयोजन किया जाएगा. जिले में कुल 1200 बच्चों की जाँच होनी है. इसके तहत चार अलग अलग टीमों को लगाया गया है. इन टीमों में एक एएसएम, दो एमपीडब्लू, एक एलटी और प्रभारी चिकित्सा अधिकारी द्वारा चयनित एक सुपरवाइजर शामिल हैं. सर्वे के दौरान प्रत्येक स्थानों से 5 से 10 साल तक के बच्चों का एफटीएस किट से खून का सैम्पल लिया जाएगा, जिससे 10 मिनट में पता चल जाएगा कि बच्चों का सैम्पल निगेटिव है या पाजिटिव. उन्होंने बताया कि सैम्पल पाजिटिव पाये जाने बच्चों की पुनः नाइट ब्लड सर्वे के दौरान रक्त पट्टिका मैनुअल जांच की जाएगी और यदि फिर भी ब्लड पाजिटिव आता है तो उन्हे बीमारी से निजात दिलाने के लिए 12 दिन के कोर्स की दवाएं दी जाएंगी.
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