Saturday, August 13, 2022
Homeसाहित्य - संस्कृतिजनगीतों के जरिये याद किए गये गोरख पांडेय

जनगीतों के जरिये याद किए गये गोरख पांडेय

कुशीनगर. ‘तू हवs श्रम के सुरूजवा, हम किरिनिया तुहार…’ श्रम व मेहनतकश के सपनों की जिंदा तस्वीर उकेरती जनकवि गोरख के इन जनगीतों को गा कर उन्हें याद किया गया। जन संस्कृति मंच, संदेश परिवार हाटा द्वारा 29 जनवरी को गोरख पांडेय की जन्मस्थली से कुछ ही दूरी पर महिला महाविद्यालय भैंसहा सदर कुशीनगर में 9वां गोरख स्मृति समारोह आयोजित किया गया. इस अवसर पर  संगोष्ठी हुई , काव्य गोष्ठी में कवितायेँ पढ़ी गईं और अलख कला समूह द्वारा नाट्य मंचन  किया गया.

 

कर्यक्रम में सैकडों की संख्या में मौजूद महाविद्यालय के छात्राएं गोरख के जनगीत- समाजवाद बबुआ धीरे धीरे आई…, तू हवs श्रम के सुरूजवा…, हमारे वतन की नयी जिंदगी हो… और उनके संस्मरणों में अपनी ही माटी की सोंधी महक पाकर अभिभूत हो उठे. इन जनगीतों को स्थानीय युवा धीरज यादव व शिक्षक जितेंद्र प्रजापति ने भावपूर्ण आवाज दिया. इस अवसर पर ‘आज का समय और गोरख पांडेय’ विषय पर अपनी बात रखते हुए जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य अशोक चौधरी ने गोरख पांडेय के साथ अपने संस्मरण को साझा किया. उन्होंने कहा कि गोरख हमारे बीच के हैं, वह हमारे साथ के हैं. उन्होंने कहा कि कोई भी रचनाकार कालजयी तभी होता है जब वह दलित, पीड़ित व दुनिया में अपनी बेहतरी के लिए लड़ रहे लोगों के साथ खड़ा नजर आए. गोरख अपने जीवन काल में और अब रचनाओं के जरिए खड़े हैं.

इसी क्रम में स्थानीय निवासी नागेंद्र मिश्रा ने उनके साथ अपने संस्मरण को ताजा किया. उन्होंने बताया कि उस समय जिले के सबसे संपन्न परिवार में जन्मे गोरख ने कैसे जनपक्ष और समाजवाद का रास्ता चुना। उन्होंने गोरख पर लिखे अपने गीत- पूंजीवाद हमें ना सोहाय हो, हम करबs विरोधवा… को सुनाया.

अभिनव कदम के संपादक जयप्रकाश ‘धूमकेतु’ ने कहा कि पूंजीवाद के विरूद्ध जनवाद का अलख जगाने वाले कवि थे गोरख. वह अंधेरे में ऊजाले का गीत गा रहे थे. उनकी कविताओं में लोकभावना है, जन भावना है, खेत-खलिहान की भाषा है, आम गरीब गुरबों की भाषा है. उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए आधी आबादी के शोषण के संंदर्भ में गोरख पांडेय की ‘मैना’ गीत पर व्याख्या प्रस्तुत की. देवरिया पीजी कालेज के प्राचार्य प्रो. असीम सत्यदेव ने बाजारवाद और पूंजीवाद के खतरनाक प्रभाव को बेहतरीन संवाद शैली में प्रस्तुत कर इसके खोखलेपन व कमजोरियों को रेखांकित किया. उन्होंने गोरख के सपने से इसे जोड़ते अंधेरे के बाद उजाला और उम्मीद की सुबह बताई.

9वें गोरख स्मृति समारोह के आयोजन पर जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय महासचिव मनोज सिंह ने आयोजकों व महाविद्यालय प्रबंधन को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर उन्होंने गोरख पांडेय के छोटे भाई बलराम पांडेय की उपस्थिति पर उन्हें कृतज्ञता अर्पित की. उन्होंने खुशी जाहिर की कि आयोजन में ज्यादा तदाद में युवा विशेषकर छात्राएं मौजूद रहीं. उन्होंने कहा कि हो सकता है बहुतों का गोरख पांडेय से पहला परिचय हो, पर इस आयोजन का मकसद भी यही है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस क्रांतिकारी कवि की रचनाओं व विचारों से परिचित हों. उन्होंने कहा कि आज जब देश दुनिया में गोरख पांडेय पर कर्मक्रम आयोजित कर उन्हें याद किया जा रहा है तब यह गर्व की बात है हम उनके जन्मस्थान के करीब उसी माटी पर यह आयोजन कर रहे हैं.

कार्यक्रम के उत्तरार्ध का महत्वपूर्ण आयोजन काव्य गोष्ठी का रहा. जिसमें स्थानीय कवियों ने अपनी कविता, गीत व गजल की बेहतरीन प्रस्तुतियों से इस समारोह को यादगार बना दिया। इस काव्य गोष्ठी में दिनेश तिवारी ‘भोजपुरिया’, रामप्यारे भारती, चतुरानन ओझा, सरोज कुमार पांडेय, उमंग चौधरी, अब्दुल हमीद ‘आरजू’, कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, चंदेश्वर ‘परवाना’ शरीक हुए. कार्यक्रम के समापन पर गोरखपुर के अलख कला समूह द्वारा भारत पाक बंटवारे पर आधारित नाटक ‘ टोबा टेक सिंह ‘ का मंचन किया गया. नाटक का निर्देशन बेचन सिंह पटेल ने किया.

कार्यक्रम का संचालन युवा कवि एवं जन संस्कृति मंच के राष्ट्रिय परिषद् के सदस्य सच्चितानंद पाण्डेय ने किया. इस अवसर पर महाविद्यालय के प्रबन्धक अशोक पाण्डेय, उद्भव मिश्र, प्रेमलता पांडेय, रामकिशोर वर्मा, बैजनाथ मिश्र, जे एन शाह, चतुरानन ओझा आदि उपस्थित थे.

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments