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गोरखपुर। मनुष्य की यह विशेषता है कि वह तीनों कालों में विचरण करता है। यह प्रकृति में मानव और उसके समाज को विशिष्टता प्रदान करता है। इतिहास के विधिवत अध्ययन से ही वर्तमान और भविष्य का सही और सुसंगत ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। मानवीय ज्ञान तभी सम्पूर्ण हो सकता है जब पक्षपात रहित और तथ्यपरक हो।

यह बात प्रो अनंत मिश्र ने डाॅ. मनउअर अली की किताब ‘प्राचीन भारतीय सामाजिक इतिहास लेखन ‘ के विमोचन के अवसर पर आयोजित ‘इतिहास के सामाजिक सरोकार’ विषयक परिचर्चा में कही।

परिचर्चा में शिरकत करते हुए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग के आचार्य राजवंत राव ने कहा कि भारत में इतिहास कई दृष्टियों से लिखा गया है। एक अच्छा लेखक इतिहास में विवेक और अविवेक के तत्व के पहचान करते हुए तथ्य के अनुसार विश्लेषण को प्रस्तुत करता है।

अध्यक्षीय संबोधन करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता राजाराम चौधरी ने कहा कि जनपक्षधर लोगों को जनता के पक्ष में लगातार लेखन करना चाहिए जिसमें शोषकों को पहचानने की कोशिश करनी चाहिए। इतिहास की प्रासंगिकता जनता के उन्नयन को ध्यान में रखकर लिखा जाना चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ अलख निरंजन ने भारत के जटिल समाज और विभिन्न विचारधाराओं को ध्यान में रखते कहा कि सभी धाराएं अपने अपने उद्देश्य को ध्यान में रखकर इतिहास का लेखन और समर्थन करती आयी है। इससे भारत के वास्तविक इतिहास से हम अनजान रहे हैं। बुद्धिजीवियों का यह कर्तव्य है कि वह जनता के इतिहास से जनता को परिचित कराये। डॉ असीम सत्यदेव ने कहा कि समकालीन समय में इतिहास बोध से सम्पन्न नागरिकों की आवश्यकता है। लेखक को इस महत्वपूर्ण काम के लिए बधाई दी जानी चाहिए।

इस अवसर पर डॉ अरविंद कुमार, अमोल  राय, डाॅ महेंद्र राय,अक्षयवर नाथ तिवारी, सच्चिदानंद मिश्र, मुदित कुमार मिश्र, धर्मेंद्र श्रीवास्तव, विनोद रावत ,साहिल अंसारी , राजेश कुमार सहित तमाम नागरिक और साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।

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