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देवरिया। कालाजार के सामान्य मरीज को 500 रुपये इलाज पूरा हो जाने के बाद श्रम ह्रास के तौर पर दिया जाता है। जो आशा कार्यकर्ता मरीज को चिन्हित करवाती हैं, उन्हें भी 500 रुपये दिये जाते हैं। चार-पांच वर्ष पहले वीएल मरीज का इलाज एक माह तक चलता था लेकिन अब एक दिन में इलाज हो जाता है । निजी क्षेत्र में जहां इस बीमारी का इलाज कराने में लाखों रुपये खर्च करने पड़ते हैं, वहीं सरकारी क्षेत्र में यह सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है।
उक्त बातें अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेंद्र सिंह ने बनकटा ब्लॉक के जगदीशपुर गांव में कालाजार मरीजों के स्वयं सहायता समूह की कार्यशाला और स्वास्थ्य शिविर को संबोधित करते हुए कहीं ।
जिले में कालाजार बीमारी से खुद जूझ रहे और इससे लड़ कर स्वस्थ हो चुके मरीज इस बीमारी के उन्मूलन में हिस्सेदार बनेंगे । ऐसे मरीजों के द्वारा बने स्वयं सहायता समूहों को ही स्वास्थ्य विभाग ने स्वयंसेवी संस्था सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर) के सहयोग से जगदीशपुर गांव में शुक्रवार को संवेदीकृत किया।
इस मौके पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि कालाजार के पीकेडीएल मरीज (चमड़ी वाला कालाजार) को 4000 रुपये इलाज के बाद दिया जाता है। इनकी दवा 84 दिन चलती है। कालाजार बीमारी से बचाव के लिए जिले में निःशुल्क मच्छरदानी का भी वितरण किया जा रहा है। जिले का बनकटा ब्लॉक और पथरदेवा ब्लॉक कालाजार की दृष्टि से संवेदनशील है। कच्चे मकान वाले मरीजों को जिला प्रशासन की मदद से पक्का मकान दिलवाने का भी प्रयास हो रहा है।
जिला मलेरिया अधिकारी राधेश्याम यादव ने कालाजार की रोकथाम के लिए किये जा रहे सरकारी प्रयासों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कालाजार की वाहक बालू मक्खी जमीन से छह फीट की ऊंचाई तक उड़ सकती हैं। ऐसे में दवा का छिड़काव घर के अंदर तथा बाहर छह फीट तक कराना है। लोगों को बताया जाए कि छिड़काव के बाद तीन माह तक छिड़काव स्थल पर पुताई नहीं होनी चाहिए।
कालाजार के बारे में जानकारी देते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रतिनिधि डॉ. तनुज शर्मा ने बताया कि कालाजार की वाहक बालू मक्खी के काटने के बाद मरीज बीमार हो जाता है। उसे बुखार होता है और रुक-रुक कर बुखार चढ़ता-उतरता है। लक्षण दिखने पर मरीज को चिकित्सक को दिखाना चाहिए। इस बीमारी में मरीज का पेट फूल जाता है। भूख कम लगती है। शरीर काला पड़ जाता है। डॉ. शर्मा ने बताया कि वेक्टर जनित रोग कालाजार की वाहक बालू मक्खी कालाजार रोग के परजीवी लीशमेनिया डोनोवानी को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलाती है । बालू मक्खी कम रोशनी वाली और नम जगहों – जैसे कि मिट्टी की दीवारों की दरारों, जानवर बंधने के स्थान तथा नम मिट्टी में रहती है।  कालाजार एंडेमिक जनपदों में यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से ज्यादा से बुखार हो और वह मलेरिया या अन्य उपचार से ठीक न हो तो उसे कालाजार हो सकता है ।
कालाजार चैंपियन और पेशे से राजमिस्त्री विनोद कुमार सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें तीन माह से बुखार आ रहा था और उन्होंने कई जगहों पर अपनी जांच कराई। फिर भी बुखार ठीक नहीं हुआ तो वह बनकटा गये । जांच कराया तो कालाजार निकला और फिर घर लौट आए । घर पर आशा कार्यकर्ता आईं और देवरिया जाने को कहा। देवरिया जिला अस्पताल में जांच हुआ तो कालाजार के साथ पीलिया और लीवर की भी बीमारी पता चली, लेकिन इलाज नहीं मिला। देवरिया के बाद लखनऊ गये और फिर सिवान (बिहार) गये तब जाकर इलाज हुआ। प्राइवेट इलाज में दो लाख से अधिक का खर्च हो गया । इलाज के छह माह बाद काम करने की स्थिति में आए । कर्ज लेकर दवा करानी पड़ी । सीफॉर संस्था की मदद से विनोद अब स्वयंसहायता ग्रुप के जरिये जागरूकता की मुहिम से जुड़ चुके हैं । वह इस ग्रुप के जरिये मरीजों को जागरूक करेंगे और उनकी मदद करेंगे ।
इस अवसर पर विशेषज्ञों द्वारा कालाजार बीमारी के बारे में पूछे गये सवालों के  जवाब भी दिये गए । स्वयंसेवी संस्था पीपुल्स कंसर्न इंटरनेशनल (पीसीआई) के प्रतिनिधि विकास कुमार ने कालाजार रोधी दवा के छिड़काव की सावधानियों के बारे में जानकारी दी । उन्होंने बताया कि कालाजार रोधी दवा का छिड़काव खाना बनने वाले घर और पूजा घर में भी किया जाना चाहिए। छिड़काव के एक घंटे बाद ही घर के अंदर जाएं। सीफॉर संस्था से दीप पांडेय और अश्वनी पांडेय ने कालाजार उन्मूलन में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका के बारे में जानकारी दी ।
इस मौके पर डॉ. एसके पांडेय ने बताया कि  कार्यशाला के पहले चरण में तीन अलग-अलग ग्रुप के सदस्यों को संवेदीकृत किया गया जो कालाजार उन्मूलन की गतिविधियों में सहयोग करेंगे । ग्रुप  के माध्यम से सभी लोग सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं से लाभान्वित होंगे और भविष्य में यदि कोई कालाजार से संक्रमित होता है तो उसका त्वरित जांच करके उसका उपचार होने पर संक्रमण की आशंका कम हो जाती है । यह उन्मूलन की तरफ पहला कदम होगा । कालाजार का दूसरा पहलू बालू मक्खी पर नियंत्रण है ।  सभी लोग इस सरकारी योजना को जानकर अपने घरों में एवं दूसरे घरों में भी छिड़काव के लिए प्रेरित करेंगे जिससे बालू मक्खी का खात्मा होगा और यह उन्मूलन की तरफ दूसरा कदम होगा ।
जांचे गये संभावित मरीज
कार्यक्रम में मौके पर ही कालाजार के सात संभावित मरीजों की जांच की गयी जिसमें से एक चमड़ी वाले कालाजार (पीकेडीएल) मरीज की पहचान हुई । स्वास्थ्य जांच बनकटा ब्लॉक के डॉ. नवीन कुमार और उनकी टीम ने पाथ संस्था के प्रतिनिधि डॉ. पंकज के सहयोग से की । कार्यक्रम के दौरान सात कालाजार मरीजों को सूची के अनुसार मच्छरदारी भी वितरित की गयी। मरीजों से कहा गया कि सूची के अनुसार बाकी लोगों को भी मच्छरदानी दी जाएगी । इसके अलावा प्रशासन पात्र लोगों को पक्का आवास भी उपलब्ध करवाएगा।  इसके अलावा 25 लोगो की कोविड और डेंगू हेतु जांच की गई जिसमे कोई भी पॉज़िटिव नहीं मिला । कार्यक्रम में सहायक मलेरिया अधिकारी सुधाकर मणि, पीसीआई संस्था से देशदीपक और सीफॉर संस्था के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे । कार्यक्रम में ग्राम प्रधान समेत कुल 45 लोगों ने प्रतिभागिता की ।

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