Thursday, December 8, 2022
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भटनी चीनी मिल को चलाने की मांग को लेकर किसान संघर्ष समिति ने धरना-प्रदर्शन किया

देवरिया। भटनी चीनी मिल चालू करो किसान संघर्ष समिति के तत्वावधान में मजदूर नेता कृष्णकांत शुक्ला के नेतृत्व में मिल गेट पर 3 दिसंबर को धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया जिसमें मिल को आधुनिक बना कर संचालित करने एवं शुगर कंपलेक्स के रूप में विकसित करने की मांग की गई।

धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष शिवाजी राय ने कहा कि मिलों को बंद करने और बेचने की, निजीकरण की नीति को संचालित करने का काम सबसे पहले कल्याण सिंह की सरकार ने किया था जिसको मायावती और मुलायम सिंह ने भी आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि जब भी यह राजनीति को मंदिर-मस्जिद के करीब ले जाते हैं, जब भी जाति धर्म की राजनीति शुरू की जाती है तब तब जनता की संस्थाओं को कमजोर किया जाता है और मिलों को बेचने का काम तेज कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अगर मिलों को संचालित करना है तो मंदिर मस्जिद और धर्म की राजनीति, जाति की राजनीति से खुद को अलग करना होगा। उन्होंने कहा कि देवरिया की जनता को तथाकथित विकास के धोखे में रखकर यहां के 14 चीनी मिलों मैं से एक-दो को छोड़कर सभी को बंद कर दिया गया। इन सभी को आधुनिक तरीके से संचालित कर हम देवरिया को औद्योगिक हब बना सकते हैं।

इस अवसर पर पंचायत आंदोलन, समाज शिक्षा आंदोलन एवं संयुक्त किसान मोर्चा के नेता डॉक्टर चतुरानन ओझा ने कहा कि मिल के पुनर्निर्माण के लिए कारपोरेट परस्त राजनीति को परास्त करना जरूरी है अगर देसी विदेशी पूंजी पतियों के फायदे के लिए काम करने वाली पार्टियों को परास्त नहीं किया जाएगा तो ना तो हम सार्वजनिक मिलो का निर्माण कर पाएंगे और ना ही शिक्षा व्यवस्था और चिकित्सा व्यवस्था को पूरी तरह सरकारी, समान और गुणवत्तापूर्ण बना पाएंगे ।

उन्होंने कहा कि इन सरकारों ने सिर्फ मिलों को ही नहीं बंद किया है और बेचा है बल्कि सरकारी स्कूलों को भी बंद करने और बेचने की नीति चला रही है। आज सभी सरकारी स्कूलों को पीपीपी मॉडल के आधार पर निजी क्षेत्रों को सौंपा जा रहा है और उसमें ठेकेदारी और मुनाफाखोरी को स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भटनी चीनी मिल के गेट पर शुरू हुआ है आंदोलन क्षेत्र के जनता के लिए निजी करण के नीति के खिलाफ दूसरे मुद्दों को भी स्थापित करने का एक बड़ा मंच बनेगा।

संघर्ष समिति के संयोजक योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि मिल बंद होने से क्षेत्र में बेरोजगारी चरम पर है। कृषि से और गन्ना व्यवसाय से जुड़े सारे लोग पलायन करने के लिए मजबूर हुए हैं। इसलिए चीनी मिल चलाने का यह आंदोलन किसानों मजदूरों नौजवानों के संघर्ष का मंच बनेगा और सार्वजनिक संस्थाओं को बंद करने, बेचने, निजीकरण करने वाली व्यवस्था को उखाड़ फेंकेगा।

धरना में बड़ी संख्या में किसानों, मजदूरों, नौजवानों, महिलाओं ने भागीदारी की। कार्यक्रम को केडी यादव, रवि शंकर सिंह, जय मंगल मणि त्रिपाठी, ऋषिकेश मिश्र ,नागेंद्र शुक्ला, विजय जुड़ाथा ,धर्मेंद्र सिंह ,तारा यादव, श्रीनिवास मिश्र आदि ने भी संबोधित किया।

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